
Evening Surya Puja : पौराणिक मान्यता: शाम के समय सूर्य देव को अर्घ्य देने के लाभ और पूजा की सही प्रक्रिया (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
Surya Dev Evening Puja Benefits: सनातन परंपरा में सूर्य देव को सिर्फ एक ग्रह नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष देवता माना गया है यानी वो भगवान जिन्हें हम साक्षात अपनी आंखों से देख सकते हैं। आमतौर पर हम सभी सुबह के समय उगते हुए सूर्य को जल देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शाम के समय ढलते हुए सूरज की (Evening Surya Puja) आराधना भी उतनी ही फलदायी हो सकती है? पंडित प्रमोद शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संध्या काल में सूर्य देव की आराधना को शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इससे मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
सनातन परंपरा में सूर्य देव को प्रमुख देवताओं में से एक माना गया है। सूर्य देव की कृपा जिस व्यक्ति पर हो जाए, उसका समाज में मान-सम्मान रातों-रात बढ़ जाता है। ऐसे व्यक्ति के भीतर गजब की नेतृत्व क्षमता (लीडरशिप क्वालिटी) आ जाती है और उसका व्यक्तित्व बेहद आकर्षक हो जाता है। रविवार का दिन भगवान भास्कर को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य उपासना को सकारात्मकता और आत्मबल बढ़ाने वाला माना जाता है।
संध्यावंदन या प्रदोष काल में सूर्य देव की पूजा करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
पवित्रता का ध्यान: सूर्यास्त से ठीक पहले स्नान करें या हाथ-पैर अच्छे से धोकर स्वच्छ सफेद या लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
दिशा का चुनाव: शाम के समय पूजा करते समय अपना मुख पश्चिम दिशा की ओर रखें। यदि संभव न हो, तो उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) की तरफ भी मुख किया जा सकता है।
अर्घ्य की सामग्री: तांबे के एक लोटे में शुद्ध जल भरें। उसमें कुमकुम (रोली), अक्षत (चावल), लाल फूल और थोड़ा सा गुड़ मिला लें।
मंत्रोच्चार के साथ अर्घ्य: सूर्य मंत्र (ॐ सूर्याय नमः या ॐ घृणि सूर्याय नमः) का जाप करते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें। इस दौरान मन ही मन अपनी मनोकामना को दोहराएं।
आरती और दीप: जल देने के बाद धूप और घी का दीपक जलाकर सूर्य देव की आरती अवश्य करें।
महत्वपूर्ण सावधानी: शाम को अर्घ्य देते समय ध्यान रखें कि गिरता हुआ जल आपके पैरों पर न पड़े। यदि आप घर के बाहर जल दे रहे हैं, तो वह पानी किसी साफ जगह या पौधे की जड़ में जाना चाहिए, किसी नाली या गंदे स्थान पर नहीं।
सूर्य देव की महिमा को दर्शाती एक प्राचीन कथा के अनुसार, किसी नगर में एक गरीब लेकिन धर्मपरायण बुढ़िया रहती थी। वह हर रविवार को सुबह उठकर आंगन को गाय के गोबर से लीपकर स्वच्छ करती और सूर्य देव का व्रत व कथा करती थी। भगवान भास्कर की कृपा से उसका घर धन-धान्य से भर गया।
उसकी तरक्की देख पड़ोसी महिला जलने लगी। बुढ़िया के पास खुद की गाय नहीं थी, वह पड़ोसन की गाय का गोबर लाती थी। ईर्ष्या वश पड़ोसन ने अपनी गाय को अंदर बांध लिया। गोबर न मिलने के कारण बुढ़िया रविवार को आंगन नहीं लीप सकी और उसने भूखे-प्यासे रहकर व्रत किया।
रात्रि में सूर्य देव ने बुढ़िया को स्वप्न में दर्शन दिए और उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे एक चमत्कारी गाय भेंट की, जो सोने का गोबर देती थी। पड़ोसन ने जब यह देखा, तो वह चालाकी से बुढ़िया की अनुपस्थिति में सोने का गोबर चुरा लेती और अपनी गाय का साधारण गोबर वहां रख देती। जब सूर्य देव की कृपा से तेज आंधी चली, तो बुढ़िया ने गाय अंदर बांधी और उसे सच का पता चला।
हताश पड़ोसन ने तब राजा के कान भरे। राजा ने सैनिकों को भेजकर बुढ़िया की वह चमत्कारी गाय छीन ली और उसे अपने शयनकक्ष में बंधवा दिया। लेकिन अगली ही सुबह पूरा राजमहल गोबर और भयंकर बदबू से भर गया। सैनिक जितना साफ करते, गंदगी उतनी ही फैलती जाती। डरे हुए राजा ने तुरंत पड़ोसन को दंडित किया और बुढ़िया से क्षमा मांगकर ससम्मान उसकी गाय लौटाई। इसके बाद राजा ने पूरे राज्य में घोषणा करवाई कि हर स्त्री-पुरुष को सुख, समृद्धि और आत्मशुद्धि के लिए रविवार का व्रत और सूर्य उपासना करनी चाहिए।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
Updated on:
19 Jun 2026 02:26 pm
Published on:
19 Jun 2026 02:25 pm
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