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वेतन जारी करने में भेदभाव, अध्यापक बोले-सौतेले व्यवहार से दिलाएं मुक्ति

अध्यापकों ने इसके अलावा दूसरी मनमानी से भी अधिकारी को अवगत कराया

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रीवा. विद्यालय के शिक्षकों को महीने की शुरुआत में ही वेतन मिल जाता है लेकिन अध्यापकों को महीने के अंत में वेतन नसीब होता है। कभी तो पूरा एक महीना बीत जाता है। यह स्थिति प्राचार्य के सौतेले व्यवहार का नतीजा है। इस व्यवहार से साहब मुक्ति दिलाएं।जिला शिक्षा अधिकारी की चौखट पर पहुंचे हिनौती संकुल के अध्यापकों ने शिक्षा अधिकारी से ऐसी ही गुजारिश की।

अध्यापक व सहायक अध्यापकों ने डीइओ अंजनी कुमार त्रिपाठी से लिखित रूप से प्राचार्य के सौतेलेपन की शिकायत की। अध्यापकों ने कहा कि यह जानबूझ कर किया जाता है। अध्यापकों ने इसके अलावा उनके साथ की जा रही दूसरी मनमानी से भी अधिकारी को अवगत कराया।

एरियर भी नहीं दिया जा रहा है

अध्यापकों के मुताबिक शासन की ओर से समय-समय पर मिलने वाले डीए का एरियर भी उन्हें नहीं दिया जा रहा है। छठवें वेतनमान के संशोधित वेतन पर वेतन का निर्धारण नहीं किया गया है। सेवा पुस्तिका में भी वेतन संबंधित कोई प्रविष्टि नहीं की गई है। दूसरे संकुलों के अध्यापकों की तुलना में हिनौती संकुल के अध्यापकों के वेतन में भी भारी अंतर है। दूसरे संकुलों में अध्यापकों को अंतरित राहत एक हजार रुपए दिया जा रहा है। जबकि हिनौती संकुल के सहायक अध्यापकों को महज एक सौ रुपए का अंतरिम राहत दी जा रही है।

डीइओ के आदेश का नहीं हुआ असर

अध्यापकों को शिक्षकों के साथ वेतन नहीं प्राप्त होता है। शिक्षक महीने की शुरुआत में वेतन पा जाते हैं लेकिन अध्यापकों ने महीने के अंत में वेतन नसीब होता है। प्राचार्यों के इस मनमानी की शिकायत पूर्व में शासन स्तर पर भी की गई है।आयुक्त के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने प्राचार्यों को अध्यापकों का वेतन सही समय पर देने का निर्देश दिया। लेकिन डीईओ के आदेश का प्राचार्यों पर कोई असर नहीं हुआ। प्राचार्यों की मनमानी अब भी जारी है।