
india state of forest report 2019-2020, forest cover rewa mp
रीवा। विंध्य क्षेत्र में हरियाली का दायरा तेजी के साथ बढ़ा है। यहां पर वन भूमि के साथ ही राजस्व भूमि में भी बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए, जिसका असर यह हुआ कि पहले की तुलना में कई गुना अधिक हरियाली हो गई है। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश के रीवा-सतना सहित कई अन्य जिलों में वनों का घनत्व बढ़ा है। पौधरोपण के लिए लगातार चलाए जा रहे जागरुकता अभियान का असर इसे माना जा रहा है।
यह रिपोर्ट केवल वन भूमि में लगे पेड़-पौधों तक के लिए नहीं है। लोगों ने अपनी भूमि या फिर सरकारी भूमि पर भी जो पौधरोपण किया और उसकी वजह से हरियाली बढ़ी है। बीते कुछ समय से पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए भी अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही जंगलों में लगने वाली आग पर भी नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं। जिसकी वजह से मध्यप्रदेश में हरियाली बढ़ी है। इसमें विंध्य क्षेत्र का हिस्सा बेहतर बताया गया है। पन्ना जिले में भी करीब 75 फीसदी से अधिक फारेस्ट कवर बढ़ा है।
वन विभाग द्वारा किए गए प्रयासों को भी सरकार ने सराहा है और कहा है कि वनों की सुरक्षा के साथ ही शहरों एवं गांवों में भी पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों की वजह से इंडिया स्टेट आफ फारेस्ट रिपोर्ट में सकारात्मक परिणाम आया है। इसके पहले वर्ष 2017 में यह रिपोर्ट जारी की गई थी, उसी के आंकड़ों से अब जारी की गई रिपोर्ट की तुलना की गई है।
- रीवा में 0.8 घनत्व का वन क्षेत्र
वन मंत्रालय ने मध्यप्रदेश में पेड़ों और वनों के घनत्व को तीन भागों में बांटा है। शून्य से एक तक इसका मानक तय किया गया है। जिसके तहत 0.4 तक घनत्व के एरिया को खुला वन कहा जाता है। 0.5 से 0.7 तक के घनत्व को मीडियम वन क्षेत्र और 0.8 या उससे अधिक के घनत्व पर सघन घनत्व का वन माना जाता है। केन्द्र सरकार की रिपोर्ट में रीवा जिले में स्थित पेड़ों का घनत्व 0.8 माना गया है।
- सिंगरौली, उमरिया सहित कई जिलों में घटे पेड़
सर्वे रिपोर्ट में कई जिलों में पेड़ों की संख्या घटना का भी उल्लेख है। इसमें रीवा संभाग का सिंगरौली जिला भी शामिल है। सिंगरौली जिले का भौगोलिक एरिया 5675 वर्ग किलोमीटर है। यहां पर 38.42 प्रतिशत हिस्से में वन है, इसका एरिया 2180.13 वर्ग किलोमीटर में है। इस वर्ष जारी की गई रिपोर्ट में इसके वन क्षेत्र का घनत्व कम हुआ है। यहां पर 8.87 वर्ग किलोमीटर एरिया से पेड़ कम हुए हैं। इसी तरह उमरिया जिले में 9.43 वर्ग किलोमीटर एरिया से फारेस्ट कवर कम हुआ है। प्रदेश के अन्य जिलों की भी चिंताजनक स्थिति है जिसमें विदिशा में 25.54, टीकमगढ़ 16.36, श्योपुर में 26, सिवनी में 33.41, सिहोर में 43.10, सागर में 19.46, रायसेन में 0.74, मुरैना में 1.83, मंदसौर में 2.41, खरगोन में 2.94, झाबुआ में 7.33, जबलपुर में 25.07, होशंगावाद में 11.35, हरदा 51.74, गुना में 22.26, धार में 34.15, बुरहानपुर में 14.44, भोपाल में 25.33, अशोकनगर में 10.96 वर्गकिलोमीटर के दायरे से वन का घनत्व कम हुआ है।
- रिपोर्ट में वनों की स्थिति ऐसी रही
जिला- भौगोलिक क्षेत्र-- वन क्षेत्र-- बढ़ोत्तरी
रीवा- 6314---- 781.15--- 3.15
सतना- 7502-- 1752.9--- 22.90
सीधी- 4851-- 1969.16--37.16
शहडोल- 6205-- 1970.71--48.71
अनूपपुर- 3747-- 868.68-- 20.68
पन्ना- --7135-- 2743.71--- 75.71
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रीवा, सतना और सीधी में पहले से जो फारेस्ट कवर है उसमें बढ़ोत्तरी हुई है। रिपोर्ट में सिंगरौली का जरूर घनत्व कम हुआ है, इसकी प्रमुख वजह वहां के कोल माइंस व अन्य खदानों को बड़ा हिस्सा दिया गया है। प्रयास होगा कि जो क्षेत्र अब है, वहां पर तेजी के साथ पौधरोपण किए जाएं ताकि आगे यहां का भी परिणाम बेहतर हो।
अतुल खेरा, मुख्य वन संरक्षक रीवा वृत्त
Published on:
12 Feb 2020 12:27 pm
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