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गंगाजल ना हो तो करें इसका उपयोग, नाश होंगे रोग…

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि भागीरथ ने ही गंगा को अपने ताप से धरती पर अवतरित किया था।

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नई दिल्ली। जैसा की हम सब जानते हैं हमारे भारत गंगा जल को पवित्र माना जाता है, गंगा को देवी के रूप में देखा जाता है और इन्हें बहुत ही पूजनीय माना जाता है। केवल भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में गंगा की पवित्रता का बोल बाला है। जहां इसके जल को अमृत माना जाता है वहीँ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि भागीरथ ने ही गंगा को अपने ताप से धरती पर अवतरित किया था। ऐसा माना जाता है कि भागीरथ गंगा को जिस रास्ते से लेकर आए थे उसी मार्ग पर कई दिव्य औषधियां और वनस्पतियां पाई जाती हैं। यही कारण है गंगा माता को पवित्र माना जाता है। कई वेदों में मां गंगा की व्याख्या की गई है। गंगोत्री, ऋषिकेष, हरिद्वार, बनारस आदि स्थान धार्मिक दृष्टि से गंगा की पवित्रता के कारण ही मशहूर हैं।

कई लोग जो गंगा जल अपने घर नहीं ला सकते हैं तो उन लोगों को हम आज बताने जा रहे हैं कि घर पर कैसे गंगा जल बनाया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले तांबे का बर्तन लें फिर उसे अच्छे से साफ कर लें। इसके बाद उस लोटे में पानी भरें। लेकिन इसमें अगर कुंए से पानी लिया जा सके तो वह सबसे सही माना जाता है। अब उस लोटे में पानी भरकर रख दें और कुछ तुलसी के पत्ते ड़ाल कर लोटे को ढ़क कर रख दें। जैसा की आप जानते हैं तुलसी को गुणकारी और लाभदायक औषधि माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक तुलसी माता को देवी का दर्जा मिला है लोग उन्हें पूजते हैं। माना जाता है कि तांबे में पानी रखने से उसके सभी किटाणु मर जाते हैं। इसी के साथ तुलसी के पत्ते रोगों का नाश करते हैं। यह जल कुछ दिनों में पवित्र हो जाता है और गंगा जल के गुणों की पूर्ति करता।