19 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Gangaur 2026: 21 मार्च को पूजी जाएंगी गवरजा माता, अखंड सौभाग्य के लिए इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा

Gangaur Puja 2026 : वर्ष 2026 में गणगौर का पर्व 21 मार्च को मनाया जाएगा। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, 20 मार्च को सिंजारा की रस्में, और अखंड सौभाग्य के लिए माता पार्वती की पूजा विधि।

5 min read
Google source verification

भारत

image

Manoj Vashisth

image

Nitika Sharma

Mar 19, 2026

Gangaur 2026

Gangaur 2026 : गणगौर पूजा कब है? जानें शुभ मुहूर्त, सिंजारा तिथि और महत्व (फोटो सोर्स: Gemini AI)

Gangaur 2026 Date : गणगौर का पर्व राजस्थान और भारत की भूमि के लिए बड़ा ही पवित्र और सुखद त्यौहार माना जाता है। इस पर्व को भारत में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। यह पर्व मां पार्वती को समर्पित है और इस पर्व में उन्हीं की पूजा की जाती है। खास तौर से राजस्थान में गणगौर (Gangaur 2026) का बेहद ही महत्व है। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि गणगौर का पर्व हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 21 मार्च 2026 को है। गणगौर (Gangaur 2026) की पूजा चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। इस दौरान सुहागन और कुंवारी कन्याएं माता पार्वती और शिवजी की पूजा करती हैं और पति की लंबी उम्र के लिए कामना करती हैं।

राजस्थान में गणगौर की खास रौनक | Rajasthan Gangaur 2026

इस पर्व की खास रौनक राजस्थान में देखने को मिलती है। राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात के कुछ इलाकों में भी यह पर्व मनाया जाता है। ये पर्व करवा चौथ जैसे ही मान्यता रखता है। इसके अनुसार कुंवारी कन्याएं और महिलाएं अच्छा पति पाने और पति के साथ सुखद जीवन व्यतीत करने के लिए इस व्रत का अनुसरण करती है। माना जाता है कि ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच भगवान शिव और मां पार्वती जैसा ही सुखद दाम्पत्य संबंध बनता है।

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि 21 मार्च को गणगौर (Gangaur 2026) पर्व मनेगा। ये त्योहार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। गणगौर पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि से आरम्भ की जाती है। इसमें कन्याएं और शादीशुदा महिलाएं मिट्टी के शिवजी यानी गण और माता पार्वती यानी की गौर बनाकर पूजन करती हैं। गणगौर के समाप्ति पर त्योहार धूम धाम से मनाया जाता है और झांकियां भी निकलती हैं।

सोलह दिन तक महिलाएं सुबह जल्दी उठकर बगीचे में जाती हैं, दूब और फूल चुन कर लाती हैं। दूब लेकर घर आती है उस दूब से मिट्टी की बनी हुई गणगौर माता दूध के छीटें देती हैं। वे चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन किसी नदी, तालाब या सरोवर पर जाकर अपनी पूजी हुई गणगौरों को पानी पिलाती हैं। दूसरे दिन शाम को उनका विसर्जन कर देती हैं। जहां पूजा की जाती है उस जगह को गणगौर का पीहर और जहां विसर्जन होता है उस जगह को ससुराल माना जाता है।

गणगौर पूजा (Gangaur 2026) की कई रस्में होती हैं जिनमें से एक है सिंजारा। इस दिन महिलाएं अपने हाथों में मेहंदी लगाती हैं साथ ही अपनी पूजी हुई गणगौरों को किसी नदी, तालाब या सरोवर में जाकर पानी भी पिलाती हैं। इसके बाद दूसरे दिन शाम में उनका विसर्जन किया जाता है। चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हुए गणगौर पर्व का समापन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होता है।

जानें पूजा का शुभ मुहूर्त | Gangaur 2026 Puja Muhurat

विवरण (Detail)तिथि और समय (Date & Time)
सिंजारा तिथि (Sinjara Date)20 मार्च 2026
गणगौर पूजा तिथि (Gangaur Puja)21 मार्च 2026
तृतीया तिथि प्रारंभ20 मार्च, मध्य रात्रि 02:30 AM
तृतीया तिथि समाप्त21 मार्च, रात्रि 11:56 PM
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 04:49 AM से 05:36 AM
अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:04 PM से 12:52 PM

