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Rahu Ketu Famous Temple: भारत का इकलौता मंदिर जहां शांत होते हैं राहु-केतु दोष! एक बार जाएं, किस्मत बदलते देर नहीं लगेगी

Rahu Ketu Mandir: अगर कुंडली में राहु-केतु दोष और कालसर्प दोष से परेशान हैं, तो जानिए भारत के प्रसिद्ध मंदिर के बारे में जहां विशेष पूजा से इन ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने की मान्यता है।

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भारत

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MEGHA ROY

Apr 22, 2026

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राहु-केतु दोष से मुक्ति का पावन धाम| Chatgpt

Rahu Ketu Famous Temple: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कुंडली में राहु और केतु का अशुभ प्रभाव बढ़ता है, तो जीवन में एक के बाद एक परेशानियां आने लगती हैं, चाहे वह मानसिक तनाव हो, आर्थिक नुकसान या पारिवारिक कलह। कई बार यही ग्रह दोष कालसर्प दोष का रूप लेकर व्यक्ति के लिए संघर्ष और बढ़ा देता है। ऐसे में लोग उपाय और शांति के लिए खास जगहों की तलाश करते हैं। दक्षिण भारत में स्थित Shri Kalahasti Temple को राहु-केतु दोष निवारण के लिए बेहद प्रभावशाली माना जाता है। यहां विशेष पूजा-अर्चना से भक्तों को राहत मिलने की मान्यता है और इसी कारण इसे राहु-केतु मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

Srikalahasti Temple Rahu Ketu: क्यों खास है यह मंदिर

दक्षिण भारत के इस प्राचीन मंदिर को राहु-केतु शांति के लिए सबसे प्रमुख स्थानों में गिना जाता है। यहां विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनके बारे में मान्यता है कि वे ग्रह दोषों को शांत करने में सहायक होते हैं। यह मंदिर पंचतत्व लिंगों में वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो इसे आध्यात्मिक दृष्टि से और भी अद्वितीय बनाता है। यहां की एक विशेष परंपरा यह भी है कि पुजारी स्वयं शिवलिंग को स्पर्श नहीं करते, बल्कि स्वर्ण पट्ट पर ही अर्पण किया जाता है इसलिए एक ऐसी परंपरा जो श्रद्धा और नियमों की गहराई को दर्शाती है।

पौराणिक मान्यताएं और इतिहास

माना जाता है कि महाभारत काल में अर्जुन ने इसी स्थान पर भगवान शिव के दर्शन किए थे। यह कथा मंदिर की पवित्रता को और गहरा करती है। यहां स्थापित शिवलिंग लगभग चार फीट ऊंचा है और सदियों से भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। समय के साथ मंदिर ने अपनी परंपराओं और मान्यताओं को संजोकर रखा है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

भव्य स्थापत्य और वातावरण

मंदिर का निर्माण दक्षिण भारतीय शैली में हुआ है, जिसमें ऊंचे गोपुरम और सौ स्तंभों वाला मंडप विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। हर स्तंभ और हर नक्काशी एक कहानी कहती है। स्वर्णमुखी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक शांति से घिरा हुआ है, जहां पहुंचते ही मन को सुकून का अनुभव होता है।

कैसे पहुंचे

यह पवित्र स्थल आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के पास स्थित है और सड़क व रेल मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि एक नई उम्मीद और सकारात्मक ऊर्जा लेकर लौटते हैं,जैसे जीवन फिर से सही दिशा में बढ़ने लगा हो।