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मास्टर प्लान : ग्रीन बेल्ट का दायरा घटाना चाहते हैं लोग, नया प्रस्ताव तैयार

- तकनीकी खामियों की वजह से पूर्व में निरस्त हो गया था रीवा का मास्टर प्लान- औद्योगिक और ग्रीन बेल्ट एरिया को हटाकर आवासीय करने के आए अधिक सुझाव

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रीवा

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Mrigendra Singh

Nov 03, 2022

Rewa

Master Plan Rewa 2035, new proposal rewa city


रीवा। शहर के नए मास्टर प्लान को फिर से प्रकाशित कराने की तैयारी तेज कर दी गई है। इसके लिए जो दावा-आपत्तियां आई हैं उनकी समीक्षा के बाद प्रस्ताव तैयार किया गया है। अब तक आई आपत्तियों में अधिकांश लोग शहर का ग्रीन बेल्ट एरिया कम कराना चाहते हैं। इसके लिए लोगों ने अपने अलग-अलग तर्क दिए हैं। वहीं कुछ आपत्तियां ऐसी भी हैं जिसमें शहर के भीतर ग्रीन बेल्ट और कृषि क्षेत्र को कम करने का विरोध भी दर्ज कराया गया है। शहर के भीतर आवासीय एवं व्यवसायिक भवनों की बढ़ती संख्या के कारण ही नदियों और नालों के किनारे स्थित ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण कर मकान बनाए गए हैं, इस पर कार्रवाई नगर निगम की ओर से नहीं की जा रही है।

रीवा शहर के मास्टर प्लान 2035 का प्रकाशन पिछले वर्ष ही किया जा चुका है लेकिन यह प्लान तकनीकी खामियों से भरा था, जिसको लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। इस कारण शासन ने निरस्त करते हुए नए सिरे से प्रस्ताव मांगा है। पूर्व की खामियों को सुधार करते हुए ग्राम एवं नगर निवेश विभाग ने नया प्रस्ताव तैयार कर कलेक्टर को प्रस्तुत किया है, जहां पर इसकी समीक्षा के बाद शासन को भेजा जाएगा। पूर्व में मास्टर प्लान प्रकाशित करने से पहले लोगों को नहीं जोड़ा गया और मनमानी रूप से इसकी सूचना जारी करते हुए प्रकाशन भी करा दिया गया था, जिस पर शिकायतों के बाद निरस्त कर नया प्रस्ताव मांगा गया है।
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129 दावा-आपत्तियों पर हुई चर्चा
मास्टर प्लान के पहले प्रकाशन के बाद 117 और अब दोबारा 12 दावा-आपत्तियां आई हैं। जिसमें अलग-अलग तर्क दिए गए हैं, कुछ मांगें तो ऐसी भी हैं जिन्हें व्यवहारिक रूप से पूरा करना मुश्किल काम है। 129 दावा-आपत्तियों को समाहित करते हुए प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें पहले ही कृषि भूमि को लेकर किसानों के संगठनों ने आपत्तियां दर्ज कराई थी। वहीं नदी और नालों के किनारे अतिक्रमण करने वालों ने भी कहा है कि ग्रीन बेल्ट का दायरा कम किया जाए ताकि उनका निर्माण अतिक्रमण क्षेत्र से बाहर माना जाए। कई बिल्डर्स ने भी शिकायतें कराई हैं, जिससे वह ग्रीन एरिया में निर्माण करा पाएं।
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50 मीटर के ग्रीन बेल्ट को 15 मीटर कराना चाहते हैं लोग
शहर में बिल्डर्स और कुछ नेताओं से जुड़े लोग मास्टर प्लान में अपनी मर्जी के अनुसार बदलाव कराना चाहते हैं। बीहर और बिछिया नदियों का ग्रीन बेल्ट 50 मीटर रहा है। इसके भीतर किसी तरह का निर्माण प्रतिबंधित है। जबकि नदियों के कई हिस्से ऐसे हैं जहां पर नदी के किनारे तक निर्माण हो चुके हैं। जिसमें सत्ताधारी दल के नेताओं के साथ ही अन्य प्रभावशाली लोगों के निर्माण शामिल हैं। पिछले वर्ष मास्टर प्लान जो प्रकाशित हुआ था उसमें 50 मीटर के ग्रीन बेल्ट को घटाकर 30 मीटर कर दिया गया था। इसे भी अब कम कराने का दबाव बनाया जा रहा है। कई लोगों ने दावा-आपत्तियों में कहा है कि 15 से 20 मीटर ही किया जाए। साथ ही नालों के नौ मीटर के ग्रीन बेल्ट को भी कम कराने की मांग की गई है।
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पुरानी योजना की खुले तौर पर अनदेखी हुई
शहर में पुरानी विकास योजना के प्रस्तावों के अनुसार कार्य नहीं हुए हैं। कई नए कार्य योजना के बाद आए और उनके अनुसार विकास हुआ है, जबकि योजना में उनका कोई उल्लेख नहीं था। शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बड़ी संख्या में मकान बनाए गए हैं, जहां इनका निर्माण हुआ है वह पहले से आवासीय क्षेत्र में प्रस्तावित नहीं थे। इतना ही नहीं जीआइसी सर्वेक्षण के तहत मिले सेटेलाइट मैप में शहर में भवनों का निर्माण बताया गया है। मौके पर गए बिना ही तैयार किए गए प्रारूप में माना गया है कि पूर्व में मास्टर प्लान जो 2021 तक के लिए जारी किया गया था उसका क्रियान्यव सही तरीके से किया गया है। जबकि योजना की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। अवैध कालोनियों से पूरा शहर पटा है। बीहर और बिछिया नदियों के साथ ही शहर के नालों का ग्रीन बेल्ट पूरी तरह से अतिक्रमण में है। इसे भी शहर के विकास के साथ मास्टर प्लान में जोड़ा गया है।
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इन गांवों को शहर में शामिल करने का है प्रस्ताव
मास्टर प्लान में जिन गांवों को शहरी सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव है उसमें प्रमुख रूप से नीगा, रमकुईं, अमरैया, तुर्कहा,दुआरी, करहिया, मैदानी, केमार, बिड़वा देवार्थ, अटरिया, मढ़ी, किटवरिया, उमरिहा, बरा 393 एवं बरा 395, सिरखिनी, इटौरा, भाटी, सोनौरा, पुरैना, बेलहा 450, बेलहा 451, भुंडहा, जिवला, सिलपरा, जोरी, डकवार, सिलपरी, बैसा, मगुरहाई, रमपुरवा, पिपरा 375-76, खोखम आदि शामिल हैं। सीमावर्ती कई गांवों के अंशभाग भी शामिल किए जाने के प्रस्ताव हैं, जिसमें रतहरा, रतहरी, निपनिया, कुठुलिया, बदरांव, बाबूपुर, चोरहटा, चोरहटी, रौसर, गड़रिया, कोष्ठा, अजगरहा, गोड़हर आदि के अंशभाग शामिल करने का प्रस्ताव है। इसमें कुछ पूर्व से ही शामिल हैं और कुछ गांवों के आंशिक हिस्से को ही नए प्रस्ताव में शामिल किया गया है।

