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पैर से अपनी किस्मत लिखने वाले कृष्ण कुमार ने कहा, सपने देखने के साथ आत्मबल मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है

- नि:शक्त कृष्ण कुमार केवट ने कहा, जब से हताशा दूर हुई तो मिलने लगी सफलता

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रीवा

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Mrigendra Singh

Oct 12, 2020


रीवा। हायर सेकंडरी परीक्षा का परिणाम इस साल घोषित हुआ तो टाप करने वाले कई ऐसे छात्र सामने आए जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए यह सफलता हासिल की थी। इसमें एक नाम मऊगंज उत्कृष्ट विद्यालय के कला संकाय के छात्र कृष्णकुमार केवट का रहा। जिसने हर छात्र को आगे बढऩे की प्रेरणा दी। जन्म से ही दोनों हाथों से नि:शक्त कृष्णकुमार ने पैर से लिखना सीखा और उन सभी सहपाठी छात्रों को पीछे छोड़ दिया जो पूरी तरह से स्वस्थ हैं और हाथों से परीक्षा में लिखा था। अन्य छात्र हाथों से लिखकर जो उपलब्धि हासिल नहीं कर पाए, वह कृष्णकुमार ने पैरों से लिखकर हासिल कर ली। साथ ही भी साबित कर दिया कि आत्मबल मजबूत है तो शरीर की नि:शक्तता इसमें रुकावट नहीं बन सकती। कृष्ण कुमार बताते हैं कि उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। घर में पिता रामजस केवट की उम्र अब बाहर काम करने की नहीं है लेकिन परिवार के भरण पोषण के लिए वह मजदूरी करते हैं। मां का पूरा समय उनकी ही सेवा मदद में गुजर जाता है, वह भी मौका पाती है तो काम करने जाती है। शुरुआती पढ़ाई गांव की प्राथमिक विद्यालय से ही की, दूसरे बच्चों को लिखते हुए देख मन में लगता था कि मैं तो लिख ही नहीं सकता क्योंकि लिखने के लिए मेरे पास हाथ ही नहीं हैं। धीरे-धीरे घर के लोगों के साथ ही स्कूल के शिक्षकों ने आत्मबल बढ़ाया और पैरों से लिखने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत के कई वर्षों तक ठीक से नहीं लिख पाता था। नौवीं कक्षा के बाद यह समझ में आया कि आगे खुद ही संघर्ष करना पड़ेगा, इसलिए और मेहनत करना चाहिए। हाईस्कूल परीक्षा में ५४ प्रतिशत अंक मिले, शिक्षकों ने कहा यह एक पड़ाव है आगे और मेहतन करो। इसके बाद ११वीं की पढ़ाई में पूरा ध्यान दिया और ८४ प्रतिशत परीक्षा परिणाम आया। तभी सोचा की इसी तरह हायर सेकंडरी का परिणाम लाएंगे। यह भरोसा था कि स्कूल में टाप करेंगे, लेकिन अपेक्षा से अधिक परिणाम मिला। प्रदेश के कला संकाय के टापरों में नाम शामिल हो गया। ८२.८ प्रतिशत अंक हासिल हुए, तो जिले भर से लोगों ने बधाई दी। कई लोगों ने आर्थिक मदद भी दी। कृष्ण कुमार बताते हैं कि कुछ साल पहले मऊगंज थाने में पदस्थ आरक्षक रामजी पनिका से मुलाकात हुई थी तो उन्होंने जब जरूरत पड़ी मदद की। साथ ही किताबें और कापियां भी कुछ दुकानदारों ने मुफ्त में दी। इससे पढ़ाई आसान हो गई, अन्यथा घर की आर्थिक स्थिति और शरीर की नि:शक्तता रुकावट भी बन सकती थी। कृष्ण कुमार का कहना है कि यदि उनके जैसे लोग सफलता मिल सकती है तो अन्य और बेहतर कर सकते हैं।

- गुजारे के लिए नौकरी मिल जाए तो आइएएस की करेंगे तैयारी
कृष्ण कुमार कहते हैं कि उन्होंने मऊगंज में कालेज में प्रवेश तो ले लिया है लेकिन गुजारे के लिए अब नौकरी की जरूरत है। यदि कोई छोटी नौकरी भी मिल जाती है तो आगे के लिए वह आइएएस की तैयारी करेंगे और साबित करके दिखाएंगे कि हमारे जैसे लोगों को भी सफलता मिलती है।

- आवास योजना का नहीं मिल लाभ
प्रशासन की ओर से कुछ दिन पहले आश्वासन दिया गया था कि उनकी हर संभव मदद की जाएगी। घर में दो भाई बड़े हैं, जो अभी रोजगार से नहीं जुड़ पाए हैं। दो बहनें भी हैं। मकान नहीं है तो आवास योजना के तहत मकान बनवाने में मदद मांगी थी। अधिकारियों ने कहा था लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिली है। कृष्ण कुमार का कहना है कि अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए।


शासकीय उत्कृष्ट मऊगंज, पांच किलोमीटर, पैदल आते-जाते
मां कर रही थी, पैर से लिखने के लिए बताया गया, उसे पहले सिखाया गया, दौड़ लेते हैं, एक-दो घंटे पढ़ते रहे। मदद लोगों द्वारा करते रहे, दुकान वाले मुफ्त में दे देते रहे। पिता मजदूरी करते हैं, कृष्ण कुमार चार भाई हैं, तीसरे नंबर के हैं। दो बहनों की शादी हो गई हैं। मऊगंज कालेज में एडमिशन लिया है। नौवीं के बाद से ध्यान अधिक देने लगे। भाई लोग भी पढ़ाते रहे, गांव के लोग भी मदद करते रहे। मां ही पूरी मदद करती है। ७२ प्रतिशत आया था। मां भी मजदूरी करती है। उसकी तैयारी कराते हैं।