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प्रदेश के इस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पर लगा था बड़ा आरोप, सीबीआइ के बाद एमएचआरडी से भी मिल गया क्लीन चिट

घर पर पड़ा था सीबीआइ का छापा...
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रीवा

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Ajit Shukla

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Updated: 19 Jul 2018, 1:29 PM IST

APSU professor relief from CBI and MHRD, accused of financial scandal

APSU professor relief from CBI and MHRD, accused of financial scandal

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के प्रो. विजय अग्रवाल के विरूद्ध दो वर्ष पूर्व सीबीआइ में की गई शिकायत गलत पाए जाने पर नस्तीबद्ध कर दी गई है। सीबीआई ने पिछले वर्ष दिसंबर में प्रकरण पर अंतिम रिपोर्ट लगाकर प्रोफेसर विजय अग्रवाल को क्लीन चिट दी थी। अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सीबीआई की रिपोर्ट को मान्य करते हुए प्रोफेसर विजय अग्रवाल की सतर्कता जांच समाप्त कर उन्हें क्लीन चिट प्रदान की है।

patrika IMAGE CREDIT: Patrika

भोपाल के प्रशिक्षण संस्थान में रहे निदेशक
एमएचआरडी से इस आशय की जानकारी प्रो. अग्रवाल सहित विश्वविद्यालय प्रशासन को भी दी गई है। गौरतलब है कि प्रो. अग्रवाल पर राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान भोपाल में निदेशक रहते शासकीय धनराशि के दुरुपयोग का आरोप लगा था। प्रशिक्षण संस्थान के ही एक प्रोफेसर की ओर से टेंडर प्रक्रिया पूरी किए बिना भवन निर्माण कराने का आरोप लगाया था।

संस्थान के एक प्रोफेसर ने लगाया था आरोप
संस्थान के प्रोफेसर की शिकायत पर प्रो. अग्रवाल के खिलाफ सीबीआइ जांच कराई गई। जांच के दौरान उनके घर आठ जुलाई 2016 को सीबीआइ की रेड भी पड़ी थी। बताया जा रहा है कि दो वर्ष की जांच में कोई ऐसा तथ्य नहीं मिला, जिससे प्रो. अग्रवाल पर आरोप सिद्ध होता हो।

प्रोफेसर ने आदेश जारी होने की पुष्टि की
प्रो. विजय अग्रवाल ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से सीबीआइ की रिपोर्ट के आधार पर क्लीन चिट दिए जाने और इससे संबंधित पत्र जारी होने की पुष्टि की है। प्रोफेसर ने बताया है कि सीबीआइ से पहले ही क्लीन चिट मिल गई थी। अब मानव संसाधन मंत्रालय ने भी क्लीट चिट दे दिया है।

क्लीन चिट मिलने से प्रोफेसर को राहत
एपीएस विवि के रसायन विभाग के प्रोफेसर विजय अग्रवाल की इस मामले में सामाजिक छवि भी धूमिल हुई। उनका कहना है कि यह सब साजिशन किया गया। लेकिन पहले सीबीआई और अब एमएचआरडी से राहत मिलने के बाद उन्हें राहत मिलेगी। समाज में अब उन्हें शार्मिंदा नहीं होना पड़ेगा। पहले उन्हें सफाई देनी पड़ती थी। प्रोफेसर का कहना है कि ऐसा दूसरों के साथ नहीं होना चाहिए।