
APSU rewa
रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में वर्ष १९८९ में मस्टर श्रमिक पद पर नियुक्ति इस शर्त पर हुई थी कि आगे चलकर नियमित कर दिया जाएगा। लेकिन विश्वविद्यालय की सेवा में जीवन के अमूल्य २३ वर्ष कुर्बान कर देने के बावजूद अभी तक नियमित नहीं हुए। बात विश्वविद्यालय के मस्टर श्रमिक राजेंद्र कुमार सोनी की कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय अधिकारियों की उदासीनता का खामियाजा भुगतने वालों में एक राजेंद्र कुमार ही नहीं। उनके जैसे एक सौ से अधिक कर्मचारी हैं। जो अपना अधिकार पाने के लिए वर्षों से फरियाद कर रहे हैं। लेकिन अभी तक कर्मचारियों को उनका अधिकार नहीं मिला। करीब दो दर्जन से अधिक कर्मचारी फरियाद करते-करते सेवानिवृत्त हो गए। फिलहाल विश्वविद्यालय में कर्मचारी संघ की नई कार्यकारिणी के गठन के बाद कर्मचारियों के एक बार फिर उम्मीद जगी है।
बुढ़ापे में पेंशन भी नहीं हो रही नसीब
सेवाकाल में नियमित वेतनमान और सेवानिवृत्ति पर पेंशन मिले। वर्षों से यह मांग कर रहे दो दर्जन कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए। लेकिन न नियमित वेतनमान मिला और न ही पेंशन नसीब हो रही है। विश्वविद्यालय ऐसे १०४ कर्मचारियों में से अब केवल ७८ बचे हैं। अधिकारियों का तर्क यह है कि इनकी नियुक्ति जिस पद पर हुई वह शासन से स्वीकृत ही नहीं हैं।
शासन तक पहुंचाएंगे अधिकार की मांग
विश्वविद्यालय में कर्मचारी संघ की नवगठित कार्यकारिणी ने शपथ ग्रहण के बाद कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए नए सिरे से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। संघ के अध्यक्ष बुद्धसेन पटेल का कहना है कि इस बार सारे मुद्दे शासन स्तर तक ले जाएंगे। पदाधिकारियों के इस आश्वासन से अधिकार से वंचित कर्मचारियों में उम्मीद की आस जगी है।
विश्वविद्यालय के यह भी है फरियादी
- करीब १७ कर्मचारी विश्वविद्यालय स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों में १० से १२ वर्षों से कार्यरत हैं। इनकी फरियाद है कि उन्हें विश्वविद्यालय की सेवा से जोड़ा जाए। लेकिन अधिकारी हैं कि गौरफरमाने की जरूरत नहीं समझ रहे हैं।
- विश्वविद्यालय द्वारा संचालित हाईस्कूल विद्यालय के शिक्षक व कर्मचारी ३० से अधिक वर्षों से कार्यरत हैं। लेकिन उन्हें ग्रेच्युटी व सेवानिवृत्त पर पेंशन का अधिकार नहीं मिला है। अभी हाल में सेवानिवृत्त हुई प्रभारी प्राचार्य पेंशन से वंचित हैं।
- विश्वविद्यालय वर्षों की सेवा देने के बावजूद तकनीकी अधिकारियों को वेतनमान व पदोन्नति नहीं मिल सकी है। इसको लेकर कार्यवाही जारी है वर्षों से केवल यही आश्वासन सुनने को मिल रहा है।
- विश्वविद्यालय के कई विभागों में कर्मचारियों के पद रिक्त हैं। लेकिन सेवारत कर्मचारियों को पदोन्नति देकर उन पदों पर पदस्थ नहीं किया जा रहा है। रिक्त पदों पर नई भर्ती की कवायद में कर्मचारी इस अधिकार से वंचित हैं।
Published on:
07 Oct 2017 05:00 pm
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