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Top 10 Ghats in Varanasi : वाराणसी के 10 प्रमुख घाट: जहां हर कदम पर बसी है एक कहानी

Varanasi Ghats Travel Guide 2026 : वाराणसी के 10 प्रमुख घाटों की पूरी गाइड अस्सी घाट से लेकर मणिकर्णिका घाट तक। जानिए इतिहास, खासियत, 2026 के नए अपडेट, नमो घाट, क्रूज सफारी और वॉटर टैक्सी जैसी सुविधाएं।

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भारत

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Manoj Vashisth

Apr 23, 2026

Top 10 Ghats in Varanasi

Top 10 Ghats in Varanasi : 2026 में वाराणसी घूमने जा रहे हैं? इन घाटों को बिल्कुल मिस न करें (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Top 10 Ghats in Varanasi : वाराणसी, यानी बनारस, कोई ऐसा शहर नहीं है जिसे आप बस देख सकें; यह वो अनुभव है जिसे आपको जीना पड़ता है। यहान की सुबह शहनाई की गूंज से शुरू होती है और रात गंगा आरती की रोशनी में ठहर जाती है। साल 2026 तक आते-आते स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट ने यहां की गलियों और घाटों को नई चमक तो दी है, लेकिन यहां की हवा में घुली मल्हार और चंदन की खुशबू आज भी वही सदियों पुरानी है।

अगर आप काशी की रूह को छूना चाहते हैं, तो इन 10 घाटों की सैर जरूर करनी चाहिए | Varanasi Ghats Travel Guide 2026

1. अस्सी घाट: बनारस की सुबह का रागा

यह घाट शहर का फेफड़ा है। दक्षिण में स्थित अस्सी घाट पर ही प्रसिद्ध सुबह-ए-बनारस का आयोजन होता है।

खासियत: यहां सूर्योदय के समय होने वाली आरती और योग उत्सव देखने लायक होता है।
2026 अपडेट: आरती देखने के बाद पास की गलियों में स्थित पुराने अखाड़ों में जाना न भूलें, जहां आज भी मिट्टी में कुश्ती की परंपरा जिंदा है।

2. चेत सिंह घाट: पानी पर खड़ा किला

यह सिर्फ एक घाट नहीं, बल्कि 18वीं शताब्दी का एक अभेद्य किला है। यह महाराजा चेत सिंह और अंग्रेजों के बीच हुए भीषण युद्ध का गवाह है।

क्यों जाएं? इसकी राजपूताना नक्काशी और भारी पत्थर की दीवारें इसे फोटोग्राफी के लिए बेस्ट बनाती हैं। शाम को यहां स्थानीय लड़कों को किले की ऊंची दीवारों से गंगा में छलांग लगाते देखना एक रोमांचक अनुभव है।

3. दरभंगा घाट: शाही भव्यता का प्रतीक

अगर आपने बनारस के किसी पोस्टकार्ड पर एक आलीशान महल देखा है, तो समझ लीजिए वह दरभंगा घाट ही है।

नजारा: यहां का ब्रजरामा पैलेस (जो अब एक होटल है) ग्रीक शैली के झरोखों और विशाल स्तंभों से सजा है। नाव से इस घाट को देखना किसी फिल्म के सीन जैसा लगता है।

4. दशाश्वमेध घाट: ब्रह्मांड का केंद्र

यह काशी का सबसे जीवंत और भीड़भाड़ वाला घाट है। मान्यता है कि यहां ब्रह्मा जी ने दस अश्वमेध यज्ञ किए थे।

सावधानी: यहां की गंगा आरती दुनिया भर में मशहूर है। 2026 में भीड़ और बढ़ गई है, इसलिए आरती से एक घंटा पहले पहुंचें। यहां पंडों और गाइडों की भीड़ से सावधान रहें और विनम्रता से नहीं चाहिए कहकर आगे बढ़ें।

