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रीवा। वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल किए जाने की वजह से जंगल और वन्य प्राणियों की सुरक्षा भगवान भरोसे हो गई है। जंगलों की रखवाली करने वाला कोई नहीं है। अब वन विभाग ने पुलिस और होमगार्ड के जवानों की मदद मांगी है कि जब तब हड़ताल समाप्त नहीं हो जाती तब तक जंगलों के पेड़-पौधों और जानवरों की सुरक्षा में मदद कराई जाए।
वन वृत्त रीवा के मुख्य वन संरक्षक ने आइजी को पत्र लिखकर कहा है कि 19 सूत्रीय मांगों को लेकर वन क्षेत्रपाल, उप वनक्षेत्रपाल, वनपाल, वनरक्षक, स्थायी वनकर्मी, प्रबंधक तेंदूपत्ता, कम्प्यूटर ऑपरेटर आदि हड़ताल पर चले गए हैं। इनकी हड़ताल अनिश्चितकालीन है, इस कारण वन और जानवरों की सुरक्षा पर संकट को देखते हुए रीवा, सतना, सीधी एवं सिंगरौली जिलों में बहुमूल्य वनोपज एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा की व्यवस्था के लिए पुलिस और होमगार्ड के जवानों को तैनात किया जाए।
जंगलों में लकडिय़ां काटे जाने की मिली सूचनाएं
वन कर्मियों की हड़ताल के चलते जंगल में रखवाली करने वाला कोई नहीं बचा है। इसका फायदा जंगलों के आसपास रहने वाले लोग उठा रहे हैं। संभाग के सभी जिलों के अलग-अलग हिस्सों से इस तरह की सूचनाएं आ रही हैं। वन चौकियों में भी निगरानी नहीं हो पा रही, जिसके चलते तेजी के साथ लकडिय़ों की कटाई हो रही है। बताया जा रहा है कि सप्ताहभर से अधिक समय तक हड़ताल चली तो संभाग के जंगलों को बड़ा नुकसान माफिया पहुंचा सकते हैं।
चौकी के वाहनों को गश्ती के निर्देश
सीसीएफ ने सभी डीएफओ को पत्र लिखकर यह भी कहा है कि वनों में अवैध कटाई, अतिक्रमण, शिकार, अवैध उत्खनन आदि को रोकने के लिए सभी चौकीदार, वन प्रबंधन समितियों में कार्यरत चौकीदार, वन विकास निगम के कर्मचारी एवं अधिकारियों की सेवाएं ली जाएं। साथ ही चौकी के जो वाहन हैं वह अपने क्षेत्र में नियमित गश्त करें इसकी व्यवस्था भी बनाई जाए। जहां पर जरूरत पड़े तो पुलिस को बुलाकर मदद लें।
चिडिय़ाघर के कर्मचारी भी हड़ताल पर
वनकर्मियों की हड़ताल का असर महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव चिडिय़ाघर मुकुंदपुर पर भी पड़ा है। यहां पर २५ वन कर्मी कार्यरत हैं, जो जानवरों की सुरक्षा से लेकर पर्यटकों को भ्रमण कराने तक की व्यवस्था का काम देखते हैं। इनके एक साथ हड़ताल पर चले जाने की वजह से असर पड़ा है। दूर से पर्यटकों के पहुंच जाने के चलते प्रबंधन वैकल्पिक रूप से व्यवस्था कर रहा है। चिडिय़ाघर के संचालक ने संविदा पर तैनात कर्मचारियों को पर्यटकों को भ्रमण कराने के लिए ड्यूटी लगा रही है। साथ ही परिसर के रखरखाव के लिए श्रमिकों का भी सहयोग लिया जा रहा है।
लकड़ी की कटाई और पत्थर की निकासी हुई तेज
वनकर्मियों के हड़ताल पर चले जाने की वजह से लकड़ी की कटाई और पत्थर का उत्खनन तेज हो गया है। यूपी की सीमा से लगे स्थानों पर कोई जांच नहीं होने के चलते उन क्षेत्र में इस तरह की तस्करी जोरों पर शुरू हो गई है। सिरमौर रेंज के पटेहरा सर्किल एक ट्रैक्टर लकड़ी काटकर चोरी किए जाने की सूचना स्थानीय लोगों ने वन विभाग के अधिकारियों से की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि डीएफओ लोगों के फोन ही रिसीव नहीं कर रहे हैं और आफिस आकर सूचना देने पर अनदेखी कर रहे हैं। कई स्थानों पर शिकारियों के भी सक्रिय होने की खबरें आई हैं।
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हर जगह एक साथ अनिश्चितकाली हड़ताल पर कर्मचारी चले गए हैं। जिससे वन संपदा और वन्य प्राणियों की सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है। सभी डीएफओ से कहा है कि समितियों एवं अन्य सहयोगी दल को देखरेख में लगाएं। साथ ही आइजी को भी पत्र लिखा है कि वह पुलिस और होमगार्ड की मदद कराएं।
अतुल खेरा, सीसीएफ -वन वृत्त रीवा
हड़ताल पर वनकर्मी, जंगलों में कटने लगे वृक्ष
वन विभाग के कर्मचारियों की अनिश्चकालीन हड़ताल लगातार जारी है। विभाग के जयंतीकुंज स्थित कार्यालय परिसर के बाहर 19 सूत्रीय मांगों को लेकर टेंट लगाकर कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हैं। वहीं इसका फायदा लकड़ी माफिया ने उठाना शुरू कर दिया। जंगलों में पेड़ो की कटाई प्रांरभ शुरू हो गई है। वनकर्मियों की हड़ताल चलते मुख्य वनसंरक्षक ने जंगल की सुरक्षा के लिए नगर सेना व पुलिस की सहायता मांगी थी लेकिन अभी तक नहीं मिली है। कर्मचारियों ने कहना हौ कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी तब तक वह अपनी हड़ताल को जारी रखेंगे। इसके पहले करीब छह माह से सांकेतिक रूप से मांगे उठाई जा रही थी और विरोध प्रदर्शन भी हो रहे थे। बीते ५ मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर वन विभाग के कर्मचारी गए थे लेकिन वन मंत्री और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने वन कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के बाद आश्वस्त किया था कि उनकी मांगे पूरी कर दी जाएगी। सरकार के इस आश्वासन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हड़ताल की घोषणा की गई।
पूर्व में संगठन ने कहा था कि 15 दिन में यदि आदेश जारी नहीं होगा तो वह आंदोलन के रास्ते पर फिर चले जाएंगे। इनदिनों जंगलों में आग लगने और लकडिय़ों की अवैध कटाई का काम भी अधिक तेजी से होता है। बताया गया है कि सेमरिया रेंज के बमनी बीट में जंगल में आग लगने की सूचना है लेकिन कर्मचारियों के हड़ताल पर होने की वजह से कोई प्रयास नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों का हड़ताल पर चले जाना वन विभाग के प्रशासन के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। इस दौरान ब्रजकांत साकेत, संतोष संत, प्रदीप खरे, केके पाण्डेय, संघ के जिला अध्यक्ष राहुलदेव मिश्रा, आशुतोष पाण्डेय, अमित कुशवाहा, सीपी त्रिपाठी, याकूब खान, श्यामलाल, राकेश शुक्ला, रावेन्द्र मिश्रा, सजन, संतकुमार, रमेश, बुधराज, सुरेन्द्र रावत सहित अन्य हड़ताल में शामिल हुए।
Published on:
27 May 2018 05:37 pm
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