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अगर इस तरह करते हैं मंत्रों के जाप तो संभल जाएं, ये है जाप के सही तरीकें

मंत्रो के जाप करते समय हमें कुछ नियमों का खास ध्यान रखना चाहिए।

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Ravi Gupta

Jan 12, 2018

Chanting

नई दिल्ली। देवी-देवताओं को खुश करने के लिए उनसे जुड़ी मंत्रों का जाप करना आवश्यक माना गया है। प्रत्येक भगवान से जुड़े कुछ मंत्र होते हैं और यदि किसी वजह से आपके जीवन में कोई परेशानी चल रही हो तो उपयुक्त मंत्र के जाप से आप इन कठिनाइयों से मुक्ति पा सकते हैं। लेकिन जिंदगी में हर किसी चीज़ के कुछ अपने नियम कानून होते हैं।

ठीक वैसे ही मंत्रो के जाप करते समय हमें कुछ नियमों का खास ध्यान रखना चाहिए। इससे आपको लाभ निश्चित तौर पर मिलेगा। मंत्र चाहे कोई भी हो लेकिन उसे सिद्ध करने के कई सारे उपायों का वर्णन हमारे शास्त्रों में किया गया है। सबसे पहले हमें ये जान लेना चाहिए कि मंत्र तीन प्रकार के होते हैं वैदिक,तान्त्रिक और शाबर। सबसे पहले तो ये निश्चित कर लेना चाहिए कि इनमें से किस प्रकार के मंत्र का जाप आपको करना है।

शाबर मंत्र के सिद्ध होने में बहुत कम समय लगता है और इससे थोड़ा ज्य़ादा समय तांत्रिक मंत्र में लगता है। सबसे ज्य़ादा समय इसमें वैदिक मंत्र लेता है। लेकिन शाबर और तान्त्रिक मंत्र की अपेक्षा वैदिक मंत्र सिद्ध होने के बाद हमें ज्य़ादा लंबे समय तक लाभ पहुंचाता है। इसका असर ज्य़ादा लंबे समय तक बना रहता है। इसके अलावा भी मंत्र जाप करने के तीन तरीकें होते हैं एक तो वाचिक जाप, मानस जाप और उपांशु जाप। जब हम मंत्रों का जाप तेज आवाज़ में और स्पष्ट रूप में करें तो उसे वाचिक जाप कहते हंै और जब मंत्रों का जाप मन ही मन में शान्त रूप में किया जाएं तो उसे मानस जाप कहते हंै एवं जब जीभ और होंठ हिलते हुए दिखाई देते हैं लेकिन कोई आवाज़ नहीं आती तो इस प्रकार के जाप को उपांशु जाप कहते हैं।

मंत्रो का जाप तभी हमें पूरी तरह से लाभ पहुंचा सकते है जब कि हम कुछ चीज़ों का पालन ध्यान से करें जैसे कि मंत्रों के जाप के समय ये हमेशा ध्यान में रखें कि जिस भी मंत्र का जाप आप कर रहें हैं वो सटीक हो और जिस भी मंत्र का जाप करें उसे हमेशा गुप्त ही रखें और किसी और को इस बारे में कुछ न बताएं।