5. मान मंदिर घाट: सितारों की वेधशाला

दशाश्वमेध से कुछ ही दूरी पर स्थित यह घाट विज्ञान और अध्यात्म का संगम है।

विशेष: जयपुर के राजा जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित यहां एक जंतर-मंतर (Observatory) है। पत्थर के बने विशाल यंत्रों से आज भी तारों और ग्रहों की गणना की जा सकती है।

6. मणिकर्णिका घाट: जीवन का अंतिम सत्य

इसे महाश्मशान कहा जाता है। यहां की आग हजारों सालों से ठंडी नहीं हुई है।

महत्व: यहां शव यात्राएं राम नाम सत्य है' के उद्घोष के साथ पहुंचती हैं। यह जगह आपको डराती नहीं, बल्कि जीवन की नश्वरता का अहसास कराती है।

सख्त नियम: यहां कैमरा या फोन से फोटो खींचना पूरी तरह वर्जित और अपमानजनक माना जाता है।

7. सिंधिया घाट: झुका हुआ शिव मंदिर

मणिकर्णिका के ठीक बगल में स्थित इस घाट पर रत्नेश्वर महादेव का मंदिर है, जो पीसा की मीनार की तरह एक तरफ झुका हुआ है।

कहानी: कहते हैं कि एक बेटे ने अपनी मां के दूध का कर्ज उतारने के लिए इसे बनवाया था, लेकिन मां का कर्ज कभी उतारा नहीं जा सकता, इसलिए यह मंदिर श्रापित होकर टेढ़ा हो गया।

8. भोसले घाट: मराठा विरासत

नागपुर के भोसले परिवार द्वारा निर्मित यह घाट अपनी मजबूती और सादगी के लिए जाना जाता है।

बनारसी जीवन: यहां आज भी आप धोबियों को पत्थरों पर कपड़े धोते हुए देख सकते हैं, जो आधुनिक युग में भी पुराने बनारस की याद दिलाता है।

9. पंचगंगा घाट: पांच नदियों का मिलन

मान्यता है कि यहां गंगा, यमुना, सरस्वती, किरणा और धूतपापा नदियों का अदृश्य संगम होता है।

खास बात: यहां औरंगजेब द्वारा निर्मित आलमगीर मस्जिद है, जो हिंदू-मुस्लिम स्थापत्य कला का अद्भुत मिश्रण है। कार्तिक के महीने में यहां आकाश दीप जलाने की परंपरा बेहद खूबसूरत होती है।

10. अहिल्या घाट: रानी की भेंट

इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर के नाम पर बना यह घाट अपनी स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध है।

कनेक्शन: यह घाट मणिकर्णिका (मृत्यु) और दशाश्वमेध (जीवन) के बीच एक शांत पुल का काम करता है। रानी अहिल्याबाई ने ही काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था, इसलिए इस घाट का ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है।

2026 में बनारस यात्रा के लिए खास टिप्स

नमो घाट (नमस्ते घाट): अब सूची में 11वां नाम नमो घाट का जुड़ चुका है। यहां लगे हाथ जोड़ने वाले विशाल स्टील के स्कल्पचर पर्यटकों के लिए नया आकर्षण हैं। यहां से जल मार्ग के साथ-साथ हवाई दर्शन (Helicopter Service) की सुविधा भी शुरू हो गई है।

क्रूज सफारी: अब आप साधारण नाव के अलावा अलकनंदा और अन्य लग्जरी क्रूज पर सवार होकर घाटों की सैर कर सकते हैं, जिसमें बनारसी संगीत और भोजन का आनंद भी मिलता है।

जलमार्ग: 2026 में स्मार्ट सिटी के तहत घाटों के बीच आवाजाही के लिए वॉटर टैक्सी एक बढ़िया विकल्प बन गई है, जिससे आप शहर के ट्रैफिक से बच सकते हैं।

बनारस के घाट केवल पत्थर की सीढ़ियां नहीं हैं, ये सदियों पुरानी कहानियों की गवाह हैं। अगली बार जब आप यहां आएं, तो बस एक घाट के किनारे बैठकर गंगा की लहरों को देखिएगा आपको अपने हर सवाल का जवाब मिल जाएगा।