
full responsible government in rewa state, 16 October 1945
मृगेन्द्र सिंह,रीवा। आजादी के लिए जिस समय अंग्रेजों से पूरे देश में युद्ध चल रहे थे। उस समय यह तय नहीं था कि देश कब आजाद होगा। रीवा राज्य के तत्कालीन महाराजा गुलाब सिंह जूदेव ने राज्य में उत्तरदायी शासन प्रणाली की घोषणा कर पूरे देश का ध्यान खींचा था। राज्य के सरकार की कमान जनता द्वारा चुनी गई सरकार को सौंपे जाने की घोषणा की थी।
उन दिनों रीवा का दशहरा बड़े भव्यता के साथ आयोजित किया जाता था। जिसमें राज्य के हर हिस्से के लोग शामिल होने के लिए आते थे। महाराजा गुलाब सिंह ने 16 अक्टूबर 1945 को दशहरे के दिन किले की प्राचीर से राज्य के लिए बड़ी घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि रीवा राज्य में पूर्ण उत्तरदायी सरकार व्यवस्था लागू होगी। जिसमें रीवा की जनता के बीच से ही चुना हुआ व्यक्ति यहां की सरकार चलाएगा। उस दौरान राजाज्ञा ही कानून व्यवस्था बनती थी। राजा का बोला गया शब्द ही पूरा आदेश होता था।
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इतिहासकार असद खान बताते हैं कि महाराजा गुलाब सिंह ने दशहरे के दिन यह बड़ी घोषणा करने के बाद से ही खुद को साधारण मानव की तरह बना लिया था। राजसी पोशाक और अन्य बड़ी सुविधाओं का त्याग कर दिया था। उनकी इस घोषणा से कुछ लोग नाखुश भी थे। अंग्रेज भी उनके खिलाफ लगातार साजिश करते रहते थे। इसी के कारण वह मुंबई चले गए थे। महाराजा गुलाब सिंह ने मध्यभारत की सबसे बड़ी रियासत का शासक होने के बावजूद आत्मनिर्भरता का संदेश देने के लिए खुद से हल चलाया था और लोगों से कहा था कि स्वयं का काम सभी करें। खादी और स्थानीय स्तर पर बनाए जाने वाले हथकरघा के कपड़े वह पहनने लगे थे।
नेहरू ने कहा था इसके परिणाम दूरगामी होंगे
महाराजा गुलाब सिंह द्वारा रीवा राज्य में उत्तरदायी शासन प्रणाली की घोषणा किए जाने के बाद पूरे देश में नई बहस शुरू हो गई थी। उन दिनों लोकतांत्रिक व्यवस्था की मांग कर रहे कांग्रेस के बड़े नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल सहित अन्य ने इस निर्णय पर बधाई दी थी। इतिहासकार अखिलेश शुक्ला ने बताया कि पंडित नेहरू ने अपने संदेश में कहा था कि यह दूरगामी महत्व की घोषणा है। अन्य रियासतों के लिए उदाहरण है। महाराजा ने कहा था रीवा रिमहों का है, इसलिए यहां शासन रिमहों के लिए रिमहों द्वारा ही किया जाएगा। उनके बाद 31 जनवरी 1946 को युवराज मार्तण्ड सिंह को गद्दी पर बैठाया गया और कुछ दिन बाद छह फरवरी को उनका राज्याभिषेक हुआ।
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जनता को ताकत देकर आजादी का एहसास कराना चाहते थे
उत्तरदायी शासन की घोषणा महाराजा द्वारा किए जाने के बाद उनके कई करीबियों और इलाकेदारों ने इसकी वजह जानने का भी प्रयास किया था। जानकार बताते हैं कि उस दौरान महाराजा ने कहा था कि जब तक जनता को आजादी का एहसास नहीं कराया जाएगा तब तक वह अंग्रेजों के सामने भी मानसिक गुलामी में रहेगी। रीवा राज्य का शासन यहां की जनता को इसीलिए सौंपा जा रहा है।
Updated on:
07 Aug 2022 08:55 am
Published on:
07 Aug 2022 08:48 am
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