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Gopinath Ji Jaipur Mystery: औरंगजेब के दौर में बचाई गई मूर्ति, जयपुर में आज भी साक्षात दर्शन देते हैं कृष्ण, नब्ज से चलती है घड़ी

Gopinath Ji Jaipur Mystery: आपने भगवान के कई चमत्कार सुने होंगे, लेकिन जयपुर में एक ऐसा अद्भुत मंदिर है जहां भगवान की नब्ज से घड़ी चलने की मान्यता है। खास बात यह है कि यह घड़ी बिना बैटरी के चलती बताई जाती है, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था और रहस्य का केंद्र बनी हुई है।

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भारत

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MEGHA ROY

Apr 04, 2026

Lord Krishna Idol wearing watch, Gopinath Ji Temple in Jaipur,

जयपुर का अनोखा मंदिर, जहां भगवान की नब्ज से चलती है घड़ी| Freepik

Gopinath Ji Jaipur Mystery: जयपुर की पुरानी बस्ती में स्थित गोपीनाथ जी मंदिर अपने अनोखे चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान श्रीकृष्ण का ऐसा विग्रह स्थापित है, जो हाथ में घड़ी धारण किए हुए है। मान्यता है कि इस विग्रह को श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने अपनी दादी के कहने पर बनवाया था। वृंदावन से जयपुर लाए गए इस विग्रह की आज गोपीनाथ रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है।

Gopinath Ji Temple: जयपुर के गोपीनाथ जी मंदिर की अद्भुत कथा

राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित गोपीनाथ जी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और चमत्कारों का जीवंत संगम है। यहां विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का विग्रह भक्तों के लिए आज भी साक्षात दर्शन देने वाला माना जाता है। मंदिर की परंपराएं और उससे जुड़ी कथाएं इसे बेहद खास बनाती हैं।

एक ही शिला से बने तीन दिव्य विग्रह

मंदिर के महंत सिद्धार्थ गोस्वामी के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के तीन प्रमुख विग्रह मदन मोहन जी मंदिर, गोपीनाथ जी मंदिर और गोविंद देव जी मंदिर एक ही पवित्र शिला से बनाए गए थे। मान्यता है कि यह वही शिला थी जिस पर कंस ने नवजात शिशुओं का वध किया था। बाद में श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने इसे तीन भागों में विभाजित कर इन विग्रहों की स्थापना की। तीनों विग्रहों में श्रीकृष्ण के अलग-अलग अंगों की झलक देखने को मिलती है।

औरंगजेब के काल में सुरक्षित की गई प्रतिमा

इतिहास के कठिन दौर में भी इस विग्रह की रक्षा की गई। कहा जाता है कि मुगल बादशाह औरंगजेब के समय मंदिरों पर संकट मंडरा रहा था। उस समय इस विग्रह को वृंदावन से सुरक्षित स्थानों राधा कुंड और काम्यावन के रास्ते छिपाते हुए अंततः जयपुर लाया गया। कई वर्षों तक अलग-अलग स्थानों पर विराजने के बाद इसे पुरानी बस्ती में स्थापित किया गया, जहां आज भी भक्त दर्शन करते हैं।

Gopinath Temple History: धड़कन से चलने वाली घड़ी का रहस्य

मंदिर की सबसे रोचक कथा उस घड़ी की है जो भगवान की “नब्ज” से चलती थी। बताया जाता है कि अंग्रेजी शासन के दौरान एक अधिकारी ने भगवान की जीवंतता को परखने की चुनौती दी। जब विग्रह को पल्स से चलने वाली घड़ी पहनाई गई, तो वह चलने लगी। यह घटना भक्तों की आस्था को और मजबूत कर गई। आज भी उस घड़ी की प्रतिकृति भगवान को अर्पित की जाती है।

दैनिक झांकियां और अटूट श्रद्धा

गोपीनाथ जी मंदिर में प्रतिदिन नौ बार झांकियां होती हैं, जिनकी शुरुआत प्रातः मंगला आरती से होती है। दिनभर अलग-अलग रूपों में ठाकुर जी के दर्शन होते हैं, शृंगार, राजभोग, संध्या और शयन तक। यहां आने वाले भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा अवश्य पूरी होती है।इस मंदिर की खासियत केवल इसकी प्राचीनता नहीं, बल्कि वह जीवंत आस्था है जो पीढ़ियों से लोगों के जीवन को छूती आ रही है।

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