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दौलत नहीं जमीन के बदले जमीन चाहिए

भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों ने लगाई आपत्ति, सुनवाई के लिए 150 से ज्यादा किसानों ने जमा किए आवेदन

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रीवा

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Rajesh Patel

Oct 07, 2017

rewa

किसानों दस से ज्यादा गांवों के किसान तहसील पहुंचे

रीवा. हुजूर तहसील के पश्चिमी एरिया में प्रस्तावित बाणसागर माइनर नहर के लिए अधिग्रहीत की जा रही जमीन को लेकर शुक्रवार दोपहर दस से ज्यादा गांवों के किसान तहसील पहुंचे। चोरहटी के दर्जनों किसानों ने आपत्ति जताते हुए कहा, मुआवजा और दौलत नहीं जमीन के बदले जमीन चाहिए। डेढ़ सौ से अधिक किसानों ने सुनवाई के लिए आपत्ति आवेदन दिया।

बेला डिस्ट्रीब्यू टी नहर से माइनर का कराया जा रहा निर्माण

बेला डिस्ट्रीब्यूट्री नहर से धौचट, कचूर, जोन्हा, महिदल, बैजनाथ, मद्देपुर चोरहटी सहित अन्य गांवों में सिंचाई के लिए माइनर का प्रस्तावित है। किसानों को शुक्रवार को तहसील में भू-अर्जन अधिकारी के कार्यालय में आपत्ति सुनवाई के लिए बुलाया गया था। चोरहटी के तीस किसानों ने भू-अर्जन अधिकारी को अर्जी देकर बताया कि गांव में नहर की आवश्यकता नहीं है। सिंचाई के पर्याप्त साधन हैं।

इन्होंने उठाया मुद्दा
किसान राजेश चतुर्वेदी, रामकृपाल, जयकृष्ण चतुर्वेदी, रामनिरंजन, चंद्रिका प्रसाद, गुरु प्रसाद, हीरानाथ चतुर्वेदी सहित दर्जनों किसानों ने कहा कि उनके पास टुकड़े में जमीन बची है। वह भी नहर में चली जाएगी, जिससे भूमिहीन हो जाएंगे। इसलिए जमीन के बदले जमीन चाहिए, किसी तरह का मुआजवा नहीं चाहिए।

पूरी जमीन अधिग्रहीत कर ली जाए
नवगांव की ललिता कोल ने अर्जी देकर बताया कि माइनर के लिए आधी भूमि अधिग्रहीत की गई है, शेष इतनी कम बच रही है कि किसी काम की नहीं है। पूरी जमीन अधिग्रहीत कर मुआवजा दिया जाए, ताकि खेती के लिए जमीन खरीद लें। इसी तरह शैलेन्द्र तिवारी ने बताया कि बहुती कैनाल की इस माइनर में उनकी पूरी जमीन चली गई।

आवेदन जमा करने जद्दोजहद
तहसील में अव्यवस्था के चलते किसानों को आवेदन जमा करने के लिए जद्दो-जहद करना पड़ा। कई किसान बैरंग लौट गए। बुजुर्ग मणिराज ने बताया कि उनकी जमीन भी माइनर के लिए अधिग्रहीत की जा रही है। आपत्ति के लिए आवेदन देने आया हूं, लेकिन अव्यस्था के कारण जमा नहीं कर पा रहे हैं।

धारा 11 और 19 का हो चुका है प्रकाशन
प्रस्तावित माइनर के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन का सबसे पहले धारा ११ यानी प्रकाशन, दूसरी बार धारा १९ में खसरा नंबर के साथ प्रकाशन किया जा चुका है। तीसरी बार धारा २१ के तहत भू-स्वामी की आपत्ति की सुनवाई की जानी है।