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सरकारी स्कूलों की व्यवस्था दुरुस्त करने विशेषज्ञों ने शासन को दिया सुझाव, जानिए क्या है बदहाली की वजह

छात्रों ने भी रखी अपनी बात...

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रीवा

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Ajit Shukla

Aug 04, 2018

Patrika talk show: Teachers and guardian told Rewa govt school status

Patrika talk show: Teachers and guardian told Rewa govt school status

रीवा। सरकारी व निजी स्कूलों में फर्क केवल सुविधाओं का है। शासकीय स्कूल में निजी स्कूल जैसी सुविधाएं हो जाएं तो यहां प्रवेश के लिए लंबी लाइन लग जाएगी और प्राइवेट स्कूलों में तालाबंद हो जाए। पत्रिका की ओर से आयोजित टॉक शो में शिक्षकों व अभिभावकों की ओर से कुछ ऐसी ही बातें की गई। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक एक में आयोजित टॉक शो में सभी ने मिलकर सरकारी स्कूलों के बेहतरी के लिए सुझाव रखा, जो कुछ इस तरह है।

सरकारी स्कूलों में नहीं निजी जैसा तामझाम
जमाना दिखावे का है। यही वजह है कि अभिभावक निजी स्कूलों की ओर भाग रहे हैं। निजी स्कूलों में नियमों की शिथिलता का फायदा उठाया जा सकता है, जबकि सरकारी स्कूल पूरी तरह से नियमों में बंधे होते हैं। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों की साख इसलिए भी गिरती जा रही है। क्योंकि धीरे-धीरे सरकारी स्कूलों पर गरीबों के स्कूल का ठप्पा लगता जा रहा है। जनप्रतिनिधि व अधिकारी सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाएं तो स्थिति बदल सकती है।
मनोज श्रीवास्तव, प्राचार्य शाउमावि-दो।

स्कूलों के खस्ताहाल भवन बयां कर रहे बदहाली
अभिभावक नि:शुल्क शिक्षा देने वाले सरकारी स्कूलों को छोडक़र निजी स्कूलों की ओर भाग रहे हैं, जबकि वहां पैसा भी खर्च होगा। ऐसा किसलिए है, यह सरकारी स्कूलों के भवनों को देखने से ही मालूम हो जाएगा। जिम्मेदार सरकारी स्कूलों के प्रति किस कदर उदासीन हैं। इसका अंदाजा जर्जर भवनों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है।
आबाद खान, जिलाध्यक्ष मप्र. शिक्षक कांग्रेस रीवा।

निजी स्कूल में पढ़ाना बन गया स्टेटस सिंबल
सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों में योग्य शिक्षक नहीं हैं। इसके बावजूद अभिभावक निजी स्कूलों में बच्चों का दाखिला करा रहे हैं। इसकी मूल वजह निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना स्टेटस सिंबल बन गया है। यह दु:खद है। सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के अभाव के चलते धीरे-धीरे सरकारी स्कूलों की साख कम हो गई। पहले जैसी स्थिति अब नहीं रही।
इंदु जैन, शिक्षक।

दिल्ली के स्कूल वायरल वीडियो बना उदाहरण
सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों जैसी सुविधा मिले तो प्रवेश के लिए अभिभावकों की लंबी लाइन लग जाएगी। क्योंकि हम जानते हैं कि सरकारी स्कूलों में निजी स्कूल की तुलना में ज्यादा योग्य शिक्षक हैं। दिल्ली का वह सरकारी स्कूल उदाहरण है, जिसमें निजी स्कूल जैसी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। स्कूल का वीडियो भी वायरल हुआ था।
किरण तिवारी, अभिभावक।

बदली शिक्षा प्रणाली का खामियाजा भुगत रहे स्कूल
सरकारी स्कूलों का यह हाल बदली शिक्षा प्रणाली का नतीजा है। शिक्षकों पर बच्चों के अनुत्तीर्ण होने का दबाव कम हो गया। बच्चा अगली कक्षा में प्रमोट हो जाता है। इसलिए अभिभावक भी ज्यादा दबाव नहीं बनाते हैं। नतीजा शिक्षक बेपरवाह हो गया। पूर्व की भांति प्राथमिक व माध्यमिक कक्षा स्तर पर बोर्ड परीक्षा प्रणाली और उत्तीर्ण व अनुत्तीर्ण होने का सिस्टम लागू किया जाए तो स्थिति बदल जाएगी।
अहमद हुसैन, अभिभावक।

स्कूलों में अव्यवस्था से वाकिफ है अधिकारी
निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए लाइन लग रही है और सरकारी स्कूलों में बच्चों को घर से बुलाया जा रहा है। यह स्थिति क्यों है, यह शासन व प्रशासन से लेकर स्कूलों में शिक्षक तक जानते हैं। अभिभावक भी वाकिफ हैं। सरकारी स्कूलों में निजी स्कूल जैसी व्यवस्था हो तो स्थिति बदलते देर नहीं लगेगी। स्कूल संख्या बढ़ाने के बजाए सुविधाओं पर गौर फरमाया जाना चाहिए।
एसबी सिंह, व्याख्याता।

तय नहीं है अभिभावकों की जवाबदेही
सरकारी स्कूल में बच्चा दो दिन स्कूल आता है तो सप्ताह भर गायब रहता है। जबकि निजी स्कूलों में ऐसा नहीं होता है। इसकी मूल वजह यह है कि सरकारी स्कूलों में अभिभावकों की जवाबदेही तय नहीं है। निजी स्कूलों में फाइन जैसी कई व्यवस्थाएं हैं, जिससे अभिभावक सतर्क रहते हैं। नतीजा परीक्षा परिणाम भी अच्छा होता है और साख अच्छी होती जा रही है।
पुष्पा त्रिपाठी, अध्यापक।
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छात्र बोले, पढ़ाई में नहीं सुविधाओं में है अंतर
पत्रिका टॉक शो में शामिल छात्रों ने कहा कि वह निजी स्कूलों के छात्र नहीं हैं। इससे उनके मन में केवल एक बात आती है कि वह निजी स्कूल में पढ़ते तो उन्हें यह सुविधाएं मिलती। छात्रों के मुताबिक सरकारी स्कूल में उन्हें पढ़ाई में नहीं सुविधाओं में अंतर जान पड़ता है। टॉक शो में शामिल असलम मंसूरी, हरिनारायण, अतुल, आकाश कुमार व राजकुमार साकेत ने निजी और सरकारी स्कूलों की सुविधाओं में अंतर को बयां किया।

छात्रों ने गिनाए यह अंतर
- ज्यादातर निजी स्कूलों में होती है स्मार्ट क्लास, सरकारी स्कूलों में नहीं है।
- सरकारी स्कूलों के भवन व कक्षाएं जर्जर होते हैं, निजी में मेंटेन रहता है।
- निजी स्कूलों में शिक्षक केवल पढ़ाते हैं, सरकारी में दूसरे काम भी करते हैं।
- निजी स्कूलों में खेलकूद से लेकर पेयजल तक की बेहतर सुविधा होती है।
- सरकारी स्कूल के शिक्षक ज्यादातर समय दूसरे कार्यों में व्यस्त रहते हैं।
- सरकारी स्कूल में अनुपस्थित होने पर डांट नहीं पड़ती, निजी में डांट मिलती है।