
नई दिल्ली। आज देश भर में रामनवमी के पर्व को धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन लोग भगवान राम की कृपा अपनी ओर बनाएं रखने के लिए कई सारे उपायों का पालन करते हैं। हिंदू धर्म में भगवान राम का वर्णन एक आदर्श पुरूष के रूप में हैं। एक ऐसा पुरूष जो अपने कर्तव्यों का पालन बहुत ही बखूबी से करते थे।
भगवान राम और उनसे जुड़ी बातों का वर्णन कई धार्मिक किताबों में मिलता है। आज चैत्र मास की नवमी के दिन भारत में और भारत के बाहर राम के अनुयायी भगवान श्रीराम के जन्म दिवस को मनाते हैं और उनकी आराधना करते हैं। रामनवमी के इस पावन पर्व पर हम आपको भगवान श्रीराम से जुड़ी एक अहम बात का जिक्र करेंगे जिसके बारे में शायद ही आपने कभी सुना है।
भगवान राम के माता-पिता, उनके भाई, उनकी वनवास से जुड़े किस्से हम बचपन से ही सुनते और टीवी के पर्दे पर देखते आ रहे हैं। उनसे जुड़ी एक और खास बात है जो आज तक हम में से किसी ने नहीं सुना है और वो बात ये हैं कि प्रभु श्रीराम की एक बहन भी थी जिसका नाम शान्ता था। प्रभु श्रीराम के तीन भाइयों लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न में शान्ता सबसे बड़ी थी।
दक्षिण में लिखी गई रामायण में ऐसा वर्णन किया गया है कि शान्ता, राजा दशरथ और कौशल्या की बेटी थी। शान्ता के जन्म के थोड़े दिनों के बाद ही अंगदेश के राजा रोमपद ने उसे गोद ले लिया था। राजा रोमपद और उनकी पत्नी वर्शिनी जो कि रानी कौशल्या की बहन थी, दोनों ने शान्ता का पालन-पोषण किया। बड़ी होने के बाद शान्ता का विवाह ऋष्याश्रिंगा से हुआ। ऐसी मान्यता है कि ऋष्याश्रिंगा का वंश ही आगे चलकर सेंगर का राजपूत बना। ऋषि बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में शान्ता का कोई जिक्र नहीं है लेकिन भारत के दक्षिण प्रान्त में लिखी गई रामायण में शान्ता का पूर्ण विवरण है।

Published on:
25 Mar 2018 12:04 pm
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