
Paddy stalks remain farmed in the field
रीवा. कम बारिश और तेजी से घटते जलस्तर के चलते किसानों की धान सूख गई। लाचार किसान अब खेत में डंठल काट रहा है। पड़ोसी से उधार में धान की बोनी करने वाले किसान कर्ज में डूब गए। मौसम ने किसानों की हड़तोड़ मेहनत पर पानी फेर दिया है।
समर्थन मूल्य दो हजार मिलेगा
जिले के कछिगवां गांव के किसान रामानंद पटेल खेत पर डंठल काट रहे थे। पूछने पर फफक पड़े, बोले सोचा था कि इस बार समर्थन मूल्य दो हजार मिलेगा। इसी लालच में पड़ोसी से उधार में बीज लेकर ढाई एकड़ में धान की बोनी कर दी। एक बार पानी और मिल जाता तो सपने पूरे हो जाते। लेकिन, मौसम ने धोखा दे दिया है, खेत में ही गाढ़ी कमाई सूख गई। धान में जैसे ही बाली लगी, पानी नहीं मिला। जिससे धान के पौधे ही सूख गए। बसंतपती पटेल ने बताया कि खेत के बगल में दो साल से निर्माणाधीन माइनर चालू नहीं हो पाई और दो साल से माइनर का निर्माण भी बंद हो गया है। नहर का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया ।
जलस्तर निचे खिसक रहा
कछिगवां के ही कई निजी पंप संचालकों ने बताया कि जलस्तर नीचे चले जाने से पंप भी जवाब दे गए। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से खेत में धान का डंठल काटना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि मनगवां, नईगढ़ी, देवतालाब के अधिकांश एरिया के साथ ही जवा, डभौरा और मऊगंज क्षेत्र के ज्यादातर किसानों की धान सूख गई।
आधा हो जाएगा धान उत्पादन
कछिगवां के कई किसानों ने बताया कि गांव में इस बार ज्यादातर किसानों की धान का उत्पादन आधा हो जाएगा। मौसम और माइन के भरोसे किसानों ने धान की बोनी की थी। दोनों धोखा दे दिया। आखिरी पानी की सिंचाई में निजी पंप भी जवाब दे गए। ज्यादातर किसानों की धान पानी के अभाव में सूख गई। निजी साधन होने के बावजूद उत्पादन कम हो गया।
रोग की चपेट में धान
बताया गया कि मौसम की मार के साथ-साथ किसानों की हड़तोड़ मेहनत पर कई रोगों का कहर टूट पड़ा। सितंबर माह के अंतिम पखवाड़े में जैसे ही धान की बाली में दूध आया, इस बीच बारिश नहीं हुई, मौसम की बेरूखी के चलते ज्यादातर किसानों की धान रोगों की चपेट में आ गई।
Published on:
21 Oct 2018 12:43 pm
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