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Tourism Palace: देवतालाब बनेगा बड़ा धार्मिक पर्यटन स्थल, इस मंदिर के नीचे है चमत्कारी मणि

deotalab shiv temple tourism palace of rewa. रीवा का देवतालाब शिव मंदिर क्षेत्र बनेगा बड़ा पर्यटन स्थल....। कई सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी...।

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रीवा

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Manish Geete

Apr 28, 2023

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deotalab shiv temple tourism palace of rewa. देवतालाब के प्राचीन शिव मंदिर के बारे में कहा जाता है कि एक ही रात में भगवान विश्वकर्मा ने इस मंदिर का निर्माण किया था। लेकिन, कोई यह नहीं दख पाया कि निर्माण कैसे हुआ था। पूर्वजों के मुताबिक इस मंदिर में अलौकिक शिवलिंग स्थापित है और यह इसलिए रहस्यमयी है जो दिन में चार बार रंग बदलता है।

मंदिर के बारे में यह भी किंवदंती है कि शिव के परम भक्त महर्षि मार्कंडेय देवतालाब में शिव के दर्शन के हठ में आराधना में लीन हुए थे। महर्षि को दर्शन देने के लिए यहां पर मंदिर बनाने के लिए भगवान विश्वकर्मा को आदेश मिला था। इसके बाद एक ही रात में यहां विशाल शिव मंदिर बना दिया गया। शिवलिंग की भी स्थापना हुई।

क्या मंदिर में है चमत्कारिक मणि

मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर के नीचे दूसरा मंदिर भी है, जिसमें चमत्कारिक मणि मौजूद है। कई सालों पहले इस मंदिर के तहखाने से लगातार सां और बिच्छु बाहर निकल रहे थे, लिहाजा इसके दरवाजे बंद कर दिए गए। कहा जाता है कि उस समय एक राजा ने मंदिर को गिराने की साजिश रची, पूरा राजवंस इस जीन में दबकर खत्म हो गया। इस शिवलिंग के अलावा रीवा रियासत के महाराजा ने यहीं पर चार अन्य मंदिरों का भी निर्माण कराया था। क्षेत्र के लोग इस मंदिर के दर्शन करने को ही चार धाम का पुण्य बताते हैं।

अब यहां बनेगा बड़ा पर्यटन स्थल

मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा शिव नगरी देवतालाब के प्राचीन शिव मंदिर के संपूर्ण परिसर का 2.40 करोड़ रुपए की लागत से सौंदर्यीकरण व विस्तारीकरण कराया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम एवं मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष विनोद गोंटिया ने प्रस्तावित सौंदर्यीकरण एवं विकास निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। विधानसभा अध्यक्ष गौतम ने कहा कि प्राचीन शिवमंदिर का पौराणिक एवं ऐतिहासिक इतिहास है। इसके प्रति लोगों की अपार आस्था है। मंदिर परिसर के विस्तारीकरण व सौन्दर्यीकरण से आगंतुकों को सुविधा होगी और वह बिना किसी परेशानी के भगवान आशुतोष के दर्शन कर पाएंगे। उन्होंने मंदिर परिसर में बड़े मंच बनाए जाने की बात कही ताकि वहां धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन हो सके।