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गजब है एमपी: इलाज के लिए मरीज तय कर रहे 80 किमी. की दूरी, जानिए क्या हैं कारण

रीवा जिले की हकीकत...कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं हैं चिकित्सक, स्वास्थ्य संचालनालय नहीं खोज पाया रिक्त पदों पर भर्ती का समाधान

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रीवा

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Dilip Patel

Mar 29, 2018

MP: it amazing that the patient for treatment running 80 km.Distance

MP: it amazing that the patient for treatment running 80 km.Distance

रीवा। बीमार पडऩे पर मरीज डॉक्टर को खोजता है। मरीज की यह खोज 60 से 90 किमी. की दूरी तय करने पर पूरी हो तो स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं कही जा सकती हैंं। कहीं डॉक्टर नही हैं तो कहीं रात के डॉक्टर ही नहीं मिलते। विभाग के आला अधिकारी रिक्तियों की जानकारी मांग कर जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेते हैं तो सरकार आश्वासन देकर। लेकिन मरीज क्या करे।

बात रीवा जिले के ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की। पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कई वर्षों से चिकित्सक नहीं हंै। जिनमें प्रमुख रूप से कोनी जवा पीएचसी, त्योंथर में रायपुर सौनोरी पीएचसी, गढ़ी पीएचसी, गोविंदगढ़ का रहट पीएचसी और डिहिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। यहां पर चिकित्सक का एक-एक पद स्वीकृत है। पांच साल से ज्यादा का वक्त हो गया है इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आने वाले गांवों के ग्रामीणों ने यहां चिकित्सक नहीं देखे। गर्भवती की डिलेवरी हो या गंभीर रूप बीमार बच्चे-बुजुर्ग, मुख्यालय के अस्पतालों को आने को108 एंबुलेंस के भरोसे रहते हैं। अगर 108 एंबुलेंस से धोखा मिल गया तो फिर खुद के वाहन कर इलाज की चुनौती मरीजों के सामने होती है। वहीं हाटा, लालगांव सहित अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों के पद भर तो दिए गए हैं लेकिन रात में यहां चिकित्सक नहीं होते। रात में बीमार पडऩे वाले मरीज को या तो अगले दिन डॉक्टर के आने का इंतजार करना होता है या फिर मुख्यालय की दूरी तक करता है। कहने को ये है कि सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के दौर में भी सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सपने जैसी ही हैं।


हजारों की आबादी बे-इलाज
रायपुर सौनोरी की आबादी लगभग पांच हजार है। मुख्यालय से इसकी दूरी 85 किमी के आसपास है। इसी तरह कोनी की आबादी भी तीन हजार के करीब है। जवा का यह गांव भी मुख्यालय से 70 किमी. दूर है। गढ़ी, रहट और डिहिया की आबादी भी ढाई से तीन हजार के बीच है। दावे तो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में ये हुए थे कि हर पांच हजार आबादी पर एक पीएचसी होगी। डॉक्टर, नर्स सहित डिलेवरी की सुविधाएं होंगी। मिशन के तहत भवन तो बना दिए गए लेकिन सरकार चिकित्सक मुहैया नहीं करा सकी।


जोड़ौरी में चल रहे अनुपस्थित
जोड़ौरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक महीने पहले चिकित्सक की पदस्थापना की गई लेकिन चिकित्सक ज्वाइन करने के बाद से अनुपस्थित चल रहे हैं। सीएमएचओ कार्यालय से संबंधित बीएमओ से जानकारी तलब की गई है। ग्रामीण खुश थे कि चलो डॉक्टर आ गए पर कुछ ही दिन बीते कि फिर मायूसी छा गई है।


जनप्रतिनिधियों ने फेरा मुंह
चुनाव आते हैं तो जनप्रतिनिधियों के मुंह पर लाचार स्वास्थ्य सेवाएं होती हैं लेकिन चुनाव के बाद गुम हो जाती हैं। लंबे समय से रायपुर सौनोरी, रहट, डिहिया, कोनी और गढ़ी में चिकित्सक नहीं है। किसी भी जनप्रतिनिधि ने विधानसभा में यह सवाल नहीं उठाया। न ही कभी स्वास्थ्य संचालनालय के आला अधिकारियों से जानने का प्रयास किया है। नतीजा, हालात जस के तस बने हुए हैं।

वर्जन:---
जिले के पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक नहीं हैं। इससे इन क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं। रिक्तियों की जानकारी भेजी जा चुकी है।
डॉ. आनंद महिंद्रा, सीएमएचओ रीवा।