15 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Hanuman Chalisa: जीवन की हर मुश्किल का समाधान छिपा है हनुमान चालीसा पाठ में, जानिए नियमित पढ़ने से होने वाले फायदे

Hanuman Chalisa Ke Fayde: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान के नाम जपने मात्र से जीवन के हर दुख और भय का नाश हो जाता है। वहीं हनुमान चालीसा के नियमित पाठ को भी बहुत फलदायी माना गया है।

3 min read
Google source verification
hanuman chalisa ke fayde, hanuman chalisa in hindi lyrics, hanuman chalisa padhne se kya hota hai, benefits of hanuman chalisa, hanuman chalisa hindi mein, हनुमान चालीसा, हनुमान चालीसा के फायदे,

Hanuman Chalisa: जीवन की हर मुश्किल का समाधान छिपा है हनुमान चालीसा पाठ में, जानिए नियमित पढ़ने से होने वाले फायदे

इस संसार में हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से परेशान है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जातक की कुंडली के दोषों के कारण भी व्यक्ति कई शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याओं से घिर जाता है। मान्यता है कि जीवन की हर समस्या का हल हनुमान चालीसा के पाठ में है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करता है उसे जीवन में किसी दुख और भय का सामना नहीं करना पड़ता। शास्त्रों में हनुमान जी को संकटमोचन कहा गया है और माना जाता है कि आज कलयुग में भी जागृत देव हैं। ऐसे में हनुमान जी की कृपा पाने के लिए हनुमान चालीसा की हर पंक्ति का पाठ लाभकारी है। ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक शनि की साढ़े साती और ढैय्या से मुक्ति पाने के लिए हनुमान चालीसा के फायदे माने गए हैं। इसलिए हर व्यक्ति को प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

हनुमान चालीसा के फायदे
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हनुमान चालीसा के नियमित पाठ से व्यक्ति को आत्मिक शांति मिलने के साथ ही उसके आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। आपके आसपास की नकरात्मक शक्तियों का नाश होता है। साथ ही हनुमान चालीसा के पाठ से जीवन में भय, रोगों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। जीवन में आर्थिक समस्याओं से घिरे व्यक्ति को भी नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करने से लाभ हो सकता है।

दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन वरन विराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै।
शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग वन्दन।।

विद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। असकहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा। नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना।।
जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना।।

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों युग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। असवर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को भावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

यह भी पढ़ें: राशिफल 6 सितंबर 2022: आज मंगलवार के दिन इन राशि वालों पर होगी मां लक्ष्मी की कृपा, जानिए मेष से मीन तक का राशिफल