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न्याय के देवता शनि को वैदिक ज्योतिष खास महत्व प्राप्त है। माना जाता है कि एक ओर जहां ये कर्मों के आधार पर दंड के विधान के तहत कार्य करते हुए दंड प्रदान करते हैं,वहीं जिस पर यह प्रसन्न हो जाते हैं उसे फर्श से उठाकर अर्श तक पहुंचा देते हैं।
ज्योतिष के अनुसार नौ ग्रहों में शनि की गति सबसे मंद है। जबकि इनका प्रभाव सबसे अधिक है। भले ही शनि के दंड के न्याय विधान के कारण लोगों में इन्हें नकारात्मक धारणा बनी हुई हो और वे इसके नाम से भयभीत भी रहते हों। परंतु कई जानकारों के अनुसार शनि ग्रह को भले एक क्रूर हैं परंतु यह गलत कर्म करने या पीड़ित होने पर ही जातकों को नकारात्मक फल देता है। वहीं यदि किसी व्यक्ति का शनि उच्च हो और उसके कर्म भी बुरे न हों तो माना जाता है कि शनिदेव उसे रंक से राजा तक बना देते है।
साप्ताहिक दिनों में शनि देव का दिन शनिवार माना गया है। हिन्दू धर्म में उन्हें सूर्य पुत्र माना जाता है। ऐसे में इस दिन शनिदेव और हनुमान जी की आराधना तो सभी करते हैं। लेकिन, जानकारों का कहना है कि बहुत कम लोग जानते हैं कि शनिवार के दिन कुछ छोटे-छोटे उपायों को आजमाने से किस्मत चमक सकती हैं।
शनिदेव होंगे प्रसन्न: अपनाएं ये सरल उपाय...
: शनिवार के दिन नीले वस्त्र धारण करें।
: इस दिन हनुमान मंदिर अवश्य जाएं।
: हनुमानजी को पान का बीड़ा चढ़ाएं।
: लाल फूल हनुमानजी के चरणों में अर्पित करें।
: ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप कर घर से निकलें।
: शनिवार के दिन तिल का सेवन अवश्य करें।
: नीले या जामुनी फूल शनि मंदिर में चढ़ाएं।
: कार्य पर जाते समय नीला रूमाल अवश्य साथ रखें।
शनिमंदिर: रखें ये सावधानी...
1. कहा जाता है कि शनि मंदिर में भगवान शनिदेव की प्रतिमा की आंखों में आंखें डालकर नहीं देखना चाहिए। दर्शन करते समय उनके चरणों पर ही नजर रखें साथ ही दिल व वाणी से उनके प्रति श्रद्धा का भाव होना चाहिए।
2. शनिदेव को तेल चढ़ाते समय ध्यान रखें की तेल इधर-उधर ना गिरे और चढ़ाया जा रहा तेल खराब ना हो यानि अच्छे व शुद्ध तेल का ही उपयोग करें। यदि छायादान कर रहे हैं तो उस तेल को न चढ़ाएं, बल्कि उसे कटोरी सहित ही शनिदेव के चरणों में रख देते हैं।
3. शनिदेव की मूर्ति के एकदम सामने खड़े होकर कभी भी पूजा या प्रार्थना ना करें।
4. शनि मंदिर में यदि बाहर कोई गरीब, अपंग या भिखारी हो तो उसे दान अवश्य दें। दान नहीं दे सकते हों तो कम से कम उनका तिरस्कार ना करें। यानि उससे अच्छा व्यवहार करें।
5. शनि मंदिर में किसी भी प्रकार की सांसारिक वार्ता ना करें। चुपचाप अपनी पूजा या प्रार्थना के बाद मंदिर की सीढ़ियों पर कुछ देर के लिए बैठें और लौट आएं।
6. शनि की पूजा में दिशा का विशेष महत्व होता है। शनि को पश्चिम दिशा का स्वामी माना जाता है इसलिए शनि की पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपका मुख पश्चिम दिशा की ओर ही होना चाहिए।
7. माना जाता है कि शनिदेव को लाल रंग पसंद नहीं है इसलिए शनिवार को पूजा में भूलकर भी लाल रंग के फूल या कोई लाल सामाग्री का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
Published on:
16 Jul 2021 05:58 pm

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