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ईको सेंसेटिव जोन में स्थापित नहीं होंगे वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग व बड़ी बिजली परियोजनाएं, जानिए क्यों

विंध्य में प्रस्तावित ईको सेंसटिव जोन का ब्लू प्रिंट जल्द ही तैयार हो जाएगा। ईको जोन में जल, ध्वनि तथा वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग एवं बड़ी बिजली परियोजनाएं नहीं बनेगी

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रीवा

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Rajesh Patel

Feb 20, 2020

eco-sensitive zone Air pollution industries and big power projects

eco-sensitive zone Air pollution industries and big power projects

रीवा. विंध्य में प्रस्तावित ईको सेंसटिव जोन का ब्लू प्रिंट जल्द ही तैयार हो जाएगा। ईको जोन में जल, ध्वनि तथा वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग एवं बड़ी बिजली परियोजनाएं नहीं बनेगी। ईको सेंसटिव जोन में परंपरागत पशुपालन, जैविक खेती, औषधीय पौधों की खेती तथा पर्यावरण एवं जल संरक्षण के कार्य को प्राथमिकता दी जाएगी। विंध्य में स्थित सोन, केन, बेतवा आदि नदियों के आस-पास सवा किमी एरिया में बड़े कंस्ट्रक्शन पर प्रतिबंध रहेगा। निर्माण कराने के लिए अनुमति लेने पड़ेगी।


सेंसटिव जोन में जीवों का होगा संरक्षण
कमिश्नर डॉ. अशोक कुमार भार्गव ने ईको सेंसटिव जोन में प्रस्तावित कार्य योजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ईको सेंसटिव जोन में पर्यावरण संरक्षण नियमों का पालन करते हुए विकास के कार्य कराएं। पर्यावरण तथा वन्य जीवों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी मांग है। पर्यावरण सुरक्षित नहीं रहा तो मानव जीवन में भी सुरक्षित नहीं रहेगा। हमें विकास के साथ प्रकृति से अपने संबंधों की मिठास को कायम रखना है। ईको सेंसटिव जोन के क्षेत्र का सीमांकन करके तथा नक्शे बनाकर उसकी जानकारी सभी को दें।

पंचायत स्तर पर जनता को किया जाएगा जागरुक
कमिश्नर ने कहा कि जनता को ईको सेंसटिव जोन के प्रति जागरूक करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें। बैठक में कमिश्नर ने कहा कि नदियों, वन्य जीवों, वनों को संरक्षित रखते हुए विकास की कार्य योजना तैयार करें। ईको सेंसटिव जोन में जल, ध्वनि तथा वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग एवं बड़ी बिजली परियोजनाएं नहीं बनेगी।

सेंसटिव जोन में जैविक-औषधीय खेती को मिलेगा बढ़ावा
इस क्षेत्र में परंपरागत पशुपालन, जैविक खेती, औषधीय पौधों की खेती तथा पर्यावरण एवं जल संरक्षण के कार्य को प्राथमिकता दिया जाएगा। विभिन्न विभागों के मैदानी कर्मचारी को ईको सेंसटिव जोन के संबंध में जानकारी दें। आगामी बैठक में ग्रामीण विकास, पशुपालन, लोक निर्माण, आजीविका मिशन, राजस्व, वन विभाग के अधिकारियों को भी शामिल करें। ईको सेंसटिव जोन में पर्यटन के विकास के लिए भी आवश्यक प्रबंध करें। पर्यटन सुविधाओं के विकास कार्यों के संबंध में पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखें।

कलेक्टर्स ने किया मंथन
बैठक में क्षेत्र संचालक संजय राष्ट्रीय उद्यान अशोक मिश्रा ने ईको सेंसटिव जोन की अवधारणा, उसके क्षेत्र तथा उसमें किये जाने वाले विकास कार्यों एवं प्रतिबंधित गतिविधियों की जानकारी दी। बैठक में रेत तथा अन्य खनिज पदार्थों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया। बैठक में कलेक्टर सतना सत्येन्द्र सिंह, कलेक्टर रीवा बसंत कुर्रे, कलेक्टर सीधी रविन्द्र चौधरी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सिंगरौली ऋतुराज, अपर कलेक्टर शहडोल अशोक ओहरी, उपायुक्त राजस्व केपी पाण्डेय, उप संचालक संजय राष्ट्रीय उद्यान अशोक कुमार तथा पर्यावरण, नगर निवेश, पर्यटन एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।