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द्वारका का अंत: महाभारत के बाद का वो काला दिन, जब अर्जुन की आंखों के सामने डूब गई द्वारका!

What happened to Dwarka after Krishna Death : क्या द्वारका सच में समुद्र में डूब गई थी? जानिए श्रीकृष्ण के अंतिम क्षण, गांधारी का श्राप, यदुवंश का विनाश और समुद्र के नीचे मिली प्राचीन नगरी के रहस्य।

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भारत

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Manoj Vashisth

Apr 22, 2026

Why Dwarka Sank After Krishna Death

Why Dwarka Sank After Krishna Death : क्या सच में डूब गई थी द्वारका? जानिए श्रीकृष्ण के अंतिम क्षण और यदुवंश का विनाश (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Why Dwarka Sank After Krishna Death : भगवान श्रीकृष्ण की महिमा निराली है। उन्होंने मथुरा में जन्म लिया, गोकुल में बचपन बिताया और द्वारका को अपनी कर्मभूमि बनाया। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस भव्य स्वर्ण नगरी को स्वयं भगवान ने बसाया था, वह अचानक समुद्र में क्यों समा गई? और कृष्ण के अंतिम क्षण कैसे थे? आइए, इतिहास और पुराणों के पन्नों को पलटते हैं।

क्यों छोड़नी पड़ी मथुरा?

कंस के वध के बाद उसका ससुर जरासंध क्रोध की अग्नि में जल रहा था। उसने मथुरा पर सत्रह बार आक्रमण किया। यादवों की सुरक्षा और रक्तपात रोकने के लिए श्रीकृष्ण ने मथुरा छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने समुद्र के बीच एक द्वारका नगरी बसाई जो अभेद्य थी । यहां यादवों ने 36 वर्षों तक सुख और ऐश्वर्य का जीवन जीया।

विनाश के दो प्रमुख कारण: श्राप और अहंकार

द्वारका के डूबने के पीछे दो बड़ी घटनाएं मानी जाती हैं:

गांधारी का श्राप: महाभारत युद्ध के बाद जब गांधारी ने अपने सौ पुत्रों का शव देखा, तो उन्होंने इसका जिम्मेदार श्रीकृष्ण को माना। उन्होंने श्राप दिया कि जैसे मेरे कुल का नाश हुआ, वैसे ही तुम्हारी आंखों के सामने तुम्हारा वंश भी समाप्त हो जाएगा और तुम्हारी नगरी समुद्र में डूब जाएगी।

ऋषियों का अपमान: एक बार कृष्ण पुत्र सांब ने स्त्री वेश धरकर ऋषियों का मजाक उड़ाया। क्रोधित होकर ऋषियों ने श्राप दिया कि सांब के गर्भ से एक ऐसा मुसल पैदा होगा, जो पूरे यदुवंश के विनाश का कारण बनेगा।

जब आपस में ही लड़ मरे यदुवंशी

श्राप के प्रभाव से द्वारका में अपशकुन होने लगे। लोग मदिरापान और अधर्म में डूब गए। एक दिन प्रभास क्षेत्र में उत्सव के दौरान यदुवंशी आपस में ही भिड़ गए। जो मुसल ऋषियों के श्राप से उत्पन्न हुआ था, उसी के टुकड़ों से उगी घास (एरका) घातक शस्त्र बन गई। देखते ही देखते कृष्ण के सामने ही उनका पूरा वंश समाप्त हो गया।

श्रीकृष्ण का वैकुंठ गमन

वंश नाश के बाद बलराम जी ने योग समाधि के जरिए देह त्याग दी। श्रीकृष्ण एक पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे, तभी जरा नामक शिकारी ने उनके पैर के पद्म को हिरण की आंख समझकर तीर चला दिया। यह शिकारी पूर्व जन्म में बाली था, जिसे राम अवतार में कृष्ण ने मारा था। भगवान ने इसे अपनी लीला का अंत मानकर देह त्याग दी और वैकुंठ लौट गए।

अर्जुन की आंखों के सामने डूबी द्वारका

श्रीकृष्ण के जाने के बाद अर्जुन द्वारका पहुंचे। जैसे ही वे बचे हुए वृद्धों, महिलाओं और बच्चों को लेकर नगर से बाहर निकले, समंदर उफनने लगा। अर्जुन ने पीछे मुड़कर देखा तो विशाल लहरें धीरे-धीरे सोने के महलों को निगल रही थीं। देखते ही देखते वह भव्य नगरी पानी के नीचे समा गई।

क्या सच में अस्तित्व में है द्वारका?

आज की आधुनिक तकनीक ने पौराणिक कथाओं को सच साबित कर दिया है:

समुद्र के नीचे खोज: 1963 में पहली बार पुरातत्व विभाग ने द्वारका की खोज शुरू की। 1980 के दशक में डॉ. एस.आर. राव के नेतृत्व में समुद्र के नीचे खुदाई हुई, जहाँ प्राचीन दीवारों के अवशेष, तांबे के सिक्के और मूर्तियां मिलीं।

हैरान करने वाले तथ्य: खोज में पाए गए पत्थर और संरचनाएं लगभग 3000 से 5000 साल पुरानी बताई जाती हैं, जो महाभारत के कालखंड से मेल खाती हैं।

अध्यात्म और विज्ञान: आज भी गुजरात के तट पर बेट द्वारका के पास गोताखोर समुद्र के नीचे प्राचीन दीवारों के अवशेष देख सकते हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि कृष्ण की नगरी कोई कल्पना नहीं, बल्कि एक हकीकत थी।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।