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कोर्ट ने २९ अगस्त तक के लिए टाला फैसला, जानें बाबा रामपाल से जुड़ी खास बातें

बुधवार को कोर्ट में संत रामपाल की धारा 201, 426, 427 और 443 के तहत पेशी हुई थी. कोर्ट ने धारा 426 और 427 का फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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Vikas Gupta

Aug 24, 2017

sant rampal case- Court adjourns decision till August 29

बुधवार को कोर्ट में संत रामपाल की धारा 201, 426, 427 और 443 के तहत पेशी हुई थी. कोर्ट ने धारा 426 और 427 का फैसला सुरक्षित रख लिया था।

कथित संत बाबा रामपाल को २९ अगस्त तक के लिए राहत मिल गई है। हरियाणा के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल के खिलाफ चल रहे दो केसों में आज हिसार कोर्ट में सुनाया जाने वाला फैसला 29 अगस्त तक के लिए टाल दिया गया है। आज रामपाल पर फैसला आने से पहले हरियाणा में हिंसा होने की आशंका थी, स्थानीय प्रशासन इसे रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए थे। बुधवार को कोर्ट में संत रामपाल की धारा 201, 426, 427 और 443 के तहत पेशी हुई थी. कोर्ट ने धारा 426 और 427 का फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब ये फैसला २९ अगस्त को सुनाया जा सकता है। कबीर पंथी विचारधारा के समर्थक संत रामपाल दास देशद्रोह के एक मामले में इन दिनों हिसार जेल में बंद हैं।इससे पहले साल २००६ में भी रामपाल पर हत्या का केस दर्ज हुआ था।


जानें रामपाल के बारे में

सोनीपत के गोहाना तहसील के धनाना गांव में १९५१ में रामपाल दास का जन्म हुआ। पढ़ाई पूरी करने के बाद रामपाल को हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी मिल गई।नौकरी के दौरान रामपाल की मुलाकात 107 साल के कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई। रामपाल उनके शिष्य बन गए।इसके बाद रामपाल ने 18 साल की सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सतसंग करने लगे।संत रामपाल के अनुयायियों की संख्या बढ़ती चली गई। कमला देवी नाम की एक महिला ने करोंथा गांव में बाबा रामपाल दास महाराज को आश्रम के लिए जमीन दे दी। 1999 में बंदी छोड़ ट्रस्ट की मदद से रामपाल ने हरियाणा में सतलोक आश्रम बनाया।


विवादों से रहा रामपाल का नाता

2006 में स्वामी दयानंद की लिखी एक किताब पर संत रामपाल ने एक टिप्पणी की। आर्यसमाज को इस टिप्पणी से आपत्ति हुई और दोनों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई, इस घटना में एक शख्स की मौत भी हो गई। इसके बाद 2006 में सरकार ने आश्रम को कब्जे में ले लिया। रामपाल और उनके 24 समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया। 2009 में संत रामपाल को आश्रम वापस मिल गया।


रामपाल के खिलाफ आर्यसमाज ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। 12 मई 2013 को नाराज आर्य समाजियों और संत रामपाल के समर्थकों में एक बार फिर झड़प हुई। इस हिंसक झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई, करीब 100 लोग घायल हो गए। अब इसी मामले में संत रामपाल को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पेशी हुई थी।


पंजाब-हरियाणा कोर्ट ने संत रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। रामपाल को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन संत के समर्थकों ने रामपाल को अस्वस्थ बताकर, गिरफ्तारी का आदेश मानने से ही इनकार कर दिया और संत रामपाल कोर्ट में पेश नहीं हुए।


रामपाल पर सरकारी बाधा डालने और आश्रम पर लोगों को बंधक बनाने के साथ देशद्रोह का भी मुकदमा दर्ज है। गौरतलब है कि २० नवंबर २०१४ को हत्या के आरोप जब पुलिस रामपाल को आश्रम में गिरफ्तार करने गई तो उसके समर्थकों ने पूरे इलाके में काफी तोड़फोड़ की थी। यही नहीं जब पुलिस ने रामपाल को गिरफ्तार कर उनके आश्रम की छानबीन की जो वहां से भारी मात्रा में हथियार और करोड़ों रुपये की खाद्य सामग्री व कई अपत्ती जनक चीजें बरामद हुई थीं।