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एमपी के इस विश्वविद्यालय में तैयार किया गया आय का लेखा-जोखा, अतिथि विद्वानों के मानदेय में बढ़ोत्तरी पर संशय

उम्मीदों पर फिरने को है पानी...

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रीवा

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Ajit Shukla

Jul 26, 2018

APSU's guest faculty no option increment in pay, income is less

APSU's guest faculty no option increment in pay, income is less

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में अतिथि विद्वानों की मानदेय में बढ़ोत्तरी के मद्देनजर विभिन्न पाठ्यक्रमों से होने वाली आय का लेखा-जोखा लगभग तैयार कर लिया है। विश्वविद्यालय की ओर से तैयार रिपोर्ट के मुताबिक मानदेय में बढ़ोत्तरी के बावत विभिन्न पाठ्यक्रमों से प्राप्त होने वाली आय पर्याप्त नहीं है। आय में कम से कम दो गुना वृद्धि हो, तब जाकर सभी अतिथि विद्वानों को उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुरूप मानदेय दे पाना संभव हो पाएगा।

कार्यपरिषद के निर्देश पर तैयार हुआ लेखा-जोखा
अतिथि विद्वानों की मांग और विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद में हुए निर्णय के मद्देनजर नियमित और स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों की आय का लेखा-जोखा तैयार किया गया है। नियमित पाठ्यक्रमों की बात तो दूर स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों से होने वाली आय भी बढ़ा मानदेय देने की पर्याप्त नहीं है। स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों में नियमित पाठ्यक्रमों की तुलना में छात्रों से ली जाने वाली फीस व आय अधिक है।

विश्वविद्यालय में 52 पाठ्यक्रम संचालित हो रहे
विश्वविद्यालय अधिकारियों की माने तो सभी 52 स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों से प्रतिवर्ष प्राप्त होने वाली आय लगभग पांच करोड़ रुपए है। आय का 51 फीसदी भाग विभिन्न बाह्य मदों में चला जाता है। बचा 49 फीसदी यानी लगभग ढाई करोड़ रुपए की आय अतिथि विद्वानों के मानदेय सहित पाठ्यक्रम संचालित करने संबंधित अन्य मदों में खर्च होता रहा है। मानदेय में बढ़ोत्तरी की स्थिति में बचे ढाई करोड़ रुपए में अकेले अतिथि विद्वानों का भुगतान संभव नहीं हो सकेगा।

आमदनी में दो गुना की वृद्धि पर बढ़ोत्तरी संभव
अधिकारियों के मुताबिक मानदेय बढ़ोत्तरी तभी संभव है, जब पूर्व की तुलना में स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों से होने वाली आमदनी तीन गुना हो जाए। क्योंकि वर्तमान में एक अतिथि विद्वान को न्यूनतम 18 हजार रुपए प्रति महीने मिलते रहे हैं। लेकिन अब न्यूनतम 30 हजार रुपए देने होंगे। स्ववित्तीय पाठ्यक्रम में 98 अतिथि विद्वानों की नियुक्ति होती रही है। पहले इनके मानदेय पर करीब पौने दो करोड़ रुपए खर्च होते रहे हैं। लेकिन मानदेय के बावत उच्च शिक्षा विभाग का आदेश लागू होने पर यह खर्च साढ़े तीन करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।

स्ववित्तीय में 11 के दम पर चल रहे ५२ पाठ्यक्रम
अधिकारियों की माने तो वर्तमान में स्ववित्तीय पाठ्यक्रम के रूप में विश्वविद्यालय में करीब 52 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल 11 पाठ्यक्रमों की आय इस स्थिति में है कि उनमें पदस्थ अतिथि विद्वानों को बढ़ा मानदेय दिया जाए सके। बाकी के अन्य दूसरे पाठ्यक्रमों की स्थिति बढ़ा मानदेय दिए जाने की नहीं है। इनमें करीब एक दर्जन पाठ्यक्रम ऐसे भी हैं, जिनके अतिथि विद्वानों को वर्तमान में दिया जा रहा मानदेय भी खुद उनके दम पर दिया जाना संभव नहीं है। क्योंकि इन पाठ्यक्रमों में छात्रसंख्या इकाई के अंक तक सीमित है। दूसरे पाठ्यक्रमों से होने वाली आय से मानदेय का भुगतान होता है।

नियमित पाठ्यक्रमों की स्थिति ज्यादा खराब
स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों से इतर नियमित पाठ्यक्रमों पर गौर फरमाया जाए तो वहां की स्थिति और भी खराब है। क्योंकि विज्ञान संकाय को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर नियमित पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या इकाई के अंक तक सीमित है। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में अतिथि विद्वानों के भुगतान के बावत शासन से कोई मद प्राप्त नहीं होता है।

प्रवेशित छात्रसंख्या में बढ़ोत्तरी की उम्मीद नहीं
लेखा-जोखा का आंकलन करने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की नजर विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले छात्रसंख्या पर है। वैसे तो ज्यादातर पाठ्यक्रमों में प्रवेशित छात्रों की संख्या में इजाफा होने की संभावना नहीं है, लेकिन इसके बावजूद विश्वविद्यालय अधिकारी उम्मीद लगाए हैं कि अब की बार छात्रों की संख्या में इजाफा होगा।

फैक्ट फाइल:-
51 स्ववित्तीय पाठ्यक्रम हो रहे संचालित
98 अतिथि विद्वान स्ववित्तीय पाठ्यक्रम में
18 हजार रुपए प्रति अतिथि विद्वान मानदेय
30 हजार रुपए मानदेय करने की मांग
1.75 करोड़ रुपए मानदेय पर वार्षिक खर्च
3.5 करोड़ रुपए मानदेय बढऩे पर संभावित खर्च