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फाल्गुन माह में इस उपाय को करने से बरकरार रहेंगी खुशियां

फाल्गुन माह हिन्दू पंचांग का आखिरी महीना होता है।

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फाल्गुन माह हिन्दू पंचांग का आखिरी महीना होता है। इसे बसंत का महीना भी कहा जाता है। इस महीने में हिंदू धर्म के दो बड़े त्यौहार भी पड़ते हैं, शिवरात्रि और होली। इस महीने में एक ओर भगवान शिव की पूजा की जाती है तो दूसरी तरफ भगवान विष्णु द्वारा अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के कारण होलिका दहन के साथ रंग और उल्लास का त्यौहार होली भी मनाई जाती है।


मान्यता है कि चंद्रमा की उत्पति भी फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को ही हुई थी। इसलिए इस महीने में चंद्र देव की पूजा भी की जाती है। माना जाता है कि इस महीने में चंद्र देव की पूजा करने से चंचल मन शांत रहता है।


करें ये महाउपाय

फाल्गुन महीने में सूर्योदय से पहले उठें और स्नान के जल में एक चमच गुलाबजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद भोजपत्र को अपने पूजन स्थल में रखकर एक दीया जलाएं और गायत्री मंत्र का तीन माला जाप करें। ध्यान रखें कि ये काम आपको फाल्गुना मास में हर दिन करने होंगे। माना जाता है कि इस महाउपाय को करने से जीवन में सदैव खुशियां बरकरार रहती हैं।


फाल्गुन माह के व्रत-त्यौहार


जानकी जयंती: फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माता सीता की जयंती मनाई जाता है। माना जाता है कि इसी दिन माता सीता का जन्म हुआ था।

विजया एकादशी: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु को आराध्य मानकर पूजा किया जाता है।

महाशिवरात्रि: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव की आराधना की जाती है। इस दिन लोग व्रत करके भगवान शिव और माता पार्वती का ब्याह रचाते हैं।

फाल्गुनी अमावस्या: धार्मिक दृष्टि से अमावस्या तिथि को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों के लिए दान-तर्पण करते हैं। इस अमावस्या को श्राद्ध पूजन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

आमलकी एकादशी: फाल्गुन की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस दिन सुख-समृद्धि और मोक्ष की कामना हेतु उपवास किया जाता है।

होली: फाल्गुन की पूर्णिमा तिथि को होली का पर्व मनाया जाता है और होलिका पूजन करके शाम के समय होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है।