7 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मौसम के कहर के बाद अब किसानों की फसल पर मडराने लगा यह संकट, जानिए किस तरह हो सकती है सुरक्षा

कृषि वैज्ञानिकों ने सुझाए उपाय...

2 min read
Google source verification

रीवा

image

Ajit Shukla

Aug 25, 2018

Pest and disease risk now on crop in MP, farmer disturb in Rewa

Pest and disease risk now on crop in MP, farmer disturb in Rewa

रीवा। रोग व कीट फसल की उत्पादकता को जबरदस्त तरीके से प्रभावित करते हैं। समय रहते थोड़ी सी सक्रियता से फसल को रोग व कीट से बचाया जा सकता है। किसानों को यह जानकारी कृषि वैज्ञानिकों की ओर से दी गई। कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि रोग व कीट से बचाव का प्रबंधन कर फसल की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है।

उद्यानिकी सहित अन्य फसलों के बचाव का बताया तरीका
कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाण्डेय के मार्गदर्शन और कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एके पाण्डेय के निर्देश में किसानों को विशेष रूप से उद्यानिकी फसलों के बचाव की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. अखिलेश कुमार ने फलों व सब्जियों में लगने वाले कीट से फसल को बचाने के लिए जैव कीटनाशी रसायनो के प्रयोग की जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. केएस बघेल, डॉ. स्मिता सिंह, डॉ. संजय सिंह, डॉ. सीजे सिंह, डॉ. राजेश सिंह, एमके मिश्रा ने संबंधित विषयों की जानकारी दी।

फसल पर कहर व उससे छुटकारा पाने के उपाय

- धान में पत्ती लपेटक कीट की सूडियां पत्ती के दोनों किनारों को लपेटकर अंदर ही अंदर पत्ती के हरे भाग को खुरचकर खाती हैं जिसके कारण पत्तियों पर सफेद धारियां पड़ जाती है। इसके नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानीलीप्रोल 18.5 (एससी) पांच मिली प्रति या डेल्टामेथ्रिन 100 (इसी) 10 मिली प्रति पंप की दर से फसल पर छिडक़ाव करें।

- धान का हरा फुदका कीट भी धान की फसल को प्रभावित कर रहा है। कीट की रोकथाम के लिए पाइमेट्रोजीन ५0 (डब्ल्यूजी) 12 ग्राम प्रति पंप की दर से प्रभावित फसल पर छिडक़ाव करें।

- सोयाबीन की फसल में इस समय गर्डल बीटल कीट की समस्या भी देखी जा रही है। कीट के नियंत्रण के लिए बीटा साइफ्लुथ्रिन, इमिडाक्लोप्रिड 10 मिली या क्लोरेंट्रानीलीप्रोल पांच मिली प्रति पंप की दर से छिडक़ाव कर फसल को सुरक्षित किया जा सकता है।

- सोयाबीन में इल्ली की समस्या देखी जा रही है। यह कीट पत्तियों की नशों को छोडकर शेष भाग को खा जाती है। इससे पौधा अपना भोजन नहीं बना पाता और पौधा सूख जाता है। इसके नियंत्रण के लिए इंडोक्साकार्ब 14.5 (एससी) 12 मिली प्रति पंप या बीटा साइफ्लुथ्रि व इमिडाक्लोप्रिड (सोलोमोन) 10 मिली प्रति पंप का छिडक़ाव करना चाहिए।

- उर्द, मूंग व सोयाबीन में पीला रोग यानी मोजैक के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 (एसएल) 10 मिली प्रति पंप या थायमेथोक्सम 25 (डब्ल्यूजी) 08 ग्राम प्रति पंप की दर से छिडकाव करना चाहिए।

- उर्द में पत्ती धब्बा रोग का प्रकोप भी देखा जा रहा है। इस रोग की रोकथाम के लिए टेबूकोनाजोल 25.9 (इसी) 25 मिली प्रति पंप या कार्बेंडाजिम और मैंकोजेब 30 ग्राम प्रति पंप की दर से प्रभावित फसल पर छिडकाव करना चाहिए।

- उर्द व लोबिया की फसल में माहू कीट की समस्या को नियंत्रित करने के लिए पाइमेट्राजीन 50 (डब्ल्यूजी) 12 ग्राम प्रति पंप या थायमेथाक्सम 25 (डब्ल्यूजी) 8 ग्राम प्रति पंप की दर से छिडक़ाव करें।

- लौकी में गमी स्टेम ब्लाइट समस्या की रोकथाम के लिए टेबूकोनाजोल 25.9 (इसी) 25 मिली या क्लोरोथैलोनिल 75 (डब्ल्यूपी) 30 ग्राम प्रति पंप की दर से छिडक़ाव करना होगा।