Breaking news : रीवा फूड कंट्रोलर की कोरोना से मौत, अफसरों में हडकंप

विंध्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल में 23 अगस्त को कराया गया भर्ती, 16 वें दिन चली गई जान

By: Rajesh Patel

Published: 07 Sep 2020, 01:44 PM IST

रीवा. जिले में कोरोना का कहर जारी है। सोमवार की अल सुबह ही फूड कंट्रोलर राजेन्द्र ङ्क्षसह ठाकुर की संक्रमण ने जान ले ली। संजय गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। फूड पीएस ने कर्मचारियों अधिकारियों के वाट्एप ग्रुप में दिल का दौरा पडऩे से मौत होने की सूचना जारी की है। जिसे विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों में असंतोष है।

जिला फूड कंट्रोलर राजेन्द्र सिंह ठाकुर मूलरूप से मंडला के बिछिया तहसील के भुआ गांव के निवासी हैं। जिले में दो साल से पदस्थत थे। कोरोना के दौरान रीवा में खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था को लेकर कार्यालय से लेकर फील्ड में भ्रमण कर रहे थे। बीते पंद्रह अगस्त को अधिकारियों के साथ सामूहिक कार्यक्रम में शाामिल हुए। एनआइसी में मीटिंग के बाद 19 अगस्त को तबियत नासाज लगी तो जिला अस्पताल में किट से सैंपल दिए।

जांच रिपोर्ट 20 अगस्त को पॉजिटिव आई। दो दिन तक शासकीय आवास में ही आइसोलेट रहे। 23 अगस्त को जिला अस्पताल पहुंचे। इसी दिन संजय गांधी अस्पताल के लिए रेफर कर दिए गए। तब से लगातार तबियत में बिगड़ती गई। एसजीएमच में तीन बजे भोर चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इलाज के दौरान गांव से भतीजा आया। लेकिन, चिकित्सकों ने यह कहकर रेफर नहीं किया कि एबुंलेंस से बाहर ले जाने की स्थित नहीं है। कमिश्नर राजेश कुमार जैन ओर कलेक्टर इलैयाराजा टी ने एयर एंबुलेंस के लिए प्रयास किए। इसके बाद भी जबलपुर, भोपाल, दिल्ली नहीं जा सके। अंत में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

एसजीएमएच के प्रभारी अधीक्षक डॉ. नरेश बजाज के मुताबिक फूड कंट्रोलर राजेन्द्र ङ्क्षसह ठाकुर की इलाज के दौरान सोमवार की भोर 3.30 बजे मौत हो गई। फूड इंपेक्टर पॉजिटिव थे। कोविड वार्ड में मौत होने के बाद परिजनों को सूचना दी गई। परिवार के साथ कमिश्नर राजेश कुमार जैन व कलेक्टर इलैयाराजा टी देखने के लिए अस्पताल पहुंचे।

प्लाज्मा थेरेपी के बाद भी नहीं बची जान
फूड कंट्रोलर अस्पताल में आक्सीजनयुक्त बेड पर 10 दिन तक तड़पते रहे। प्लाज्मा थेरेपी के साथ कई इंजेक्शन दिए गए। यहां तक कि दिल्ली, भोपाल और जलबपुर से विशेष इंजेक्शन मंगाए गए। इसके बाद भी जान चली गई। कमिश्नर और कलेक्टर का प्रयास भी काम नहीं आ सका। अफसरों ने एयर एबुंलेस की मांग की। लेकिन, एंबुलेंस भी नहीं आ सका। इलाज के दौरान कई बार तबियत में सुधार भी हुआ।

अमेरिका से रीवा पहुंची पत्नी नीलिमा
एसजीएमएच में इलाज के दौरान फूड कंट्रोलर का भतीजा पीतांबर ठाकुर भर्ती होने के दूसरे दिन रीवा पहुंचे। कुछ दिन बाद बेटी रूपांजलि ठाकुर भी भोपाल से रीवा आ गईं। पत्नी नीलिमा ठाकुर बड़ी बेटी के घर अमेरिका में थी। पत्नी अमेरिका में मार्च से बेटी के घर गई थीं। कोरोना के कारण लॉकडाउन में फंसी रही। सूचना मिलने पर जैसे-जैसे भोपाल रीवा पहुंची। वार्ड में मिलने नहीं दिया गया। पत्नी भी वीडियो कालिंग के जरिए देख सकीं थीं। निधन की सूचना के बाद मंडला से ***** नन्हें और भांजा भी आ गया।

व्यस्तता के चलते घर में रखे थे पुजारी
---फूड कंट्रोलर की धर्म आध्यात्म में भी बड़ी रूचि रहती थी। कंट्रोलर हर पूर्णिमा समेत तिथि त्योहार पर प्रयागराज गंगा स्नान के लिए जाते थे। घर में सुबह और शाम चार घंटे भगवान शिव की पूजा अर्चना करते थे। नौकरी में व्यवस्ता के चलते वह शिवभगवान की पूजा के लिए एक पुजारी घर पर रखे हुए थे। सुबह से ही शाम तक दोनों पहर में घर में स्थित मंदिर में पूजा अर्चना पुजारी करते रहे।

वीडियो कॉलिंग के जरिए बड़ी बेटी को कराया दर्शन
फूड कंट्रोलर की बेटी अमेरिका से नहीं आ सकीं। परिजनों ने अधिकारियों से मिन्नत कर वीडियो कॉलिंग के जरिए बड़ी बेटी को शव का दर्शन कराया गया। फूड कंट्रोलर की दो बेटियां हैं। बेटे नहीं हैं। कंट्रोलर के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है।

आवास पर पहुंचे कई अधिकारी
अस्पताल में फूड कंट्रोलर के निधन की सूचना के बाद बोदाबाग स्थित आफिसर कॉलोनी में रहने वाले संयुक्त कलेक्टर झा, डिप्टी कलेक्टर राहुल नायक, उप संचालक सतीश निगम, एसडीएम हुजूर फरहीर खान, जेएसओ राजेश पटेल, आदित्य दाहिया, एससी सिंह, प्रदीप पांडेय, संजय यादव आदि अधिकारी कर्मचारी सहित सेल्समैन राजकुमार व कई अन्य सेल्समैन भी पहुंचे।

पीएस के मैसेज से कर्मचारियों में अंसंतोष
फूड कंट्रोलर की कोरोना से मौत होने के बाद पीएस फूड ने कर्मचारियों व अधिकारियों के ग्रुप में एक मैसेज शेयर किया है। जिसमें गहरा दुख व्यक्त करने के साथ ही उन्होनें लिखा है कि दिल का दौरा पडऩे से फूड कंट्रोलर की मौत हो गई। इधर, कोरोना प्रोट्रोकाल के तहत अंतिम संस्कार कर दिया गया। कर्मचारियों ने कहा कि यदि रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी तो शव परिजनों को क्यों नहीं दिया गया।

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