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एमपी के इस विश्वविद्यालय में योग्यता के अनुरूप दूसरे पाठ्यक्रमों में भी पढ़ा सकेंगे अतिथि विद्वान

आय बढ़ाने की योजना...

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रीवा

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Ajit Shukla

Aug 28, 2018

Growth in income of guest faculty in Rewa APSU, government sanction

Growth in income of guest faculty in Rewa APSU, government sanction

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन अतिथि विद्वानों के मानदेय में बढ़ोत्तरी के लिए भले ही तैयार नहीं है लेकिन उनकी आय में बढ़ोत्तरी का एक रास्ता निकाल लिया है। अधिकारियों की ओर से लिए निर्णय के मुताबिक योग्यताधारी अतिथि विद्वान निर्धारित न्यूनतम कक्षा के अलावा एक अतिरिक्त क्लास ले सकेंगे। इस तरह से संबंधित अतिथि विद्वानों की आय में हर रोज एक कक्षा का मानदेय बढ़ जाएगा।

अतिथि विद्वानों को हर रोज पढ़ाने को मिलेगा अतिरिक्त पीरियड
विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में अतिथि विद्वानों की जरूरत के मद्देनजर अधिकारियों ने निर्णय लिया है कि अतिथि विद्वान दूसरे पाठ्यक्रमों से संबंधित पात्रता रखते हैं तो उन्हें एक कक्षा (पीरियड यानी कालखंड) हर रोज दिया जा सकता है। अतिरिक्त पाठ्यक्रम में दी जाने वाली यह एक कक्षा उनके मूल पाठ्यक्रम में निर्धारित न्यूनतम कक्षा से अतिरिक्त होगी। इस तरह से अतिथि विद्वानों को एक कक्षा के लिए निर्धारित २७५ रुपए का मानदेय हर रोज अलग से प्राप्त हो सकेगा।

विभागों में खाली पदों के मद्देनजर निर्णय
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह निर्णय विभिन्न विभागों में रिक्त पदों के मद्देनजर लिया गया है। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में नई नियुक्ति होने तक गत वर्ष नियुक्त अतिथि विद्वानों से ही अध्यापन कार्य कराया जा रहा है। नियुक्ति संबंधित आगामी निर्णय होने तक पूर्व में नियुक्त अतिथि विद्वान अध्यापन कार्य संभालते रहेंगे।

पखवाड़ा बीता, नहीं मिला लीगल ओपेनियन
विश्वविद्यालय समन्वय समिति से मिले निर्देशों के मद्देनजर अतिथि विद्वानों की नए सिरे से नियुक्ति के बावत विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लीगल ओपेनियन मांगा है। यह बात और है कि एक पखवाड़ा बीत जाने के बावजूद अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन को लीगल ओपेनियन नहीं मिली है। नतीजा अतिथि विद्वानों की नियुक्ति संबंधित निर्णय अधर में लटका हुआ है।

आंदोलन के बाद भी नहीं बढ़ा मानेदय
पूर्व में अतिथि विद्वानों ने शासकीय महाविद्यालयों की तरह विश्वविद्यालय में भी न्यूनतम मानदेय 30 हजार रुपए करने की मांग की थी। इसके लिए उनकी की ओर से कई दिन प्रशासनिक भवन में धरना प्रदर्शन भी किया गया लेकिन अभी तक नतीजा सिफर रहा है।

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