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कौन हैं शांता! क्या है श्रीराम से इनका संबंध, आखिर राम के जन्म में क्या रही इनकी और इनके पति की भूमिका

श्रीराम हमारे मन में रचे—बसे हैं। यही कारण है कि अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर देशभर में लोगों में जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है। 22 जनवरी को सदियों बाद भव्य मंदिर में रामलला की मूर्ति विराजित होगी। यह एक ऐतिहासिक पल है और हर कोई इस क्षण का साक्षी बनना चाहता है। इस मौके पर हम आपको श्रीराम के जीवन के एक ऐसे पहलू के बारे में बता रहे हैं जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं।

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कई जगहों पर राम की बहन शांता का भी जिक्र किया जाता है

श्रीराम हमारे मन में रचे—बसे हैं। यही कारण है कि अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर देशभर में लोगों में जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है। 22 जनवरी को सदियों बाद भव्य मंदिर में रामलला की मूर्ति विराजित होगी। यह एक ऐतिहासिक पल है और हर कोई इस क्षण का साक्षी बनना चाहता है। इस मौके पर हम आपको श्रीराम के जीवन के एक ऐसे पहलू के बारे में बता रहे हैं जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं।

शास्त्रों में उल्लेख है कि श्रीराम, अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र थे। उनके तीन भाई— लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न भी थे। कई जगहों पर राम की बहन शांता का भी जिक्र किया जाता है जिसे अधिकांश विद्वानों ने मिथक करार दिया है।

राम के जीवन के बारे में वाल्मिकी की रामायण या तुलसीदास की श्रीरामचरित मानस के अलावा दक्षिण भारत की कंबन रामायण को सबसे विश्वसनीय ग्रंथ माना गया है। राम के जीवन और चरित्र चित्रण से संबंधित अधिकांश बातें हमें इन तीनों ग्रंथों से मिलती हैं। वाल्मिकी रामायण या तुलसीदास की श्रीरामचरित मानस में शांता का कोई उल्लेख नहीं है। यही कारण है कि शांता को श्रीराम से जुड़ा मिथक मान लिया गया है।

लेकिन देश—दुनिया में कई लोग शांता का अस्तित्व मानते हैं। दरअसल वाल्मिकी रामायण, कंबन रामायण, श्रीरामचरित मानस, आनंद रामायण आदि प्रमुख महाकाव्यों के जैसे राम के जीवन चरित्र पर दुनियाभर में 250 से ज्यादा ग्रंथ या महाकाव्य रचे गए हैं। इनमें से कुछ ग्रंथों में शांता को श्रीराम की बहन के रूप में उल्लेखित किया गया है।

कई ग्रंथों में यह उल्लेख किया गया है कि राजा दशरथ और कौशल्या की एक पुत्री थी जिसका नाम शांता था। वे चारों भाइयों से बड़ी थीं। पुत्री के बाद राजा दशरथ वंश चलाने के लिए पुत्र चाहते थे जिसके लिए उन्होंने
शृंगी ऋषि से पुत्र कामेष्ठी यज्ञ कराया। इस यज्ञ के प्रसाद से दशरथ के चारों पुत्र श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का जन्म हुआ था।

खास बात यह है कि जिन शृंगी ऋषि के पुत्र कामेष्ठी यज्ञ से दशरथ चार पुत्रों के पिता बने, वे उनकी पुत्री शांता के पति थे। यानि शृंगी ऋषि महाराज दशरथ के दामाद थे। इस प्रकार राम सहित चारों भाइयों के जन्म में बहन शांता और उनके पति शृंगी ऋषि की सबसे अहम भूमिका थी।

राम की बहन के रूप में शांता का जिक्र प्रमुख रूप से अध्यात्म रामायण और आनंद रामायण में किया गया है। इंडोनेशिया में रामकियेन में भी राजा दशरथ के चारों पुत्रों के साथ पुत्री के रूप में शांता का उल्लेख किया गया है। छत्तीसगढ़ी रामायण में भी शांता को श्रीराम की बहन के रूप में बताया गया है।

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