17 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बालोद

नर्राटोला में 15वीं-16वीं शताब्दी की दुर्लभ प्रतिमाएं, ग्रामीण करते हैं पूजा, इसलिए बचीं

बालोद जिले में पुरातत्व विभाग के पास प्राचीन प्रतिमाओं व धरोहरों को सुरक्षित रखने तक का समय नहीं है। डौंडी विकासखंड के ग्राम नर्राटोला में 15वीं से 16वीं शताब्दी में पत्थरों से बनी प्रतिमाएं हैं। इन दुर्लभ प्राचीन प्रतिमाओं को सहेजने ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

Google source verification

Rare Statue बालोद जिले में पुरातत्व विभाग के पास प्राचीन प्रतिमाओं व धरोहरों को सुरक्षित रखने तक का समय नहीं है। डौंडी विकासखंड के ग्राम नर्राटोला में 15वीं से 16वीं शताब्दी में पत्थरों से बनी प्रतिमाएं हैं। इन दुर्लभ प्राचीन प्रतिमाओं को सहेजने ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अच्छी बात यह है कि इन प्राचीन प्रतिमाओं की ग्रामीण पूजा कर रहे हैं। तब कुछ प्रतिमाएं सुरक्षित हैं। ग्रामीण देखरेख नहीं करते तो प्राचीन प्रतिमाएं गायब हो जाती। ग्रामीणों की मांग के बाद भी शासन-प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। ग्राम नर्राटोला के ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी प्रतिमाएं हैं। इसके बारे में हमें ज्यादा पता नहीं है। यह सत्य है कि इस जगह के आसपास की खुदाई करें तो पत्थरों की प्राचीन प्रतिमाएं निकलती है।