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मध्याह्न भोजन में 26 के बजाय कर दिया 28 करोड़ रुपए का भुगतान, जानिए, फिर क्या हुआ

वित्तीय वर्ष 2015-16 में भोजन पकाने के दौरान बच्चों की वास्तविक संख्या के आधार पर नहीं किया गया भुगतान

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रीवा

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Rajesh Patel

Jul 22, 2018

In the mdm, instead of 26, the payment of 28 crores was made

In the mdm, instead of 26, the payment of 28 crores was made

रीवा. मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी लंबे समय से चल रही है। जिले में छह साल के भीतर मध्याह्न भोजन के बजट में अलग-अलग मद में व्यय किए गए करीब ३४ करोड़ रुपए के हिसाब में अनियिमितता सामने आयी है। वित्तीय वर्ष २०१०-११ से लेकर वर्ष २०१५-१६ के भुगतान में महालेखाकार ग्वालियर की ऑडिट टीम ने आपत्ति लगा दी है। अब हिसाब देने में विभागीय अधिकारियों का पसीना छूट रहा है।
महालेखाकार ग्वालियर की आडिट आपत्ति रिपोर्ट में खुलासा
महालेखाकार ग्वालियर की ऑडिट टीम की आपत्ति रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष २०१५-१६ में मध्याह्न भोजन का भुगतान बच्चों की संख्या के अधार पर नहीं किया गया है। ऑडिट टीम ने कहा है कि तत्कालीन समय में बच्चों की संख्या के आधार पर 2601.92 लाख रुपए यानी 26.01 करोड़ रुपए का भुगतान करने के बजाय विभागीय अधिकारियों ने करीब 27 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। इसी तरह एक साल पहले तक केंद्रीय रसोइघर को करीब 80 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया जा रहा था।

भोपाल से सीधे किया जा रहा भुगतान
केंद्रीय रसोइघर का भुगतान अब सीधे भोपाल से होने लगा है। विभागीय अधिकारियों की साठगांठ से सेंट्रल किचेन के भुगतान में भी गड़बड़ी की गई है। इसी तरह ऑडिट आपत्ति रिपोर्ट में 40.30 लाख रुपए के खाद्यान्न के मामले में भी ऑपत्ति की गई है।
आठ करोड़ के भुगतान पर ऑपत्ति
महालेखाकार ग्वालियर की ऑडिट टीम की आपत्ति के अनुसार वित्तीय वर्ष 2011 से 2013-14 तक रसोइया को किए गए 793.81 लाख रुपए के भुगतान का विभाग ने उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं लिया है। इसी तरह 39 लाख रुपए गैस कनेक्शन पर भुगतान किया गया है। उपयोगिता प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं कराए जाने पर आडिट टीम ने भुगतान पर आपत्ति की है।

प्रति बच्चों की दर से 6.14 रुपए
जिला पंचायत कार्यालय में चस्पा लिस्ट के अनुसार, शासन से प्रति बच्चों की दर से प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को 100 ग्राम एवं माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को 150 ग्राम की दर से खाद्यान्न के साथ 6.14 रुपए नकद राशि दी जा रही है। ऑनलाइन रिकार्ड के अनुसार, रीवा जनपद क्षेत्र में करीब बीस हजार बच्चे हैं।