धरती का सबसे सुदंरतम् श्रृंगार है नारी : महादेवी वर्मा

धरती का सबसे सुदंरतम् श्रृंगार है नारी : महादेवी वर्मा

नारी मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है

नारी के नेत्रों में करुणा, सरलता और आनन्द के दर्शन होते हैं। नारी अपने विभिन्न रूपों में सदैव मानव जाति के लिये त्याग, बलिदान, स्नेह श्रद्धा, धैर्य, सहिष्णुता का जीवन बिताती रही है। नारी धरा पर स्वर्गीय ज्योति की साकार प्रतिमा मानी गई है। उसकी वाणी जीवन के लिये अमृत स्रोत है। उसके हास में संसार की समस्त निराशा और कटुता मिटाने की अपूर्व क्षमता है। नारी संतप्त हृदय के लिये शीतल छाया और स्नेह सौजन्य की साकार प्रतिमा है। नारी पुरुष की पूरक सत्ता है। वह मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उसके बिना पुरुष का जीवन अपूर्ण है। नारी ही उसे पूर्ण बनाती हैं जब मनुष्य का जीवन अंधकार युक्त हो जाता है तो नारी की संवेदना पूर्ण मुस्कान उसमें उजाला बिखेर देती है।

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नारी जाती इस धरती का सबसे सुंदरतम् श्रृंगार है

नारी केवल मांस-पिंड की संज्ञा नहीं है। आदिम काल से आज तक विकास पथ पर पुरुष का साथ देकर उसकी यात्रा को सफल बनाकर उसके अभिशापों को स्वयं झेलकर और अपने वरदानों से जीवन में अक्षय शाँति भर कर मानवों ने जिस व्यक्तित्व, चेतना और हृदय का विकास किया है, उसी का पर्याप्त नारी है। इसलिए यह कहना अनुचित नहीं होगा कि इस धरती का सबसे सुंदरतम् श्रृंगार है नारी जाती।

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नारी की महत्ता

कहना न होगा कि नारी का सहयोग तथा उसका महत्व मानव जीवन में उन्नति एवं विकास के लिये सदा अनिवार्य रहा है, आज भी है और आगे भी रहेगा। वह समाज, राष्ट्र, परिवार अथवा व्यक्ति उन्नति नहीं कर सकता जो किसी भी रूप में नारी का आदर नहीं कर सकता। जो समाज परिवार अथवा राष्ट्र नारी का जो कि उनका आधार तथा भक्ति स्रोत है अधिकार छीन लेता है वह पंगु होकर पर-दलित अथवा पतित अवस्था में पड़ा रहता है।

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