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8217 हेक्टेयर शहर का बढ़ेगा क्षेत्रफल
नगर निगम रीवा में आसपास के जिन गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव है, उन गांवों का रकबा 8217.49 हेक्टेयर है। राजस्व के इन 48 गांवों(13 गांवों के अंशभाग) को शामिल किया गया है। इन गांवों में वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक 43823 की जनसंख्या भी शहर में शामिल होगी। इस तरह से रीवा नगर निगम का क्षेत्रफल काफी बड़ा हो जाएगा। गांवों का जो हिस्सा शामिल किए जाने का प्रस्ताव है, वह वर्तमान शहर से अधिक है। अभी रीवा नगर निगम का क्षेत्रफल 6265.62 हेक्टेयर जीआइएस के अनुसार है। जिसमें 8217.49 हेक्टेयर का रकबा शामिल करने के बाद कुल क्षेत्रफल 14483.11 हेक्टेयर हो जाएगा।
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गांव यथावत रहने से ग्रीन जोन होगा सुरक्षित
मास्टर प्लान में 48 गांवों को रीवा शहर में शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। इसको लेकर संबंधित पंचायतों द्वारा शुरुआत से ही विरोध किया जा रहा है। जिस पर संबंधित पंचायतों के सरपंचों ने आपत्तियां दर्ज कराई है। किसान नेता रविदत्त सिंह एवं सुब्रतमणि त्रिपाठी ने भी गांवों का स्वरूप बिगाडऩे का आरोप लगाते हुए कई आपत्तियां दी हैं। किसान संगठनों ने कहा है कि गांव यथावत रहेंगे तभी रीवा शहर और आसपास ग्रीन जोन सुरक्षित रह पाएगा।

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मास्टर प्लान को लेकर जो दावा-आपत्तियां आई हैं, उन पर कुछ दिन पहले ही बैठक में चर्चा हुई है। अधिकारियों से कहा है कि वह भौतिक परीक्षण करने के बाद ही निर्णय करें। पूर्व में प्लान के अनुसार कार्य नहीं हुआ है लेकिन अब हमारी प्राथमिकता है कि प्लान के मुताबिक शहर का व्यवस्थित रूप से विकास हो। नगर निगम इसके लिए योजना तैयार कर रहा है।
अजय मिश्रा बाबा, महापौर