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छात्रों को ही नहीं शिक्षकों को भी रास नहीं आ रही सरकारी किताबें, निजी प्रकाशकों की किताब से हो रही पढ़ाई

शिक्षक रद्दी में बेच रहे किताब...

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रीवा

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Ajit Shukla

Aug 23, 2018

Now Textbook Corporation also burden the price increase parents

Now Textbook Corporation also burden the price increase parents

रीवा। पाठ्य पुस्तक निगम की सरकारी किताबें रद्दी के भाव कबडिय़ों के हाथों बेची जा रही हैं और पढ़ाई निजी प्रकाशकों की किताबों से हो रही है। हाइस्कूल बदरांव गौतमान में किताब बेचते पकड़े गए शिक्षक और स्कूलों के निरीक्षण की रिपोर्ट ऐसा ही बयां कर रही है।

शिक्षा अधिकारियों के निरीक्षण में देखने को मिली स्थिति
स्कूलों के निरीक्षण के बाद शिक्षा अधिकारियों की ओर से दिए जा रहे रिपोर्ट पर गौर करें तो शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक के कई शासकीय स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबों से अध्ययन-अध्यापन का कार्य संचालित हो रहा है। मौके पर पहुंचे शिक्षा अधिकारियों ने न केवल शिक्षकों को निजी प्रकाशक की किताब से पढ़ाते हुए पाया है बल्कि छात्रों के झोले में भी ज्यादातर किताबे निजी प्रकाशकों की ही मिली हैं। ऐसा क्यों शिक्षा अधिकारियों के इस प्रश्न के जवाब में छात्रों और शिक्षकों की ओर से कई तर्क मिले हैं। यह बात और है कि शिक्षा अधिकारियों ने शिक्षकों को फटकार लगाते हुए शासन की ओर से उपलब्ध कराई गई नि:शुल्क किताबों से पढ़ाने का निर्देश दिया है।

रद्दी में किताब बेचते हुए पकड़ा गया शिक्षक
गौरतलब है कि ग्रामीणों ने शासकीय हाइस्कूल बदरांव गौतमान के एक शिक्षक को रविवार को छुट्टी के दिन स्कूल खोलकर वर्तमान सत्र की सरकारी किताबों को कबाड़ी के हाथ बेचते हुए पकड़ा है। ग्रामीणों ने इसकी वीडियो क्लिपिंग बनाते हुए कलेक्टर से शिकायत भी की है। जाहिर है कि इस स्कूल में छात्रों को सरकारी किताब नहीं मिली है।

शिक्षकों का तर्क सरकारी किताब में गुणवत्ता नहीं
निरीक्षण के दौरान निजी प्रकाशन की किताबों से पढ़ाते मिल शिक्षकों का तर्क है कि सरकारी किताब में वह गुणवत्ता नहीं जो निजी प्रकाशन की किताबों में है। दूसरी ओर छात्रों का कहना है कि स्कूल खुलने के बाद सरकारी किताब नहीं मिली। पढ़ाई का नुकसान हो रहा था। इसलिए निजी प्रकाशन की किताब खरीद लिया। फिलहाल स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबों का वर्चस्व शिक्षकों को प्रकाशकों की ओर से मिलने वाले प्रलोभन का भी परिणाम है।

शिक्षकों की लिखित में फीडबैक मांगने की तैयारी
जिला शिक्षा अधिकारी अंजनी कुमार त्रिपाठी ने स्कूलों के निरीक्षण रिपोर्ट में निजी प्रकाशकों की किताब पढ़ाए जाने का जिक्र होने की बात स्वीकार की है। डीइओ का कहना है कि इसी के मद्देनजर शिक्षकों से इस बात का फीडबैक लिए जाने का निर्णय लिया गया कि सरकारी किताबों की तुलना में निजी प्रकाशकों की किताबों में क्या बेहतर है। साथ ही यह निर्देश भी जारी किया जा रहा है कि स्कूल में हर हाल में सरकारी किताबों से ही पढ़ाई कराई जाए।