
कार्तिक माह की पूर्णिमा का सबसे ज्यादा महत्व
सनातन धर्म में कार्तिक माह की पूर्णिमा का सबसे ज्यादा महत्व है। इस दिन पावन जल में स्नान, पूजा-पाठ और दीपदान का पुण्य फल प्राप्त होता है। कार्तिक पूर्णिमा पर देव दिवाली भी मनाई जाती है।
इस बार कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि दो दिन रहेगी। पूर्णिमा 26 नवंबर को मध्यान्ह 3 बजकर 58 मिनट से प्रारंभ होगी। 27 नवंबर को मध्यान्ह 2 बजकर 40 मिनट पर यह समाप्त होगी।
पंडित और विद्वान बताते हैं कि उदया तिथि के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा का व्रत 27 नवंबर को यानि सोमवार के दिन रखा जाना चाहिए। सोमवार को ही सुबह पूर्णिमा का पावन स्नान और पूजन—दान किया जाना चाहिए। चूंकि पूर्णिमा तिथि की रात 26 नवंबर को होगी, इसलिए चंद्र और लक्ष्मी पूजन 26 नवंबर को किया जाना भी बहुत फलदायक साबित होगा। 26 नवंबर की रात को ही दीपदान किया जा सकता है। सत्यनारायण भगवान की कथा दोनों दिन शाम को की जा सकती है।
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, दान, पूजा का शुभ मुहूर्त
कार्तिक पूर्णिमा पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं।
पवित्र स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 5.32 बजे से सुबह 6.53 बजे
दीपदान के लिए शुभ मुहूर्त शाम 5.24 बजे से शाम 6. 45 बजे
कार्तिक पूर्णिमा पर जरूर करें ये काम, मिलेगा पुण्य फल
पूर्णिमा पर ब्रह्ममुहूर्त में उठकर पवित्र नदी में स्नान करें, यह संभव नहीं हो तो घर में ही पानी में गंगाजल या नर्मदा जल मिलाकर नहाएं। हर हाल में सूर्योदय से पहले स्नान कर लें।
स्नान करने के बाद तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
इसके बाद आस्थापूर्वक नित्यपूजा करें। भगवान शिव, गणेश, विष्णुजी, माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें। ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। बाद में जरूरतमंदों को दान करें। शाम को तुलसी के समक्ष घी का दीपक लगाएं और दीपदान करें।
कार्तिक पूर्णिमा पर वर्जित काम
कोई भी जरूरतमंद, गरीब आदि मदद मांगने आए तो उसे खाली हाथ न लौटाएं।
किसी का भी अपमान न करें, कटु वचन न बोलें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें।
इस दिन मांसाहार, मदिरा का सेवन न करें।
प्याज—लहसुन न खाएं।
Updated on:
26 Nov 2023 11:50 am
Published on:
26 Nov 2023 11:44 am
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