20 मार्च को सिंजारा

गणगौर पूजा से एक दिन पहले सिंजारा मनाया जाता है। जिन लड़कियों की नई-नई शादी हुई है उनके पीहर से सिंजारा आता है। इस सिंजारे में मिठाई, घेवर, फल, कपड़े, चूड़ियां, गहने, मेहंदी इत्यादि चीजें होती हैं। इस दिन घर की महिलाएं एक-दूसरे के हाथों में मेहंदी लगाती हैं। लेकिन इस मेहंदी को लगाने से पहले इसे गणगौर माता को अर्पित किया जाता है। इसके अलावा इस दिन सुहाग पिटारी अपनी बेटी के यहां जरूर भेजी जाती है जिसमें सुहाग का सामान होता है। वहीं कई जगह नई नवेली दुल्हनें पहली बार गणगौर पूजने अपने मायके जाती हैं। तब सास अपनी बहू के लिए सिंजारा का सामान उसके मायके भेजती है तो वहीं बेटी के घरवाले भी लड़की की सास को सिंजारा देते हैं।

17 दिन तक मनाया जाता है यह पर्व

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि राजस्थान में गणगौर का त्योहार फाल्गुन माह की पूर्णिमा (होली) के दिन से शुरू होता है, जो अगले 17 दिनों तक चलता है। 17 दिनों में हर रोज भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाई जाती है और पूजा व गीत गाए जाते हैं। इसके बाद चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके व्रत और पूजा करती हैं और शाम के समय गणगौर की कथा सुनते हैं। मान्यता है कि बड़ी गणगौर के दिन जितने गहने यानी गुने माता पार्वती को अर्पित किए जाते हैं, उतना ही घर में धन-वैभव बढ़ता है। पूजा के बाद महिलाएं ये गुने सास, ननद, देवरानी या जेठानी को दे देते हैं। गुने को पहले गहना कहा जाता था लेकिन अब इसका अपभ्रंश नाम गुना हो गया है।

गणगौर पर्व - 21 मार्च 2026

तृतीया तिथि प्रारम्भ –20 मार्च को मध्य रात्रि 2:30 मिनट पर
तृतीया तिथि समाप्त – 21 मार्च को रात 11:56 मिनट पर
उदया तिथि को मानते हुए गणगौर का पर्व 21 मार्च 2026 को मनाया जाएगा और इसी दिन चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:49 मिनट से सुबह 05:36 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:04 मिनट से दोपहर 12:52 मिनट तक

अविवाहित कन्या करती हैं अच्छे वर की कामना

गणगौर एक ऐसा पर्व है जिसे, हर महिला करती है। इसमें कुवारी कन्या से लेकर, शादीशुदा तक सब भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि शादी के बाद पहला गणगौर पूजन मायके में किया जाता है। इस पूजन का महत्व अविवाहि त कन्या के लिए, अच्छे वर की कामना को लेकर रहता है जबकि, शादीशुदा महिला अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत करती है। इसमें अविवाहित कन्या पूरी तरह से तैयार होकर और शादीशुदा सोलह श्रृंगार करके पूरे सोलह दिन विधि-विधान से पूजन करती हैं।

देवी पार्वती की विशेष पूजा

गणगौर पर देवी पार्वती की भी विशेष पूजा करने का विधान है। तीज यानी तृतीया तिथि की स्वामी गौरी हैं। इसलिए देवी पार्वती की पूजा सौभाग्य सामग्री से करें। सौलह श्रृंगार चढ़ाएं। देवी पार्वती को कुमकुम, हल्दी और मेंहदी खासतौर से चढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही अन्य सुगंधित सामग्री भी चढ़ाएं।

गणगौर पर्व का महत्व

गणगौर शब्द गण और गौर दो शब्दों से मिलकर बना है। जहां ‘गण का अर्थ शिव और ‘गौर का अर्थ माता पार्वती से है। दरअसल, गणगौर पूजा शिव-पार्वती को समर्पित है। इसलिए इस दिन महिलाओं द्वारा भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा की जाती है। इसे गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से महिलाओं को अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान शिव जैसा पति प्राप्त करने के लिए अविवाहित कन्याएं भी यह व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव के साथ सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देने के लिए भ्रमण करती हैं। महिलाएं परिवार में सुख-समृद्धि और सुहाग की रक्षा की कामना करते हुए पूजा करती हैं।

गणगौर पूजने का गीत

  • गौर-गौर गोमनी, ईसर पूजे पार्वती, पार्वती का आला-गीला,
  • गौर का सोना का टीका, टीका दे टमका दे रानी, व्रत करियो गौरा दे रानी।
  • करता-करता आस आयो, वास आयो।
  • खेरे-खाण्डे लाड़ू ल्यायो, लाड़ू ले वीरा न दियो,
  • वीरो ले मने चूंदड़ दीनी, चूंदड़ ले मने सुहाग दियो।

Frequently Asked Questions

बड़ी खबरें

View All

धर्म और अध्यात्म

धर्म/ज्योतिष

ट्रेंडिंग