24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

वेतन विसंगति पर सरकार के खिलाफ फूटा आक्रोश

सिरमौर चौराहे पर आशा ने और वेटरनरी कॉलेज में डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रीवा

•

image

Dilip Patel

•

Updated: 13 Jul 2018, 12:49 PM IST

 indignation against the government on salary problem

indignation against the government on salary problem

स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ कही जाने वाली आशा कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनी फिर आंदोलन पर उतर आई हैं। गुरुवार को प्रदर्शन के दौरान कहा कि सरकार को काम चाहिए, पर वेतन नहीं देंगे। वहीं वेटरनरी कॉलेज के डॉक्टरों ने सांतवे वेतनमान की मांग उठाई।
रीवा। आशा ऊषा कार्यकर्ता एवं आशा सहयोगिनी एकता यूनियन के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की वादाखिलाफी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि आशा ऊषा को न्यूनतम मानदेय 18000 रुपए निर्धारित किया जाए। लेकिन जब तक न्यूनतम वेतन तय नहीं होता तब तक देश के अन्य राज्यों की तरह राज्य सरकार हर माह मानदेय की पूरी राशि प्रदान की जाए। प्रोत्साहन राशि का भुगतान बिना किसी काट छांट के समय पर किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़, हरियाणा, बंगाल, केरल, राजस्थान में यह व्यवस्था लागू हैं। आगे कहा कि मध्य प्रदेश सरकार खुद को महिलाओं की हितैषी बताती है लेकिन राहत देने को तैयार नहीं है। आशा ऊषा कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनों ने एकत्र होकर निर्णय लिया है कि अगर सरकार 21 जुलाई तक मांगों पर कोई फैसला नहीं लेती है तो 22 जुलाई से चौबीस घंटे की भूख हड़ताल पर चली जाएंगी। प्रदर्शन के दौरान सीटू के जिला महासचिव विद्याशंकर मुफलिस, नौजवान सभा के अमित सोहगौरा, विनय तिवारी, रंजना द्विवेदी, तारा सिंह, मंजूषा शुक्ला, मीरा पांडेय, आशा सिंह, सविता पटेल, ममता सिंह, माया सिंह, अनीता सिंह, दयमंती कुशवाहा, आशा पांडेय, नीलम मिश्रा, रेहाना बेगम, सरोज जायसवाल सहित अन्य मौजूद रहे।
वेटरनरी के डॉक्टरों ने उठाई सातवें वेतनमान की मांग
सातवें वेतनमान की मांग को लेकर पशु चिकित्सा महाविद्यालय के पशु चिकित्सकों ने आवाज बुलंद की। कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के आदेशों का पालन सरकार नहीं करती है तो आंदोलन किया जाएगा। पशु चिकित्सकों ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने कृषि और पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को 7 वां वेतनमान देने की घोषणा की है। 1 जनवरी 2016 से 30 मार्च 2019 तक आने वाले वित्तीय भार का 50 फीसदी राशि विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराएगा। शेष 50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को देनी है। इस संबंध में देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर में भी मांग उठाई गई है। पशु चिकित्सकों ने कहा कि यह मांग सरकार जल्द पूरी नहीं करती है तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।