24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भीषण गर्मी में वाटरफाल का आनंद लेना चाहते हैं तो इसे जरूर पढि़ए, अन्यथा पहुंच पाना होगा मुश्किल

दफ्तर में बैठकर बनाया प्रोजेक्ट, टीएचपी की आपत्ति के बाद निरस्त करने की तैयारी, वन विभाग को इको-टूरिज्म में सिरमौर में पर्यटन स्थल विकसित करने दिए थे 72 लाख

3 min read
Google source verification

रीवा

image

Mrigendra Singh

May 31, 2018

rewa

eco tourism rewa madhyapradesh, tons waterfall thp sirmaur

रीवा। वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते इको-टूरिज्म का प्रोजेक्ट अटक गया है। इसमें विभाग के अफसरों ने मौके का मुआयना किए बिना ही विकास का प्रारूप तय कर दिया था। शासन से स्वीकृति भी आ गई। अब निर्माण प्रारंभ करने का समय आया तो सुरक्षा और तकनीकी पेंच ने प्रोजेक्ट को अटका दिया है। विभाग के तमाम अफसर अब सक्रिय हुए हैं और मौके का भ्रमण प्रारंभ कर दिया है।
सिरमौर के नजदीक टोंस वाटर फाल, घिनौची धाम और आल्हाघाट के प्रति पर्यटकों का आकर्षण बढ़ाने के लिए सरकार ने इको टूरिज्म स्थल घोषित करने का नोटिफिकेशन जारी किया था। डीएफओ सहित विभाग का कोई भी बड़ा अधिकारी मौके पर हालात देखने नहीं गया। स्थानीय स्तर पर सर्वेश सोनी नाम के युवक ने भी उक्त स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की मांग उठाई थी। इस पर तकनीकी परीक्षण किए बिना ही कार्यालय में बैठकर पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली गई।

टीएचपी ने सुरक्षा का हवाला देकर जताई आपत्ति
टोंस हाइडल प्रोजेक्ट(टीएचपी) सिरमौर के नजदीक ही टोंस वाटर फाल है। यहां तक पहुंचने के लिए टीएचपी परिसर से ही सड़क बनानी है। बीते १५ मई को डीएफओ रीवा ने पत्र टीएचपी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता को लिखा था। जिसमें टीएचपी परिसर से टोंस वाटर फाल तक सड़क बनाने की अनुमति मांगी थी। मामले में टीएचपी ने परिसर के भीतर तरह-तरह के पर्यटकों की उपस्थित के दौरान सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र देने से इंकार कर दिया है।

पहले नहीं की चर्चा
वन विभाग के अधिकारी प्रोजेक्ट तैयार करते समय टीएचपी प्रबंधन के संपर्क में किसी तरह से नहीं आए। चारों ओर वनभूमि होने की वजह से इन्हें किसी तरह की रुकावट की आशंका नहीं थी। जब तकनीकी पेंच उलझा तो मुख्यालय ने भी जवाब मांग लिया है। डीएफओ सहित कई अधिकारी महीने भर के भीतर कई बार दौरा कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि पूर्व में समन्वय बनाकर कार्य किया जाता तो वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा सकती थी।

72 लाख का स्वीकृत हुआ है प्रोजेक्ट
रीवा जिले के टोंस वाटरफाल और पावन घिनौची धाम को मनोरंजन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए शासन ने 72 लाख रुपए की स्वीकृति दी है। इसमें टोंस वाटरफाल को 36.50 लाख और घिनौची धाम को 35.50 लाख रुपए का प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। 40 फीसदी राशि भी वन विभाग को आवंटित कर दी गई है। घिनौची धाम में तो कार्य चल रहा है लेकिन टोंस वाटरफाल में अब तक कार्य की शुरुआत ही नहीं हो पाई है।
यहां पर फेसिंग एवं रेलिंग के लिए 15 लाख, मुख्य गेट एक लाख, पैगोड़ा 4.50 लाख, पार्किंग स्थल दो लाख, पेयजल व्यवस्था चार लाख, प्रशाधन सुविधा पांच लाख, प्रकृति पथ एक लाख, सिटआउट दो लाख, पौधरोपण एवं अन्य में दो लाख रुपए खर्च करने का प्रावधान है।

MrigendraSingh IMAGE CREDIT: Patrika

अफसरों की लापरवाही से दूसरे प्रोजेक्ट की राह मुश्किल
इको टूरिज्म बोर्ड ने विंध्य क्षेत्र में सबसे अधिक निवेश करने की योजना बनाई थी। बोर्ड के सीइओ ने कई स्थानों का भ्रमण कर अधिकारियों से कार्ययोजना तैयार करने के लिए कहा था। पहले प्रोजेक्ट में ही बड़ी लापरवाही सामने आई है जिसके चलते अन्य जिन स्थानों के विकास के लिए राशि मिलनी थी उनकी राह मुश्किल हो सकती है। टोंस वाटर फाल मामले की जानकारी मिलने पर बोर्ड सीईओ ने नाराजगी भी अफसरों से जाहिर की है।