
Vishwakarma History : ऋषि थे विश्वकर्मा भगवान, पंडित से जानिए इनके माता-पिता का नाम (फोटो सोर्स: AI image@Gemini)
Vishwakarma History : आज के दिन संसार के शिल्पकार और यंत्रों को सुचारू रूप से चलाने वाले भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार, बाबा विश्वकर्मा को पूर्वजों में से एक माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। इसी कारण इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है।
ज्योतिषी और टैरो कार्ड रीडर नितिका शर्मा ने बताया कि विश्वकर्मा पूजा पर औजारों, निर्माण मशीनरी, दुकानों, कारखानों आदि की विशेष रूप से पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने भगवान ब्रह्मा के साथ मिलकर इस ब्रह्मांड का निर्माण किया था। ऐसा माना जाता है कि सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के साथ ही पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं। हमारी भक्ति से प्रसन्न होकर वे हमें धन, वंश और आजीविका में वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। वास्तुकला, निर्माण या यांत्रिक गतिविधियों से जुड़े लोग अपने शिल्प और उद्योगों के लाभ के लिए विश्वकर्मा पूजा पर दिव्य वास्तुकार की पूजा करते हैं।
टैरो कार्ड रीडर नितिका शर्मा ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने इंद्रपुरी, द्वारका, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक, लंका, जगन्नाथपुरी, भगवान शिव के त्रिशूल और विष्णु के सुदर्शन चक्र का निर्माण किया था। इसलिए, कारखानों और कंपनियों में विश्वकर्मा पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, ऋषि विश्वकर्मा और औजारों की पूजा की जाती है। मशीनों की सफाई और पूजा की जाती है, और अगले दिन कारखाने बंद रहते हैं।
ज्योतिषी और टैरो कार्ड रीडर नितिका शर्मा ने बताया कि इस वर्ष विश्वकर्मा जयंती आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाएगी। इंदिरा एकादशी, कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर को हैं। भक्त अपनी सुविधानुसार स्नान-ध्यान कर भगवान विश्वकर्मा की पूजा कर सकते हैं।
ज्योतिषी और टैरो कार्ड रीडर नितिका शर्मा ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सुबह जल्दी उठकर दैनिक कर्मकांड पूरे करने चाहिए। पूजा करने के लिए, स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करें। हल्दी, चावल, फूल, पान, लौंग, सुपारी, मिठाई, फल, दीपक और पवित्र धागा शामिल करें। पूजा में लोहे की वस्तुएं और मशीनरी शामिल करें। पूजा की जाने वाली वस्तुओं पर हल्दी और चावल लगाएं। फिर, पूजा में रखे कलश पर हल्दी लगाएं और पवित्र धागा बाँधें। इसके बाद, मंत्रों का जाप करते हुए पूजा शुरू करें। लोगों में प्रसाद बांटें।
शास्त्रों में भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मा जी का पुत्र कहा गया है। ज्योतिषी और टैरो कार्ड रीडर नितिका शर्मा बताती हैं कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु समुद्र में शेषशैया पर प्रकट हुए थे। ऐसा कहा जाता है कि धर्म, वास्तु के सातवें पुत्र थे, जिनका जन्म वास्तु नामक स्त्री से हुआ था, जो एक वास्तुकार की रचना थी। ऋषि विश्वकर्मा का जन्म वास्तुदेव की पत्नी अंगिरसी से हुआ था। ऐसा माना जाता है कि अपने पिता की तरह, ऋषि विश्वकर्मा भी वास्तुकला के विशेषज्ञ थे। ऐसा माना जाता है कि ऋषि विश्वकर्मा ने भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र और भगवान शिव के त्रिशूल का निर्माण किया था। यह भी माना जाता है कि विश्वकर्मा ने भगवान शिव के लिए लंका में स्वर्ण महल का निर्माण किया था। ऐसा कहा जाता है कि रावण ने महल की पूजा के दौरान इसे दक्षिणा के रूप में लिया था।
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Updated on:
17 Sep 2025, 11:06 AM IST
Published on:
17 Sep 2025, 11:06 AM IST
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