
kharmas 2021
हिंदू कैलेंडर में सूर्य का धनु में गोचर खरमास के रूप में जाना जाता है। वहीं इस खरमास को अशुभ माना जाता है। ऐसे में इस दौरान कई तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। जानकारों के अनुसार सूर्य के धनु राशि और मीन राशि में स्थित होने की अवधि को ही खरमास अथवा मलमास कहा जाता है।
ऐसे में इस साल यानि 2021 में सूर्य का धनु में गोचर 16 दिसंबर से शुरु होने जा रहा है, जो खरमास के रूप में मकर संक्राति 2022 तक चलेगा। जिसके चलते इस खरमास के दौरान वैवाहिक कार्य और शुभ कार्य बंद कर दिए जाने के साथ ही गृह प्रवेश नींव पूजन, नवीन व्यापार, विवाह, सगाई सहित सभी शुभ कार्य वर्जित माने जाएंगे।
ऐेसे में हर कोई ये भी जानना चाहता है कि आखिर इस समय ऐसे कौन से कार्य किए जा सके हैं, जो हमें शुभ फल प्रदान करें। तो इस संबंध में पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि इस कालअवधि में अशुभ माह होने के बावजूद कई ऐसे कार्य हैं तो हमें शुभता प्रदान करते हैं। और इन्हें इस दौरान किया जाना बेहद शुभ माना गया है।
पंडित शर्मा के अनुसार खरमास में भागवत गीता, कथावाचन, श्रीराम की कथा, पूजा,पूजा-पाठ, धर्म-कर्म, मंत्र जाप और विष्णु भगवान की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। वहीं ये भी मान्यता है कि इस दौरान दान, पुण्य, जप, और भगवान का ध्यान लगाने से कष्ट दूर हो जाते हैं।
इसके साथ ही खरमास में भगवान शिव की पूजा कष्टों का निवारण करती है। शिवजी के साथ ही खरमास में भगवान विष्णु की पूजा भी अत्यंत फलदायी मानी गई है।
वहीं खरमास में सूर्यदेव को अर्घ्य देना भी बेहद खास माना जाता है। इसके तहत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि के पश्चात तांबे के लोटे में जल, रोली या लाल चंदन, शहद व लाल पुष्प डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। जो बेहद शुभ फलदायी माना गया है। वहीं इस दौरान ईश्वर की आराधना एवं पूजन,अर्चन, भागवत कथाएं, रामायण कथा, रामायण का पाठ, मंत्र जाप धार्मिक कृत्य किए जा सकते हैं।
खरमास में इन 3 बातों का रखें खास ध्यान
- खरमास के दौरान किसी से प्रकार के विवाद से दूरी बनाकर रखनी चाहिए और अपने गुरुओं और बड़ों का आदर करना चाहिए।
- इस अवधि में नई चीजें जैसे नया घर, नई कार आदि की खरीददारी नहीं करनी चाहिए।
- खरमास की पूरी अवधि में विवाह, सगाई, ग्रह-प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।
ऐसे समझें खरमास की उत्पत्ति: पौराणिक कथा
हर सौर वर्ष में आने वाले खरमास को अशुभ मानने के पीछे एक पौराणिक कथा है। इस कथा के अनुसार एक बार सूर्य देवता अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्राह्मांड की परिक्रमा कर रहे थे। इस दौरान लगातार चलते रहने के कारण उनके रथ में जुते घोड़े थक गए, और घोड़ों को प्यास लगने लगी।
घोड़ों की उस दयनीय दशा को देखकर सूर्यदेव को उनकी चिंता हुई। और वो घोड़ों को लेकर एक तालाब के किनारे चले गए, ताकि घोड़ों को पानी पिला सकें। लेकिन तभी उन्हें अहसास हुआ कि यदि रथ रूक गया तो अनर्थ हो जाएगा। क्योंकि रथ के रूकते ही पूरा जनजीवन भी ठहर जाता।
यहां घोड़ों का सौभाग्य ही था कि उस तालाब के किनारे दो "खर''यानि ''गधे'' मौजूद थे। भगवान सूर्यदेव की नजर उन गधों पर पड़ी और उन्होंने अपने घोड़ों को वहीं तालाब के किनारे पानी पीने और विश्राम करने के लिए छोड़ दिया, और घोड़ों की जगह पर दोनों खरों को अपने रथ में जोड़ लिया।
लेकिन खरों की गति धीमी होती है, जिसके कारण रथ की गति भी धीमी हो जाती है, फिर भी जैसे तैसे एक मास का चक्र पूरा होता है। इस महीने सूर्य देवता के रथ को घोड़ों की जगह गधे खींचते हैं। ऐसे में रथ की गति धीमी होने के कारण ही इस मास में अत्यधिक सर्दी भी पड़ती है। फिर भी जैसे तैसे एक मास का चक्र पूरा हो गया। उधर तब तक घोड़ों को काफी आराम मिल चुका था। इस तरह यह क्रम चलता रहता है।
Published on:
14 Dec 2021 10:43 am
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