23 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Sankat Mochan Hanuman : संकट मोचन हनुमान मंदिर : यहां तुलसीदास जी को हुए थे हनुमान जी के साक्षात दर्शन

Sankat Mochan Hanuman Temple Varanasi : संकट मोचन हनुमान मंदिर वाराणसी की पूरी जानकारी: दर्शन का सही समय, आरती टाइमिंग, इतिहास, त्यौहार और यात्रा के जरूरी टिप्स। जानें कब जाएं और कैसे पहुंचे।

3 min read
Google source verification

भारत

image

Manoj Vashisth

Apr 23, 2026

Sankat Mochan Hanuman Temple Varanasi

Sankat Mochan Hanuman Temple Varanasi : संकट मोचन हनुमान मंदिर वाराणसी: टाइमिंग, आरती, इतिहास और यात्रा गाइड (फोटो सोर्स: kashishakti.com)

Sankat Mochan Hanuman Temple Varanasi : संकट मोचन हनुमान मंदिर, वाराणसी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में है। यहां हर कोई भगवान हनुमान से अपने दुख और परेशानियां दूर करने की दुआ करता है। लोग सच में मानते हैं कि बजरंगबली के दर्शन से मन हल्का हो जाता है और जीवन में राहत मिलती है।

इस मंदिर का रिश्ता सीधे गोस्वामी तुलसीदास जी से है। कहा जाता है तुलसीदास जी को हनुमान जी यहीं साक्षात दर्शन दिए थे। वक्त के साथ ये मंदिर बनारस के श्रद्धालुओं और बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए एक जरूरी पड़ाव बन गया है। यहां आने का प्लान बना रहे हैं तो ये गाइड आपके बहुत काम आएगी मंदिर का टाइमिंग, आरती, इतिहास, त्यौहारों की लिस्ट और यात्रा के लिए जरूरी टिप्स, सब मिल जाएगा।

कुछ खास जानकारी पहले ही जान लीजिए

  • त्यौहारों पर और हनुमान जयंती के दिन मंदिर खुलने और बंद होने के समय में बदलाव हो जाता है।
  • आम दिनों में मंदिर सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। मंगलवार और शनिवार को मंदिर में जबरदस्त भीड़ होती है, इन दिनों मंदिर जल्दी खुल जाता है और देर तक खुला रहता है।

कब दर्शन करें?

  • अगर आप वाकई शांति चाहते हैं तो सुबह 5 से 8 बजे के बीच पहुंचिए। सबकुछ शांत और सुरम्य होता है।
  • आरती का समय भी जबरदस्त है सूर्यास्त से ठीक पहले पहुंचें तभी आपको उस ऊर्जा का अनुभव मिलेगा।
  • मंगलवार और शनिवार वाले दिन भीड़ देखने की तैयारी रखिए। बहुत से लोग सिर्फ इन्हीं दो दिन हनुमानजी के दर्शन के लिए आते हैं।
  • गर्मियों में दोपहर का वक्त टालें, बनारस की गर्मी में लाइन में खड़े रहना मुश्किल हो सकता है।

यहां तक कैसे पहुंचे?

  • अगर आप फ्लाइट से आ रहे हैं, तो सबसे पास का एयरपोर्ट है लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो करीब 20-25 किमी दूर है। वहां से टैक्सी या ऑटो आसानी से मिल जाता है।
  • ट्रेन ठीक रहती है : वाराणसी जंक्शन और बनारस रेलवे स्टेशन, दोनों नजदीक हैं। स्टेशन से कैब या ऑटो पकड़ लीजिए।
  • सड़क मार्ग से भी कोई दिक्कत नहीं है। मंदिर खुद वाराणसी के लंका इलाके में है, जो बनारस शहर के हर हिस्से से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। लोकल ऑटो या बस से पहुंच सकते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी बातें

  • कपड़े पूरी मर्यादा में पहनें सादे और सभ्य।
  • मंदिर के अंदर मोबाइल और कैमरा ले जाना मना है। एंट्री गेट पर लॉकर है, वहां जमा कर सकते हैं।
  • मंदिर के बाहर जो बेसन के लड्डू मिलते हैं, वही यहां का प्रसाद है और यकीन मानिए बहुत स्वादिष्ट होता है!
  • बंदर-लंगूर बहुत घूमते हैं, तो अपना सामान संभालकर रखें।
  • बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर और टॉयलेट जैसी जरूरी सुविधाएं भी वहां मौजूद हैं।

मंदिर की बनावट और माहौल

संकट मोचन हनुमान मंदिर की रचना सीधी-सादी है, दिखावे से एकदम परे। यह मंदिर आपको भव्यता से नहीं, अपनी सहजता औऱ सच्चे माहौल से छू जाता है। चारों तरफ हरियाली, पुराने पेड़ और शांति सब कुछ सकारात्मक एहसास देता है।

मंदिर में दो मुख्य गर्भगृह हैं।

  • पहले में हनुमान जी की ध्यानमग्न मूर्ति बैठी है। स्पेशल ये है कि हनुमान जी का चेहरा सामने राम, सीता और लक्ष्मण के मंदिर की तरफ है। ये देखकर साफ लगता है, यहां भगवान राम और हनुमान की भक्ति का रिश्ता कितना गहरा है।दोनों मंदिरों के बीच एक पवित्र कुआं भी है।
  • मंदिर में तीन प्रवेश-द्वार हैं मुख्य द्वार, बगल का छोटा गेट (जो अक्सर स्थानीय लोग इस्तेमाल करते हैं), और खास मेहमानों के लिए अलग दरवाजा भी है।
  • मंत्रोच्चार, घंटियां और अगरबत्ती की खुशबू मंदिर परिसर का माहौल हमेशा भक्तिमय रहता है।

त्यौहार और उत्सव

त्यौहारों के समय मंदिर में भीड़ और उल्लास का आलम अलग ही होता है। सबसे बड़ा पर्व होता है हनुमान जयंती, जब अखंड पाठ, भजन और भव्य आरती का आयोजन होता है।
राम नवमी, तुलसी जयंती, दिवाली और दशहरे पर भी खास आयोजन होते हैं। पूरी रात मंदिर रोशन रहता है, चारों तरफ दीप जलते हैं।

मंदिर का इतिहास

मंदिर की नींव 16वीं शताब्दी में पड़ी थी. कहा जाता है, तुलसीदास जी को अस्सी घाट के पास हनुमान जी के दर्शन हुए और उन्हीं के कहने पर यहां मंदिर की स्थापना हुई। इसी वजह से इसे नाम मिला संकट मोचन जो संकट हर लें। बाद में 20वीं सदी की शुरुआत में महामना मदन मोहन मालवीय जी ने यहां मंदिर का विस्तार करवाया।

सच कहें तो ये मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बनारस की रग-रग में बसा एक खास अनुभव है। यहां जिंदगी की भागदौड़ से कुछ पल फुर्सत के सच में चैन देने वाले होते हैं।