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गंगा सप्तमी 2026: 23 अप्रैल को गुरु पुष्य योग में करें गंगा स्नान, जानें पूजा विधि और तिथि

Ganga Saptami date 2026 : गंगा सप्तमी 2026 23 अप्रैल को गुरु पुष्य योग में मनाई जाएगी। जानें तिथि, स्नान का महत्व, पूजा विधि, शुभ योग और इस दिन गंगा स्नान व दान से मिलने वाले पुण्य के बारे में।

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भारत

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Manoj Vashisth

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Nitika Sharma

Apr 22, 2026

Ganga Saptami 2026

Ganga Saptami 2026 : गुरु पुष्य योग में गंगा स्नान का महत्व (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Ganga Saptami 2026: वैशाख शुक्ल सप्तमी 23 अप्रैल को गुरु पुष्य योग में गंगा सप्तमी मनाई जाएगी। इस दिन गंगा के स्मरण, दर्शन एवं स्नान करने मात्र से रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति, यश-सम्मान में वृद्धि व सभी पापों का क्षय, अशुभ ग्रहों के कुप्रभाव में कमी व सकारात्मकता का वास होता है। इस दिन दान-पुण्य व धर्म कृत्य करने से जन्म-जन्मांतर तक इसका पुण्य मिलता है। पद्म पुराण के अनुसार गंगा सप्तमी के दिन गंगा की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गंगा सप्तमी 23 अप्रैल को मनाई जाएगी | Ganga Saptami date 2026

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी की उदयातिथि 23 अप्रैल को प्राप्त हो रही है। इसलिए गंगा सप्तमी 23 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस पर्व पर गंगा स्नान, व्रत-पूजा और दान का विशेष महत्व है। जो लोग किसी कारण से इस दिन गंगा नदी में स्नान नहीं कर सकते वो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहा सकते हैं।

गुरु पुष्य योग में गंगा स्नान | Guru Pushya Yoga April 2026

ऐसा करने से तीर्थ स्नान का ही पुण्य मिलता है। वहीं, इस दिन पानी से भरी मटकी का दान करने से कभी न खत्म होने वाला पुण्य मिलता है। 23 अप्रैल को गुरु पुष्य योग का संयोग बन रहा है। गुरु पुष्य योग में गंगा स्नान कर मां गंगा और देवों के देव महादेव की पूजा करने से साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होगी।

गंगा सप्तमी का हिंदुओं में बहुत महत्व है। गंगा को सबसे पवित्र नदियों में से एक माना जाता है। देवी गंगा को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे शुभ्रा, गंगे भागीरथी और विष्णुपदी। विष्णुपदी नाम इसीलिए पड़ा क्योंकि वह पहली बार भगवान विष्णु के चरणों से निकली थीं।

ऐसा माना जाता है कि गंगा के पानी में किसी भी बीमारी से व्यक्ति को ठीक करने की शक्ति होती है। जो भक्त गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगाते हैं, उन्हें पिछले पापों से मुक्ति मिलती है। गंगा जल नकारात्मकता से बचाता है और यह शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है। भक्त शिवलिंग अभिषेक के लिए गंगा जल का उपयोग करते हैं। गंगा जल का उपयोग मृत लोगों की अस्थियों को विसर्जित करने में भी किया जाता है ताकि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सके।

गंगा सप्तमी तिथि

विवरण (Details)समय (Date & Time)
सप्तमी तिथि प्रारंभ22 अप्रैल, रात 10:48 बजे से
सप्तमी तिथि समाप्त23 अप्रैल, रात 8:49 बजे तक
गंगा सप्तमी (उदयातिथि)23 अप्रैल 2026

गंगा सप्तमी शुभ योग

इस बार गंगा सप्तमी पर गुरु पुष्य योग का एक बहुत ही दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन गंगा जयंती होने के साथ-साथ गुरुवार को पुष्य नक्षत्र का होना इसे ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण बनाता है। जो इस दिन के महत्व को और बढ़ा देते हैं। धार्मिक दृष्टि से ऐसे योगों में किए गए जप, तप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।

पूजा विधि

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी में स्नान करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं कर सकते तो घर पर नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। स्नान करते समय मां गंगा का ध्यान करें। नहाने के बाद घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें। देवी-देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान पर पुष्प अर्पित करें। घर पर ही मां गंगा की आरती करें। वह भोग लगाएं।

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