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क्या आप भी हैं मांगलिग या मंगली! मंगल दोष दूर करने का आ गया सबसे अच्छा मौका…

नवग्रहों में मंगल को सेनापति का दर्जा दिया गया है। कुंडली में मंगल अशुभ होने से कई दिक्कतें आती हैं। शादी में विलंब होता है, दांपत्य जीवन में बार-बार विवाद होते हैं, तलाक की नौबत आ जाती है और कर्ज भी बढ़ता है। ऐसे लोगों की गुस्सा भी बहुत ज्यादा आता है। इन सब समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए मंगलदेव की प्रसन्नता जरूरी है। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है मंगलदेव की पूजा पाठ करना, हनुमान चालीसा का पाठ करना और मंगल के मंत्रों का जाप करना।

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कुंडली में मंगल अशुभ होने से कई दिक्कतें आती हैं

नवग्रहों में मंगल को सेनापति का दर्जा दिया गया है। कुंडली में मंगल अशुभ होने से कई दिक्कतें आती हैं। शादी में विलंब होता है, दांपत्य जीवन में बार-बार विवाद होते हैं, तलाक की नौबत आ जाती है और कर्ज भी बढ़ता है। ऐसे लोगों की गुस्सा भी बहुत ज्यादा आता है। इन सब समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए मंगलदेव की प्रसन्नता जरूरी है। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है मंगलदेव की पूजा पाठ करना, हनुमान चालीसा का पाठ करना और मंगल के मंत्रों का जाप करना।

ज्योतिषाचार्य पंडित अरूण बुचके के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल स्थित है तो ऐसे लोग मांगलिक या मंगली कहे जाते हैं। मांगलिक जातकों के जीवन में कई दिक्कतें आती है। इनकी शादी सामान्यतः देर से होती है और शादी के बाद दांपत्य जीवन में भी कई बार विवाद की स्थिति बनती है। ऐसे लोग कर्ज नहीं चुका नहीं पाते।

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मंगलवार का दिन मंगल ग्रह को समर्पित किया गया है। कुंडली में मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण आ रहीं दिक्कतें दूर करने के लिए मंगलवार के दिन मंगल ग्रह के बीज मंत्रों का जाप करना चाहिए। मंगल देव के बीज मंत्र- ओम क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः के 10 हजार जाप 40 दिनों में पूरे करने का विधान है।

ज्योतिषाचार्य पंडित धीरेंद्र दीक्षित के अनुसार शुक्ल पक्ष के किसी भी मंगलवार से मंगलदेव के जाप शुरू कर सकते हैं। बीज मंत्रों का पूर्ण मनोयोग और निष्ठापूर्वक जाप करने से धीरे-धीरे मंगलदेव की प्रसन्नता से मांगलिक दोष से आनेवाली समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।

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मंगलदोष से मुक्ति पाने या इसका असर कम करने का एक सबसे अच्छा मौका आ रहा है। 23 जनवरी को त्रयोदशी तिथि है जिस दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत आ रहा जिससे इसका महत्व और ज्यादा हो गया है। इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और मंगलदेव तथा हनुमानजी की पूजा निष्ठापूर्वक करें। मंगलदेव से अपनी समस्याएं समाप्त करने की प्रार्थना करें।

मंगलवार को त्रयोदशी तिथि पड़ने पर इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। भौम प्रदोष व्रत के दिन शिवजी के साथ मंगलदेव की पूजा अर्चना भी की जाती है। यह स्वर्णिम मौका 23 जनवरी को आ रहा है जब भौम प्रदोष पड़ रहा है।

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त्रयोदशी तिथि पर भौम प्रदोष व्रत रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिवजी की प्रसन्नता से जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। विशेष बात यह है कि इस दिन शिव पूजा से मंगल का दोष भी दूर होता है। मांगलिक दोष दूर करने के लिए भौम प्रदोष पर व्रत रखकर शिवजी के साथ मंगलदेव और हनुमानजी की पूजा भी करनी चाहिए।

इस दिन हनुमानजी के मंदिर में दीपक जलाएं और चोला भी चढ़ा सकते हैं। हनुमानचालीसा का सात बार पाठ करें। इन उपायों से बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। व्रत के प्रभाव से मंगल का अशुभ असर धीरे.धीरे कम होता है और शुभता बढ़ती है।

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मंगल दोष या मांगलिक दोष से ग्रसित लोगों की शादी कई बार बहुत बुरी स्थितियों में टूट जाती है। ऐसे लोगों की शादी होने के बाद दांपत्य जीवन में विवाद भी बहुत होते हैं और इसी कारण अक्सर तलाक भी हो जाता है। यह दोष दूरने के लिए सबसे अच्छा मौका है- भौम प्रदोष पर व्रत रखकर शिव, मंगलदेव और हनुमानजी की पूजा पाठ करें। इस पूजा से शादी में आती दिक्कतें दूर होने लगती हैं और दांपत्य जीवन में प्रेम भी बढ़ने लगता है।

भौम प्रदोष व्रत 23 जनवरी 2024 शुभ मुहूर्त
पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 22 जनवरी को शाम 07.51 बजे से शुरू होगी और 23 जनवरी को रात 08.39 मिनट पर इसका समापन होगा। इस तरह उदया तिथि के अनुसार 23 जनवरी को प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
मंगलवार का दिन होने से यह भौम प्रदोष होगा जोकि मंगल दोष दूर करने के लिए श्रेष्ठ दिन है।

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