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इंदिरा गांधी ने कांग्रेस नेता श्रीनिवास तिवारी को कहा था रियल टाइगर, अटल जी ने ‘शेर’ कहकर बोला था हमला

राजनीतिक कौशल, कार्यशैली और तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले श्रीनिवास तिवारी की तरह शायद ही किसी नेता को इतनी संज्ञाएं दी गईं हों

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shri niwas tiwari

रीवा. विंध्य को देश के राजनीतिक नक्शे में नई पहचान दिलाने वाले दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी अब नहीं रहे। 93 वर्षीय तिवारी को तीन दिन पहले उपचार के लिए दिल्ली ले जाया गया था। शुक्रवार शाम 4 बजे एस्कार्ट हॉस्पिटल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार को दोपहर 2 बजे दिल्ली से विशेष विमान से उनका पाॢथव शरीर सतना पहुंचा, जहां विंध्य सहित प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अंतिम दर्शन के लिए जुटे हैं। सतना से बेला होते हुए पाॢथव शरीर रात 8 बजे तक रीवा के अमहिया स्थित घर पहुंचेगा। 21 जनवरी को अंतिम यात्रा अमहिया से गृहग्राम तिवनी के लिए रवाना होगी, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह सहित कांग्रेस, भाजपा के कई बड़े शामिल होंगे।

चर्चित रहा सियासी सफर
विंध्य के दिग्गज नेता रहे तिवारी का सात दशक तक का सियासी सफर चर्चित रहा। उनके राजनीतिक कौशल, कार्यशैली और तेवरों के कारण कई संज्ञाएं दी गईं। सफेद शेर, विधान पुरुष, विंध्य पुरुष, दादा, श्रीयुत आदि। देश की प्रधानमंत्री रही इंदिरागांधी ने श्रीनिवास तिवारी को रियल टाइगर कहा था। यूपी के चंदोली में 1973 में पूर्व प्रधानमंत्री की सभा, जिसमें शामिल होने श्रीनिवास तिवारी भी पहुंचे थे। सभा के दौरान ही तिवारी ने कांग्रेस ज्वाइन की थी। इंदिरागांधी ने तिवारी को रियल टाइगर बताया था। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह तिवारी को हर दम सार्वजनिक मंचों से गुरुदेव कहकर संबोधन देते रहे हैं। दोनों के बीच अच्छे संबंध रहे हैं, १७ सितंबर को जन्मदिन की शुभकामना देने वह अक्सर रीवा आते रहे हैं। गत साल भी जन्मदिन पर दिग्विजय सिंह रीवा आए थे।

अटल ने कहा था ‘शेर’
चर्चित घटनाओं में से एक 2003 में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान की है। रीवा आए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने श्रीनिवास तिवारी का उल्लेख अपने भाषण में किया था। वाजपेयी की सभा में पहुंचने के रास्ते तिवारी के समर्थकों ने जाम कर दिए थे। उसी सभा में वाजपेयी ने सफेद शेर कहकर तिवारी पर कटाक्ष किया था।

सदन में लगातार सात घंटे दिया था भाषण
गहन संसदीय ज्ञान, सदन पर पकड़, कानून की जानकारी और लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण ही उन्हें विधान पुरुष माना गया। अविभाजित मप्र और उसके बाद भी उन्होंने पृथक विंध्य की वकालत की। वह यादगार दिन था जब विंध्य प्रदेश का विलय कर मप्र बनाया जाना था। उसकी पूर्व संध्या पर हुई बहस में सदन में लगातार 5 घंटे तक पृथक विंध्य प्रदेश के पक्ष में भाषण देकर सदस्यों को स्तब्ध कर दिया था। सदन मौन रहकर उनकी बात सुनता रहा। इसी तरह जमींदारी प्रथा के खिलाफ भी 7 घंटे भाषण दिया।

मिलने का अलग था अंदाज
हर नेता का संवाद का अपना अलग तरीका होता है। तिवारी भी कार्यकर्ताओं से अपने तरीके से ही मिलते थे। विधानसभा अध्यक्ष कार्यकाल के बाद वह नियमित रूप से कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने के लिए तख्ते पर बैठते थे और बातें सुनते थे। इस पर विरोधी नेता भी चर्चा करते थे।

दिनचर्या का फिक्स था टाइम
हर पल साथ रहने वाले धीरेन्द्र तिवारी ने बताया कि सुबह पांच बजे वह उठते थे, फ्रेश होने के बाद योगा करते थे, फिर अखबार पढ़ते थे। इसके बाद लोगों से मिलने के बाद स्नान और पूजा करते थे। भोजन के बाद करीब दो घंटे के आराम के बाद सायं फिर बाहर आकर लोगों से मिलते थे।

ये घटनाक्रम बताते हैं शख्सियत
-चुनाव नहीं लडऩे की उम्र में चुनाव लड़े और जीता, मामला हाई कोर्ट पहुंचा जहां कुंडली लगाकर उम्र साबित की।
पहले चुनाव में विंध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष यादवेन्द्र सिंह से लड़े, वह जीतते तो सीएम होते। उन्हीं से राजनीतिक सीख चुनाव के समय भी लेते रहे।
-स्वास्थ्य मंत्री रहते शिक्षा विभाग की फाइल में हस्ताक्षर कर दिया। सवाल उठा तो बोले कैबिनेट मंत्री की शपथ ली है, किसी एक विभाग की नहीं।
-मुख्यमंत्री रहे अर्जुन सिंह के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि वह भी मंत्री की तरह विधायक हैं, सब कुछ नहीं हो सकते।
-विधानसभा अध्यक्ष रहते कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी भी रहे, कहा कि पार्टी की वजह से विधायक बना और विधानसभा अध्यक्ष। ऐसा करने वाले इकलौता विधानसभा अध्यक्ष रहे।
-देश में पहली बार विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री प्रहर कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें सीएम को अनिवार्यरूप से जवाब देना होता था।
-दस वर्ष के विधानसभा अध्यक्ष कार्यकाल में विधायक डॉ. सुनीलम के अलावा किसी पर मार्शल का उपयोग नहीं किया।