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मनमानी की भेंट चढ़ा नया शैक्षणिक सत्र, स्कूलों में समय से पहले लटक जाते हैं ताले

संसाधनों का अभाव, औचारिकता तक सीमित ज्वॉयफुल कक्षाएं...

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रीवा

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Ajit Shukla

Apr 08, 2018

Rewa's School Principal are irresponsible, Formality in new session

Rewa's School Principal are irresponsible, Formality in new session

रीवा। शासकीय स्कूलों में ज्वॉयफुल कक्षाएं और पढ़ाई दोनों ही अव्यवस्था व मनमानी की भेंट चढ़ गए हैं। सीबीएसई की तर्ज पर शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र की ज्यादातर कवायद केवल कागज तक सीमित होकर रह गई है। एक ओर जहां स्कूलों में पहुंचने वाले छात्रों की संख्या सीमित है। वहीं दूसरी ओर मास्टर साहब आधी छुट्टी में ही पूरी कर रहे हैं।

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भोजन के बाद कर दी जा रही छुट्टी
शासकीय स्कूलों में पत्रिका टीम की ओर से किए गए पड़ताल में शनिवार को कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। वैसे तो स्कूलों का समय सुबह के साढ़े 10 बजे से लेकर शाम के साढ़े चार बजे तक का है। लेकिन ज्यादातर स्कूलों में मध्याह्न भोजन के बाद छुट्टी कर दी जा रही है। पड़ताल में कुछ स्कूलों में शिक्षक तो मिले। लेकिन छात्र नदारद रहेे।

स्कूलों में मनोरंजन के उपकरण नहीं
स्कूल पहुंचने में छात्रों की अरुचि संसाधनों के अभाव का नतीजा बताया जा रहा है। स्कूलों में एक ओर जहां बिजली व पानी की व्यवस्था नहीं है। वहीं दूसरी ओर ज्वॉयफुल कक्षा संचालन के लिए स्कूल के खेलकूद से संबंधित सहित अन्य मनोरंजन के उपकरण नहीं हैं। जिसका नतीजा है कि बच्चे स्कूल जाने में रुचि नहीं ले रहे हैं।

दे रहे समस्या का हवाला
वैसे तो खुलकर कोई भी बोलने को तैयार नहीं हैं। लेकिन उन स्कूलों में जहां शिक्षक मिले। वहां की दलील है कि स्कूलों में गर्मी के चलते बच्चे छुट्टी से पहले ही घर चले जा रहे हैं। स्कूल में गर्मी के चलते तमाम प्रयास के बावजूद उन्हें रोक पाना संभव नहीं हो रहा है।

स्कूल का समय बदलने की अपील
शिक्षकों का तर्क है कि स्कूलों में बिजली व पानी के अभाव और लगातार बढ़ती गर्मी के मद्देनजर स्कूल के समय में परिवर्तन किया जाना चाहिए। इसके लिए पूर्व में अध्यापकों ने डीईओ मिलकर मांग भी की है। लेकिन अभी तक कोई निर्देश जारी नहीं हो सका है।

केस -1 :-
शासकीय कन्या हाईस्कूल घोघर में दोपहर दो बजे ताला बंद मिला। पूरे परिसर में सन्नाटा रहा। कारण मालूम नहीं चल सका।

केस -2 :-
शासकीय माध्यमिक विद्यालय बालक घोघर में सवा दो बजे शिक्षक तो उपस्थित रहे। लेकिन एक भी छात्र नहीं मिले। बताया गया कि बच्चे कम आए थे और चले गए।

केस -3:-
शासकीय माध्यमिक शाला समान का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। शाला में शिक्षक रहे लेकिन छात्र नहीं। बताया गया कि छात्रों को ढाई बजे छोड़ दिया गया।