रीवा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ करीब ढाई वर्ष तक चालक के रूप में सेवा दे चुके रीवा के वीरबहादुर सिंह टीवी पर निधन की खबर सुनने के बाद से आहत हैं। बीएसएफ के बतौर कमांडो अक्टूबर 2001 में पीएमओ में उनकी पदस्थापना हुई थी। अधिकांश समय प्रधानमंत्री आवास पर ही ड्यूटी देते थे। उन्होंने बताया कि नजदीकी स्टाफ से वह समय मिलने पर परिचय पूछते थे, देश के हर हिस्से की उनको जानकारी थी। जहां का स्टाफ होता था उसके क्षेत्र के लोगों को पूछते थे। बघेली, बुंदेली और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों की बोलियां ऐसे बोलते थे जैसे उसी क्षेत्र के रहने वाले हों। बघेली का प्रचलित शब्द दादू का भी अक्सर प्रयोग कर देते थे।
सिंह ने बताया कि उन्हें दिल्ली और उससे लगे क्षेत्र के भ्रमण के दौरान ले जाते थे। बाहर के अधिकांश दौरे हवाई यात्रा के होते थे, उस दौरान भी कई बार जाने का अवसर मिला। जब से उन्हें पता चला कि रीवा का रहने वाला हूं तब से वह बघेली में ही निर्देश देते थे। कभी ऐसा लगा ही नहीं कि प्रधानमंत्री के प्रोटोकाल में हूं। वह घर के मुखिया की तरह ही स्टाफ से बर्ताव करते थे।
पद की गरिमा के चलते निचले स्तर का स्टाफ बात नहीं करता था लेकिन वह अक्सर यही कहते कि घर में हो तो परिवार के सदस्य के रूप में ही सब हैं। फरवरी 2004 में दिल्ली में ही ट्रेन की चपेट में आने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुए कमांडो वीरबहादुर की जानकारी जब किसी ने वाजपेयी को दी तो उन्होंने ड्राक्टर से हालत के बारे में फोन लगाकर पूरा ब्यौरा लिया था।