
Doctor's brain then heart of the nurse hospital
रीवा। नोबल नर्सिंग सेवा की शुरुआत करने वाली फ्लोरेंस नाइट एंगल के जन्म दिवस 12 मई को अंतराष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है। इस बार की थीम 'नर्स प्रेरक, प्रभावक और आविष्कारकÓ है। अपने गमों को छुपाकर दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए नर्स का योगदान सर्वोपरि है। अगर डॉक्टर अस्पताल का दिमाग है तो नर्स दिल। पेश है इस मौके पर क्रिटिकल मरीजों की बीच सेवा देने वाली नर्सों की कहानी...।
ब्लड देकर बचाई थी जिंदगी
संजय गांधी अस्पताल के अस्थि रोग विभाग में सेवाएं दे रहीं नर्सिंग सिस्टर पुष्पलता पटेल, जिनकी सेवाएं महज सात साल और शेष हैं। इन्होंने हमेशा गंभीर मरीजों के बीच सेवाएं देकर एक मुकाम बनाया है। डॉक्टर हों या अन्य पैरामेडिकल स्टॉफ उनके अनुभवों का लाभ जटिल समस्या के दौरान लेता है। मूलरूप से रीवा की रहने वाली पटेल ने नर्सिंग जीवन की शुरुआत वर्ष 1978 से की। जीएमएच के नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थान से ट्रेनिंग लेने के बाद 25 सितंबर 1982 को जीएमएच में स्टॉफ नर्स के रूप में ड्यूटी शुरू की। सर्जरी, मेडिसिन, नेत्र रोग विभाग, गंभीर रोगी वार्ड और आइसीयू जैसे वार्डों में गंभीर मरीजों को सेवाएं दी। वह कहती हैं कि किसी की जिंदगी बचाने के लिए कई बार अपने परिवार की खुशियों में शरीक नहीं हो पाते हैं, लेकिन मरीज की जिंदगी बच जाती है तो उससे ज्यादा खुशी और कोई नहीं होती। एक लम्हा याद करते हुए बताया कि एक बच्ची और उसके बब्बा आइसीयू में थे। ऑपरेशन होना था लेकिन कोई भी परिजन ब्लड देने नहीं आया था। ऐसे में डॉक्टर परेशान थे, तब ब्लड दिया था। दोनों की जिंदगी बची। जब भी मिलते हैं तो देखकर मुस्कुरा उठते हैं।
व्यवहार से पाया मरीजों से सम्मान
संजय गांधी अस्पताल में स्टॉफ नर्स पार्वती अग्रवाल को इस बात का मलाल जरूर है कि उन्हें उनकी सेवाओं का सम्मान पदोन्नति नहीं मिली लेकिन वे खुद को तब गौरवान्वित महसूस करती हैं जब मरीज उनकी सेवाओं से खुश होकर उन्हें दीदी कह कर बुलाते हैं। पार्वती अग्रवाल ने 1976 में नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थान रीवा से ट्रेनिंग लेने के बाद टीकमगढ़ पीएचसी से नर्सिंग सेवाएं शुरू की थी। 1984 में वह श्यामशाह मेडिकल कॉलेज में ज्वाइन किया। तब से मेजर ओटी, ऑपरेशन वार्डों में ड्यूटी देती रहीं। वर्तमान में आइसीयू सेवा संभाल रहीं हैं। वह कहती हैं कि जीवन में कभी निराशा महसूस नहीं की। मरीजों की सेवा को अपना कर्तव्य माना। गरीब हो या अमीर मरीज, सभी को एक भाव से देखते हैं। अस्पताल की नौकरी के बीच परिवारिक जीवन से संतुलन बनाकर रखा। नर्स होने पर गर्व करती हूं। मृदु व्यवहार ही मेरी सेवा है।
आज की नर्सों में सेवाभाव की कमी
दोनों वरिष्ठ नर्सों ने आज के दौर की नर्सिंग सेवा पर कहा कि आज सेवाभाव की कमी है, सिर्फ नौकरी हो रही है। निजी कॉलेजों में अच्छी ट्रेनिंग नहीं दी जा रही है। नई नर्सें आने के बाद जेल्को लगाना सीख रही हैं। कार्य करने की क्षमता का अभाव है। मरीजों के दर्द को समझने के लिए संवेदनशीलता जरूरी है। समय की पाबंदी नही हैं। व्यवहार ठीक नहीं है। जरा-जरा सी बात पर नाराजगी जाहिर करती हैं। इन कमियों को दूर करना होगा। प्रशिक्षण संस्थानों को भी व्यवहारिक ज्ञान देना पड़ेगा। वरिष्ठ नर्सों ने कहा कि भावी पीढ़ी को यही संदेश है कि नर्सिंग सेवा को गंभीरता से लें। यहां सम्मान भी और आत्म संतुष्ठि के मौके भी बहुत हैं।
बीएससी नर्सिंग की दरकार
वरिष्ठ नर्सो ने कहा कि वह बीएससी नर्सिंग की कमी महसूस करते हैं। विंध्य क्षेत्र में बीएससी नर्सिंग का कोई सरकारी संस्थान नही है। जिससे गुणवत्तायुक्त नर्सिंग ट्रेनिंग नहीं मिल पा रही है। निजी संस्थाओं के पास अपने अस्पताल नहीं है। दो-तीन महीने की ट्रेनिंग से नर्से आज के अत्याधुनिक मेडिकल साइंस को नहीं समझ सकती हैं। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज से प्रस्ताव भेजा गया था। अगर सरकार इस पर गौर करे तो नर्सिंग के क्षेत्र में विंध्य के शहरों को दूसरे बड़े शहरों की ओर नहीं देखना पड़ेगा।
Published on:
12 May 2018 01:19 pm
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