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Jagannath Rath Yatra 2026: प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा 16 जुलाई से, आस्था के महाकुंभ के लिए सज रही पुरी

Rath Yatra 2026 Date: भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा की तारीखों का ऐलान हो गया है, जिसने करोड़ों भक्तों के इंतजार को उत्सुकता में बदल दिया है। इस बार 16 जुलाई से शुरू हो रहे आस्था के इस महाकुंभ में कुछ ऐसा अनोखा होने जा रहा है।

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भारत

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Manoj Vashisth

Jun 04, 2026

Lord Jagannath Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra 2026 : जानें पुरी रथ यात्रा का पूरा शेड्यूल, बहुदा यात्रा, सुनाबेशा 2026 और गुंडिचा मंदिर से जुड़ी खास बातें। (फोटो सोर्स: https://www.rathyatra.org)

Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी में आयोजित होने वाली भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा 2026 इस साल 16 जुलाई से शुरू होगी। 12 दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक उत्सव में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा भव्य रथों में नगर भ्रमण करेंगे। यात्रा के दौरान हेरा पंचमी, बहुदा यात्रा और सुनाबेशा जैसी प्रमुख रस्में निभाई जाएंगी। हर साल लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचकर रथ खींचने की परंपरा में शामिल होते हैं।

12 दिनों तक चलेगा उत्सव: जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का पूरा कार्यक्रम

यह पावन उत्सव केवल एक दिन का नहीं, बल्कि लगभग दो हफ्तों का एक दिव्य सफर है। 16 जुलाई को जब विशाल रथ सड़कों पर उतरेंगे, तो पूरी नगरी 'जय जगन्नाथ' के उद्घोष से गूंज उठेगी। इसके बाद भगवान अपनी मौसी के घर यानी 'गुंडिचा मंदिर' में विश्राम करेंगे। इस दौरान होने वाली प्रमुख रस्में इस प्रकार हैं:

20 जुलाई ('हेरा पंचमी'): इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान जगन्नाथ को खोजने गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं।

23-24 जुलाई ('बहुदा यात्रा'): नौ दिनों के प्रवास के बाद भगवान के रथों की मुख्य मंदिर की ओर वापसी होगी।

25 जुलाई ('सुनाबेशा'): वापसी के बाद भगवान को सोने के अद्भुत आभूषणों से सजाया जाता है, जिसे देखना अपने आप में परम सौभाग्य है।

27 जुलाई ('नीलाद्रि बीज'): इस दिन भगवान वापस अपने रत्न सिंहासन पर विराजमान हो जाएंगे।

रथों की वो अनोखी बातें जो कम ही लोग जानते हैं

जगन्नाथ रथ यात्रा का हर पहलू वैज्ञानिक और आध्यात्मिक चमत्कारों से भरा हुआ है। अखबार की विशेष पड़ताल में सामने आई कुछ बेहद दिलचस्प जानकारियां:

बिना कील के बनते हैं रथ: हर साल अक्षय तृतीया से इन तीन विशाल रथों का निर्माण शुरू होता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन्हें बनाने में किसी भी तरह के लोहे या कील का इस्तेमाल नहीं किया जाता। नीम की पवित्र लकड़ियों से केवल पारंपरिक कारीगर (जिन्हें भोई सेवक कहा जाता है) ही इसे तैयार करते हैं।

तीनों रथों के अलग नाम और पहचान

नंदीघोष-भगवान जगन्नाथ का रथ: भगवान जगन्नाथ का रथ, जिसमें 16 पहिए होते हैं और इसका रंग पीला-लाल होता है।

तलध्वज - बलभद्र का रथ: बड़े भाई बलभद्र का रथ, जिसमें 14 पहिए होते हैं और यह हरे-लाल रंग का होता है।

दर्पदलन - सुभद्रा का रथ: बहन सुभद्रा का रथ, जिसमें 12 पहिए होते हैं और यह काले-लाल रंग का होता है।

राजा लगाते हैं झाड़ू

रथ यात्रा शुरू होने से पहले पुरी के गजपति राजा सोने की झाड़ू से रथ के रास्तों को साफ करते हैं, जिसे 'छेरा पंहरा' रस्म कहा जाता है। यह संदेश देता है कि भगवान के सामने राजा हो या रंक, सब समान हैं।

इस बार सुरक्षा और सुविधाओं के खास इंतजाम

प्रशासन के मुताबिक, 2026 की इस रथ यात्रा में रिकॉर्ड भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। इसके लिए पुरी में विशेष सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं, ड्रोन से निगरानी रखी जाएगी और श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी व चिकित्सा की चाक-चौबंद व्यवस्था की जा रही है।