22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

डीईओ के एक आदेश ने उड़ाई प्राचार्यों की नींद, जानिए क्या है मामला

आदेश से सारे प्राचार्य हैं परेशान...

2 min read
Google source verification

रीवा

image

Ajit Shukla

Jun 03, 2018

School Education Dept has canceled exam of class 9th and 11th

School Education Dept has canceled exam of class 9th and 11th

रीवा। ग्रीष्मावकाश में स्कूल भवन को दुरुस्त करने संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी का निर्देश प्राचार्यों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। बचे चंद दिवस में आदेश का पालन कैसे हो, प्राचार्यों के समक्ष यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है। वजह स्कूल के पास भवन की मरम्मत जैसे कार्यों के लिए बजट में कोई मद नहीं है।

वाटिका बनाने का भी निर्देश
लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश के मद्देनजर डीईओ अंजनी कुमार त्रिपाठी ने स्कूल प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि ग्रीष्मावकाश में न केवल स्कूल भवन को दुरुस्त कराकर रंगाई-पुताई कराई जाए। बल्कि परिसर में सभी छात्र सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएं। स्कूल परिसर में नक्षत्र, ग्रह व राशि वाटिका बनाने का भी निर्देश है। यह बात और है कि प्राचार्यों को न ही इस बावत कोई बजट उपलब्ध कराया गया है और न ही उन्हें इस आशय का मार्गदर्शन दिया गया है कि वह यह कार्य स्कूल बजट के किस मद से कराएं।

सता रहा ऑडिट ऑब्जेक्शन का भय
वैसे तो स्कूलों में विभिन्न मदों के खर्च के लिए 75 हजार रुपए का वार्षिक बजट प्राप्त होता है। प्राप्त बजट में स्कूल कार्यालय से लेकर प्रयोगशाला तक के व्यवस्था का मद शामिल होता है। इस बजट में भवन मरम्मत व वाटिका बनाने जैसे कार्यों के लिए कोई मद नहीं होता है। प्राचार्यों को इस बात का भय सता रहा है कि वार्षिक बजट से इन कार्यों को पूरा करा दिया गया तो ऑडिट ऑब्जेक्शन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

शाउमावि क्रमांक दो का प्रस्ताव भी अधर में
जर्जर हाल में पहुंच चुके शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक एक व दो के भवनों को दुरुस्त करने के लिए पिछले वर्ष उद्योग मंत्री के निर्देश पर कलेक्टर की ओर से विशेष निर्देश जारी किया गया था। स्कूलों से संबंधित कार्य के लिए स्टीमेट भी लिया गया। लेकिन शाउमावि क्रमांक एक के भवन को तो दुरुस्त कर दिया गया। लेकिन अधिकारी क्रमांक दो के जर्जर भवन को दुरुस्त करना भूल गए। नतीजा स्थिति पूर्व की तरह दयनीय बनी हुई है।